मथुरा

बीकानेर । पुणे में हुए 60वें राष्ट्रीय निशानेबाजी खेलों के समापन के अंतिम दिन बीकानेर के अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज हेमेन्द्र सिंह कुशवाह ने वर्ष के अंत से पूर्व कांस्य पदक पर निशाना साधा।  कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी बीकानेर के तृतीय वर्ष के छात्र हेमेंद्र सिंह ने कठिन मुकाबले में कांस्य पदक जीता। राजस्थान टीम के मैनेजर अखिलेश प्रताप सिंह ने पुणे से बताया कि हेमेन्द्र सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल जूनियर वर्ग के क्लासिफिकेशन राउंड में अच्छा प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में सेना, हरियाणा और पंजाब के निशानेबाजों के कड़े मुकाबले के बीच 173 अंक अर्जित कर कांस्य पदक जीता। पदक जीतते ही राजस्थान के अन्य निशानेबाजों में हर्ष की लहर दौड़ गई। पदक जीतने के बाद अपनी उपलब्धि पर हेमेन्द्र सिंह ने कहा के वे थोड़े दबाव में थे और स्वर्ण पदक के इतना करीब आकर चूक गए। हेमेन्द्र सिंह फरवरी में दिल्ली में होने वाली प्रतियोगिता के लिए 11 जनवरी को पूना में ट्रायल देंगे। हेमेन्द्र सिंह की इस उपलब्धि पर जिला राइफल संघ बीकानेर के अध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, कोषाध्यक्ष वीरेंदर देवड़ा, अनिल शुक्ला, संजय गुप्ता, राजेंद्र भाटी, अभय पारीक आदि ने खुशी जताई है।             साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । नोटबंदी का आज 50वां दिन है और लोग अभी भी कैश की किल्लत से जूझ रहे हैं। अभी भी लोगों को बैंकों से आरबीआई द्वारा तय की गई नगदी निकासी की सीमा तक भी कैश नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि आरबीआई ने नगदी निकासी की सीमा तय कर रखी है। बैंक से एक हफ्ते में 24 हजार रुपए निकाल सकते हैं, लेकिन लोगों को अभी भी बैंक से कैश निकालने को तरस रहे हैं। वहीं एटीएम के बाहर भी लाइनें लगी हुई हैं। ज्ञातव्य है कि एटीएम से 2500 रुपए प्रतिदिन निकालने की छूट है लेकिन 500 के नए नोटों की किल्लत के चलते लोग एटीएम से भी सिर्फ 2000 रुपए ही निकाल पा रहे हैं। लोग कैश निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कैश की किल्लत के चलते उन्हें तय सीमा तक भी पैसा बैंक से नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी जनता से नोटबंदी पर 50 दिन मांगे हैं। वहीं आज 50 दिन हो गए हैं लेकिन लोगों की समस्या अभी कम नहीं हुई हैं। पीएम मोदी ने कहा था कि 50 दिन के बाद नोटबंदी को लेकर लोगों की समस्याएं कम हो जाएंगी। अब इस बात को लेकर विपक्षी दल पीएम मोदी को घेर रहे हैं।           साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । मोदी कैबिनेट ने प्रचलन से बाहर चुके 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के रखने की सीमा को लेकर बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इसके तहत केंद्र सरकार 31 मार्च के बाद किसी के पास एक सीमा से ज्यादा 500 और 1000 के पुराने नोट पाए जाने पर चार साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही पुराने नोटों में लेन-देन करने पर पांच हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। यहीं नहीं, सरकार और रिजर्व बैंक की इन नोटों के धारकों को उनके नोट का मूल्य देने का वादा करने वाली देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। वैसे तो पुराने नोट 30 दिसंबर के बाद ही बैंकों में नहीं लिए जाएंगे, लेकिन कुछ विशेष मामलों में इन्हें 31 र्माच तक रिजर्व बैंक जमा किया जा सकेगा। मोदी कैबिनेट द्वारा पारित इस अध्यादेश का नाम है- The specified bank notes cessation of liabilities ordinance खबरों के मुताबिक, पुराने नोट रखने की सीमा 10 हजार तक रखी जा सकती है। इस नियम का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये अधिकतम या जितनी राशि मिलेगी उसका पांच गुना जुर्माना, जो भी ज्यादा हो, लगाया जा सकता है।  सूत्रों ने कहा कि ऐसे नोट रखने वाले इन्हें 31 मार्च तक रिजर्व बैंक में जमा करा सकते हैं। हालांकि इस अवधि को भी घटाया जा सकता है। इससे पहले 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने 1000, 5000 और 10,000 का नोट बंद करने के बाद सरकार की देनदारी को समाप्त करने के लिए इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था। 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के साथ ही सरकार ने यह भी कहा था कि पुराने नोट 31 मार्च तक जमा कराए जा सकते हैं। 30 दिसंबर तक बैंकों और डाक घरों में पुराने नोट जमा कराए जा सकते हैं जबकि इसके बाद यह नोट सिर्फ रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराए जा सकेंगे। हालांकि, बाद के नोटिफिकेशंस में यह उस तारीख का जिक्र नहीं है कि आरबीआई में कब तक पुराने नोट जमा कराए जा सकेंगे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले महीने कहा था कि कुछ कानूनी कदम उठाने की जरूरत हो सकती है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने भी कहा था पुराने नोटों को कानूनी तौर पर पूरी तरह अमान्य करने के लिए कुछ कानूनी बदलावों की जरूरत पड़ सकती है। अध्यादेश के जरिए सरकार 30 दिसंबर के बाद पुराने नोट पाए जाने पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।  लोगों के पास पुराने नोट रखने की सीमा तय की जा सकती है और अगर किसी के पास तय सीमा से ज्यादे पुराने नोट मिले तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। पुराने नोट रखने की सीमा 10,000 रुपये तय की जा सकती है और इससे ज्यादा पाए जाने पर 50 हजार रुपये या बरामद राशि का 5 गुना जुर्माना लगाया जा सकता है।            साभार-khaskhabar.com  

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धारावाहिक 'साथ निभाना साथिया' में पिछले ६ वर्षों से चिराग मोदी उर्फ़ मोटा भाई की भूमिका निभाने के बाद धारावाहिक में नीरज भारद्धाज का ट्रैक ना आने के कारण उन्होंने धारावाहिक छोड़ दिया,जिसके कारण वे चर्चा में रहे और दूसरा अपनी पत्नी उपासना सिंह यानि कपिल शर्मा के शो की बुवा को तलाक देने को लेकर भी वे चर्चा में है। कई हिंदी फिल्मों और कई भोजपुरी फिल्मों में भी बतौर हीरो काम करने वाले बहुमुखी प्रतिभाशाली एक्टर नीरज भारद्धाज ने दूरदर्शन के और सेटेलाईट चैनलों के धारावाहिकों में पिछले कई वर्षों से काम किया और कर रहे है। लेकिन अब नीरज भारद्धाज ने पूरा ध्यान फिल्मो पर केंद्रित कर दिया है। अभी वे निर्माता शंभू पांडे की हिंदी फ़ीचर फिल्म 'वफ़ा २', मेहुल कुमार की हिंदी फीचर फिल्म,'शादी के बाद लव मैरेज', हिंदी फिल्म 'कैफ़े कॉफी' कर रहे है। और पहली बार निर्देशक मोहनदास की मराठी फिल्म 'निष्ठां' और पहली बार ही निर्देशक शांतिकेतन की एक मलयालम फिल्म भी कर रहे है। क्या अब नीरज भारद्धाज धारावाहिको में काम नहीं करेंगे या केवल फिल्मो में ही काम करेंगे ? जब यह सवाल उनसे पूछा गया तो नीरज भारद्धाज ने कहा,"आजकल धारावाहिकों में केवल महिलाओं को ही प्रमुखता दी जा रही है और पुरुषों को केवल शो पीस की तरह खड़ा रक्खा जाता है और कभी कबार उनका ट्रैक आता है वर्ना वे केवल खाना पूर्ति के लिए होते है। और इसके लिए निर्माता या निर्देशक कहते है चैनल कहता है और चैनल कहता कि यह सब निर्माता और निर्देशक के ऊपर है। भाई यदि महिलाओं से ही धारावाहिक चलता है तो पुरुष कलाकारों को क्यों लेते है? आखिर एक कलाकार कोई ढंग का काम ही नहीं कर पायेगा तो उसको संतुष्टि कैसे मिलेगी? पैसा ही सबकुछ नहीं होता है। और आप जब तक टीवी पर दिखते है तब तक लोग जानते है, शो ख़तम हुआ लोग भूल जाते है और फिल्म में यदि कोई कलाकार एक भी अच्छा सीन दे दिया तो वह हमेशा याद रक्खा जाता है। इसलिए आजकल फिल्मे ज्यादा कर रहा हूँ। धारावाहिक भी करूँगा, यदि अच्छा और चैलेंजिग रोल मिला तो करूँगा। मैं केवल पैसे के लिए धारावाहिकों में केवल खड़ा होकर तमाशा देखू और खाना पूर्ति का काम अब नहीं करूँगा।"     

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मथुरा। इलैक्ट्रनिक चैनल के पत्रकार हरीश माहौर के आकस्मिक निधन पर ब्रज प्रेस क्लब व उप्र मान्यता संवाद समिति द्वारा संयुक्त रूप से की गई मुआवजे की पहल रंग लाई है। मृत परिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहायतार्थ राशि के रूप में 20 लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की है। बतादें कि ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष व उपजा प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट के नेतृत्व में पत्रकारों ने जिलाधिकारी नितिन बंसल से मिलकर मृतक के बच्चों व परिजनों को आर्थिक सहायता और आवास प्रदान किये जाने की मांग की थी। उपजा प्रदेश उपाध्यक्ष की पहल पर डीएम नितिन बंसल ने मात्र दो घंट के भीतर तत्काल संस्तुति कर सहायता आवेदन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को फैक्स द्वारा भेज दिया है। इसी पर संज्ञान लेते हुए सोमवार को मुख्समंत्री ने मृत पत्रकार हरीश माहौर के परिजनों को 20 लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की है। उप्र मान्यता संवाद समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी व ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट ने जिला प्रशासन व मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

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पहलवानी और कुश्ती की चर्चा इन दिनों बहुत हो रही है। सिल्वर स्क्रीन पर इस सब्जेक्ट पर बनी दो फिल्मों ने धमाल मचाया है। अब इसी को लेकर तीसरी की चर्चा भी शुरू हो गई है। जब कुश्ती की बात हो तो भारत में पहला नाम दारा सिंह का आता है। दारा सिंह के जीवन पर आधारित एक फिल्म बनाने की बात की जा रही है। इसमें अक्षय कुमार ने अपनी इच्छा भी जताई थी। हां यह जरूर है कि दारा सिंह के बेटे बिंदू इस फिल्म को लेकर पशोपेश में हैं। इस बारे मं अभिनेता विंदू दारा सिंह ने कहा कि अभिनेता अक्षय कुमार उनके दिवंगत पिता पहलवान-अभिनेता दारा सिंह की जिंदगी पर बनने वाली फिल्म में काम करने को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं। बिंदु कहते हैं कि अक्षय उनके पिता की जिंदगी पर बनने वाली फिल्म के लिए उपयुक्त हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म को लेकर अक्षय से बात भी हुई थी, उन्होने अभी तक पटकथा नहीं सनी है। ऐसे में अभी कहा नहीं जा सकता है कि वे इस फिल्म में काम करेंगे या नहीं। यह जरूर हैकि हम चाहते हैं कि वे इस फिल्म को करें। वह थोड़ी उलझन में हैं, वह सोच रहे हैं। यह जरूरहै कि अक्षय और बिंदू कई फिल्मों में एक साथ काम कर चुकेहैं। दोनों ने कम्बख्त इश्क, मुझसे शादी करोगी, हाउसफुल, हाउसफुल 2 और जोकर जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं।      साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । कमजोर मांग और वायदा में कमजोरी के संकेतों के बीच दिल्ली सर्राफा बाजार में सोमवार को सोना 250 रूपये गिरकर 11 माह के निम्न स्तर 27,550 रूपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से कमजोर उठान के कारण चांदी भी 210 रूपये कमजोर होकर 38,600 रूपये प्रति किलो पर बंद हुई। बाजार सूत्रों ने कहा कि बाजार में नकदी की कमी के मद्देनजर आभूषण और फुटकर विक्रेताओं की मांग में निरंतर गिरावट से सोना दबाव में है। सरकार ने आठ नवंबर को कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए 500 रूपये और 1,000 रूपये के पुरानी श्रृंखला के नोटों का चलन रोक दिया था जिसके कारण बाजार में नकदी की समस्या चल रही है। चांदी तैयार की कीमत 210 रूपये की गिरावट के साथ 38,600 रूपये प्रति किलो रह गई जबकि चांदी साप्ताहिक डिलीवरी की कीमत 460 रूपये की गिरावट के साथ 38,465 रूपये प्रति किलो पर बंद हुई।        साभार-khaskhabar.com  

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बेंगलुरू । लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल के लिए यह साल काफी मुश्किल रहा है। शटलर सायना ने पैर की चोट से उबरने के बाद ऑस्ट्रेलियन ओपन जीता लेकिन रियो ओलंपिक के दौरान उनके घुटने में बड़ी चोट लग गई, जिससे वे महिला एकल वर्ग स्पर्धा के दूसरे दौर से ही बाहर हो गईं। इसके बावजूद सायना के कोच विमल कुमार का मानना है कि उन्हें जनवरी में होने वाली प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) में खेलने से दूर रहने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि बैडमिंटन लीग अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की तरह कठिन मुकाबला नहीं है। विमल से जब पूछा गया कि सायना को पीबीएल से आराम देना क्या सही नहीं होगा क्योंकि वे अभी चोट से उबरी हैं तो उन्होंने कहा कि सायना को पीबीएल से दूर रहने की कोई जरूरत नहीं है। इससे उनके करिअर प्रोफाइल में बढ़ोतरी होगी। यह लीग इतनी कठिन नहीं है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जितनी प्रतिस्पर्धी नहीं है। कोच ने कहा कि पीबीएल दो महीने तक नहीं खेली जाती जैसे टी20 टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल)। उन्होंने कहा कि पीबीएल आईपीएल या किसी अन्य क्रिकेट लीग की तरह नहीं है जो दो महीने तक चलती है। यह दो हफ्ते तक चलती है जो आकर्षण का केंद्र रहती है। विमल ने कहा कि पीबीएल से सायना के ट्रेनिंग सत्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यहां 16 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट हैं जो उसे फिट रखेंगे। उन्होंने कहा कि पीबीएल किसी भी तरह से भारतीय महिला एकल स्टार के ट्रेनिंग कार्यक्रम को प्रभावित नहीं करेगी क्योंकि यहां 15 से 16 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट हैं।         साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़/नई दिल्ली । 8 नवंबर को पीएम मोदी की काले धन की धरपकड़ को लेकर शुरू की गई मुहिम का ही हिस्सा है कि काले धन का पता लगने के बाद व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इनकम टैक्स विभाग ने कहा है कि छापेमारी के बाद यदि बेहिसाबी धन रखने वाले लोग इसका स्रोत नहीं बता पाएंगे तो उन पर 137 प्रतिशत टैक्स और जुर्माना लगेगा। आयकर विभाग के मुताबिक, यदि छापेमारी के दौरान यह स्वीकार किया जाता है कि बरामद रकम या सामान अघोषित आय का हिस्सा है और आमदनी का स्रोत बताया जाता है तो यह कर और जुर्माना 107.25 प्रतिशत होगा। विभाग ने कहा कि कर चोरी करने वाले नोटबंदी के बाद बैंक जमा पर 50 प्रतिशत का भुगतान कर पाक साफ होकर निकल सकते हैं। मगर कोई व्यक्ति छापेमारी के दौरान अपनी अघोषित आय को स्वीकार नहीं करता है, और कर नहीं दिया गया है और वह आमदनी का स्रोत नहीं बता पाता है तो ऐसे में कर जुर्माना 137.25 प्रतिशत लगेगा। मुख्य आयुक्त आयकर (एनडब्ल्यूआर) राजेंद्र कुमार ने इस बारे में कहा कि हम लोगों से अपनी बैंकों और डाकघरों में जमा अघोषित नकदी का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, 2016 के तहत खुलासा करने को कह रहे हैं। क्या है काला धन ? ता दें कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना 17 दिसंबर को पेश की गई है और 31 मार्च, 2017 तक खुली रहेगी। काला धन, सरकार की नजर में, वह पैसा है जिस पर टैक्स नहीं चुकाया गया है। साथ ही यदि आपके नाम बेनामी संपत्ति है तो भी आप इसके खिलाफ भविष्य में होने वाली कार्रवाई से बच सकते हैं। इसके लिए आपको इस संपत्ति का खुलासा करना होगा और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 50 फीसदी जुर्माना देना होगा। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बताया था कि अगर आपकी जानकारी में किसी के पास काला धन है तो उसकी शिकायत इस ईमेल पते पर करें- blackmoneyinfo@incometa&.gov.in         साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस शुरू से सरकार को घेर रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी हर रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर नोटबंदी को लेकर हमला बोल रहे हैं। अब कांग्रेस सरकार को नोटबंदी पर घेरने को लेकर रणनीति तैयार करने में लगी है। इसके लिए कांग्रेस ने आज सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। लेकिन कांग्रेस नोटबंदी पर सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने में नाकाम हो गई है।  प्राप्त जानकारी के अनुसार आज होने वाली विपक्ष की बैठक में कांग्रेस का साथ देने सिर्फ ममता बनर्जी और लालू यादव पहुंचने वाले हैं। गौरतलब है कि इससे पहले नोटबंदी को लेकर सभी विपक्षी दल एकजुट थे। सभी विपक्षी दलों ने नोटबंदी पर संसद से लेकर सडक तक कांग्रेस का साथ दिया है लेकिन अब विपक्षी दल कन्नी काट रहे हैं। नोटबंदी को लेकर आज होने वाली बैठक में में अन्य विपक्षी दलों ने कांग्रेस के निमंत्रण को अस्विकार कर दिया है। माना जा रहा है कि अन्य विपक्षी दल यह संदेश नही देना चाहते कि उन्हें कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार है।  दूसरा विपक्ष के कई दलों के बीच सत्ता संघर्ष चल रहा है, जैसे पश्चिम बंगाल में लेफ्ट और ममता बनर्जी के बीच, यूपी में एसपी और बीएसपी के बीच, पंजाब में कांग्रेस और केजरीवाल के बीच। वहीं जेडीयू भी इस बात पर नाराज है कि ममता बनर्जी ने नोटबंदी को लेकर नीतिश कुमार को गद्दार कह दिया था। वहीं लेफ्ट इस बात से नाराज है कि संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अकेले ही पीएम मोदी से मिलने चले गए थे। अब नोटबंदी को लेकर विपक्षी दलों में पडी यह फूट कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बनी सकती है।  इस फूट के बाद कांग्रेस इस कोशिश में लगी है कि अगर अन्य विपक्षी दलों से कोई बडा नेता इस बैठक में ना आए तो कम से कम अपने प्रतिनिधि के तौर पर किसी नेता को बैठक में भेज दें, ताकि नोटबंदी पर विपक्ष की एकता का दावा किया जा सके।         साभार-khaskhabar.com  

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