धनुष भंग लीला का मथुरा के कलाकार मंचन करते हुए मथुरा। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के उपक्रम इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र दिल्ली के भव्य मुक्तकाशी रंगमंच पर मथुरा के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘धनुष भंग’ लीला ने राजधानी के कला संस्कृति क्षेत्र से जुड़े विद्वानों और भक्ति विभोर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।कार्यक्रम का शुभारम्भ केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा, आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी तथा कार्यक्रम संयोजक मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। डा. महेश शर्मा ने श्री राम, लक्ष्मण तथा मुनि विश्वामित्र के स्वरूपों तथा व्यासपीठ पर विराजित श्याम सुन्दर चतुर्वेदी को माल्यार्पण के पश्चात आरती उतार कर अपने सम्बोधन में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मर्यादा पुरूषोत्तम राम की मर्यादा आदर्श चरित्र और लोक कल्याणकारी भावना से पे्ररणा प्राप्त करके ही देश में रामराज्य की स्थापना की जा सकती है। मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि मथुरा की रामलीला की विशेषताओं के वर्णन के मध्य कहा कि 175 वर्ष प्राचीन मथुरा की रामलीला देशभर मे प्रसिद्ध ही नही सिद्ध रामलीला है जो अंगे्रजी शासन काल मे भारत माता की झाँकी निकालने के विरोध तथा ब्लैक आउट के दिनों मेें भी की जाती रही। ‘धनुष भंग’ लीला में राम की मुख्य भूमिका में गोपाल चतुर्वेदी, लक्ष्मण की भूमिका में आकाश शर्मा, मुनि विश्वामित्र की भूमिका में विवेक भैयाजी, परशुराम की भूमिका में नितिन, रावण की भूमिका में ले बाबू चतुर्वेदी पेटल राजा की भूमिका में अवधेष, जनक की भूमिका में बद्री जी के अतिरिक्त अनिकेत शर्मा, प्रमोद चतुर्वेदी, सर्वेश, बनवारी, मोनू, दीपक शर्मा, अशोक शर्मा, अतुल चतुर्वेदी, नितिन शर्मा तथा विपिन गौड़ ने अपने अभिनय के द्वारा दर्शकों की सराहना प्राप्त की। वादक कलाकार मयंक मोनू, तथा विजय, निर्देशक अनिल स्वामी एवं विनोद चतुर्वेदी थे।
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