अहिंसक शक्तियों को ‘‘गे्रट वे आॅफ इण्डिया‘‘ के बाहर फेंक देना चाहिये-मुनि श्री तरूण सागर जी महाराज
देश में सत्य और अहिंसा की एक और महाभारत होनी चाहिये
-आघ्यात्म की ओर कदम बढाऐं जिससे देश का भविष्य सुरक्षित हो
कोसीकला। गुरूवार की प्रात: बेला थी। आकाश में काली बदलियों के बीच सूर्यदेव भी आंख मिचौली खेल रहे थे। हल्की हल्की ठंडी हवा के हिलोरे भी नंगे पाव दौड रहे भक्तों की आस्था को न डिगा सके। इसी बीच खवर मिली कि इस ब्रजधाम की पावन धरा नन्दबाबा की कोषस्थली कोसीकलां में उन क्रान्तिकारी मुनिश्री का आगमन हुआ है जिनकी एक झलक पाने को नगर के लोग वर्षों से इन्तजार कर रहे थे। और हो भी क्यों न माना जाता है कि एक प्रखर सन्त के दर्शन मात्र से कई जन्मों के पाप धुल जाते है। ऐसा माना जाता है। इसलिए उनकी अगुवाई में लोगों ने पलक पावडे विछा दिये।
नन्दबाबा की कोषस्थली बृजधाम कोसीकलां में गुरूवार को राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सेना द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर से नवाजे गये मुनि श्री 108 तरूण सागर जी महाराज जिन्होने 13 वर्ष की आयु में अपना घर-बार त्यागकर सन्यास लिया और कडवे प्रवचन के माध्यम से सारे विश्व में ख्याति प्राप्त की ने मंगल प्रवेश किया। तो सकल द्गिम्वर जैन समाज के हर्ष का ठिकाना न रहा और जैन समाज ही क्यों नगर के सभ्रान्त लोग भी ठंड को ठेंगा दिखा उनके एक मात्र दर्शन के लिए उनके सामने नतमस्तक हो गये। सादे स्वभाव वाले मुनि श्री तरूण सागर महाराज के दर्शनों के लिए आस्था का सैलाब ऐसा उमडा कि मुनिश्री को भी भक्ति और भक्तों के सामने नतमष्तक होना पडा और दोनो हाथ उठाकर उपस्थित भक्तों को अपने आर्शीबचन से कृतार्थ कर दिया। लोग इक्टठा हुए और लम्बा कारवा बनता चला गया। चहंूओर से हो रही मुनिश्री की जय जयकार से समूचा शहर भक्तिमय हो उठा। जैन समाज के लोगों द्वारा पग-पग पर उनका पुष्प वर्षा व मंगल आरती उतार कर अभूतपूर्व स्वागत किया। नगर के हॉइवे पर बठैन गेट सहित दर्जनों स्थानों पर उनका समाज एवं अन्य लोगों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। तत्पश्चात मुनि श्री रेलवे स्टेशन स्थित जैन धर्मशाला पहुंचे जहां उन्होने एक बार फिर भक्तों को दर्शन दे समाज के उत्थान के लिए कुछ कडवी बात कहकर सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। तदोपरान्त मुनिश्री पत्रकारों से रूबारू हुए तो पत्रकारों ने एक के बाद एक सबाल उनसे कर डाले। पत्रकारों द्वारा पूछे गये सबालों कि सहिष्णुता पर लोगो द्वारा की जा रही वयानवाजी को लेकर देश में सरगर्मिया तेज हैं तो उन्होने उदाहरण देकर कहा कि एक मछली पानी में रहकर जिस तरह से पानी का महत्व नहीं जान सकती, अगर मछुआरा उसे पानी से बाहर फेंक दे तो कुछ ही देर बाद जब वह तडफेगी तो उसे पानी का महत्व समझ आ जाऐगा अर्थात उन्होनें विना नाम लिए कहा कि जिन्हें एसा लगता है तो वे बाहर (पाकिस्तान) चले जाऐं। उन्होने कहा कि विश्व में सहिष्णुता के मामले में भारत जैसा कोई देश नहीं लेकिन मेरा मानना है कि इस भारत में एक और महाभारत की जरूरत है कहा कि 500 वर्ष पहले जो महाभारत हुई तख्त और ताज के लिए हुई थी लेकिन वे आज की महाभारत की परिकल्पना सत्य और अहिंसा की महाभारत के लिए करते है। उन्होने कहा कि देश के संत मुनियों को एकजुट होकर श्रीकृष्ण की भूमिका अदा कर एक और धर्मयुद्घ लडना होगा। उन्हें चाहिये कि वह अर्जुन का गांण्डीव उठाकर इन अहिंसक शक्तियों को ‘‘गे्रट वे आॅफ इण्डिया‘‘ के बाहर खदेड दें। देश में हो रही गौकशी को लेकर उन्होने कहा कि गाय माता धर्मनीति और राजनीति के बीच फंसकर रह गयी है। गौकशी में देश के राजनेता मंत्री वोटो की राजनीति गोटियां सेक रहे है। गाय के मुददे को इन सभी जंजालों से निकालकर अर्थनीति से जोडा जाना चाहिये। गाय एक सम्मानित पशु है और एक समुदाय विशेष के लोगो से गाय को विशेष सम्मान देने का आव्हान किया। कहा कि संतो के पास उपदेश और सत्ता के पास ताकत है। जब तक दोनो सम्मति होगे तभी समन्व्य होगा और गाय को बचाया जा सकता है। पत्रकारों के एक सवाल कि आखिर गरीबों, असहायों की हितैषी सरकार कौन सी है? तो उन्होने हंसते हुए जबाव दिया कि जो सरकार विपक्ष में रहती है वही गरीबो और असहायों की हितैषी सरकार होती है। आखरी सवाल कि वे युवाओं को क्या संन्देश देना चाहेंगे जो कि शिक्षित होकर भी दुनिया के रास्ते से भटक गया है। तो उन्होने कहा कि युवाओं के लिए वे यहीं कहेंगे कि युवाओं को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। कहा कि आघ्यात्म से भटकने का कारण एक मात्र यही है कि युवाओ की सोच है कि मुनिश्री दिल से कुछ और जुवा से कुछ और बोलते हैं कहा कि अरे भाई मुनिश्री जो भी बोल रहे हैं जंहां से भी बोल रहे हैं केवल तुम्हारे भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहे है। उन्होने पढे लिखे और शिक्षित बने आतकिंयो पर चिन्ता जाहिर करते हुए कहा कि उनकी समझ से परे है कि इतना शिक्षित होने के बावजूद भी वे अपने ही खून के प्यासे कैसे बन सकते है? इसके बाद समाज के लोगों ने उनसे 10 दिसम्वर के बाद इस पावन धरा पर अपने व्यस्त कार्यक्रम का थोडा सा समय देकर लोगों को जागरूक कर उनकी मुक्ति का भी मार्ग प्रशस्त करें। माना जा रहा है कि आगामी माह में उन्होने चार द्विवसीय प्रवचन कार्यक्रम करने की अनुमति देने का समाज से वादा किया है। तत्पश्चात उन्होन आहार किया और मथुरा के लिए प्रस्थान कर गये। इस दौरान स्वागत करने वालों में डॉ0 अशोक जैन, अशोक कामिंया, प्रेमचन्द जैन, सन्टू जैन, सुभाष चन्द जैन, राजेन्द्र जैन, मुकेश जैन, सतीश चन्द जैन, गोपाल प्रसाद जैन, राहुल जैन, दीपक जैन, हर्ष जैन, विवेक जैन, लक्ष्मण जैन, अरूण जैन, मौना सर्राफ, भारत जैन, पंकज जैन, सन्टू जैन, सौरभ जैन, महावीर प्रसाद जैन, डॉ0 उदयवीर जैन, गणेश जैन, पप्पी जैन, राजीव सर्राफ, धर्मचन्द जैन आदि सहित नगर के सैकडों सभ्रान्त लोग उपस्थित थे।
Read More