मथुरा

मथुरा। भाजपा के जिला चुनाव अधिकारी सत्यदेव पचैरी मथुरा आये और वरिष्ठ नेताओ व कार्यकर्ताओ से विचार विमर्श करके आवश्यक दिशा निर्देश दिये। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डी पी गोयल की अध्यक्षता में समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से चुनाव प्रक्रिया को सविधान के अनुसार पारदर्शिता से करने का निर्णय लिया गया। बैठक के उपरांत जिला चुनाव अधिकारी सत्यदेव पचैरी ने कहा कि कार्यकर्ताओ के अवलोकनार्थ सक्रिय सदस्यता सूची का प्रकाशन आगामी 22 व 23 नवम्बर को भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय डेम्पियर नगर पर किया जायेगा। सम्पूर्ण जनपद की मण्डलवार साधारण व सक्रिय सदस्यता सूची जिला महामन्त्री रविन्द्र पाण्डेय व अजय कुमार पोइया की देखरेख में किया जायेगा। समन्वय समिति की बैठक में सत्यदेव पचैरी, डीपी गोयल, बाँके बिहारी माहेश्वरी, रविकांत गर्ग, तेजवीर सिंह, ओमप्रकाश सिंह, रविन्द्र पाण्डेय, रघुवर तोमर मौजूद थे।

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मथुरा। क्षत्रिय महासभा द्वारा स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वीरांगना लक्ष्मीबाई की 180वीं जयंती राजपूत हाउस गोवर्धन रोड पर मनायी गयी। श्रद्धांजलि समारोह में कन्या बचाओ अभियान और तेजी से चलाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उनके जीवन पर प्रकाश डालते महासचिव मोहन सिंह राजपूत ने महारानी लक्ष्मीबाई को भावभीनी श्रद्धांजलि देते कहा कि वे वतन पर मरने वाली महिला थीं। इस अवसर पर सत्येन्द्र सिंह, संजीव सिंह, थान सिंह, जवाहर सिंह, अटल सिंह, भूपेन्द्र राजपूत, रतन सिंह, अमित तोमर, भूरा पंडित, पुष्पेन्द्र राजपूत मौजूद थे। इस अवसर पर महारानी लक्ष्मीबाई और इंदिरा गांधी के चित्रों पर पुष्प अर्पित किये गये।

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डकैती की घटना की जानकारी जुटायी घटनास्थल का किया मुआयना, जल्द घटना के खुलासे का आश्वासन सौंख समाचार। मगोर्रा थाना क्षेत्र के गांव पाली डूंगरा में ब्लाॅक प्रमुख गोवर्धन के यहां विगत दिनों पडी डकैती की गूंज लखनउ तक पहुंच गयी है। घटना के खुलासे को लेकर पुलिस दबाव में है। इसी के चलते एडीजी क्राइम लखनउ व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा गुरूवार को पाली डूंगरा में घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। संज्ञान रहे विगत 8 नवम्बर की रात्रि को ब्लाॅक प्रमुख हरनंदी देवी के यहां डकैतों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया था। जिसमें उनके दोनों पुत्र घायल हो गये थे। इसे लेकर ब्लाॅक प्रमुख के पुत्र व सपा नेता प्रीतम सिंह ने बुधवार को सीएम के वृन्दावन आने पर उन्हें घटना से अवगत कराया था। सीएम के निर्देश पर पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया और इसी के चलते बुधवार को आईजी व डीआईजी गांव पाली डूंगरा में पहुंचे थे और गुरूवार को एडीजी क्राइम हितेश चंद अवस्थी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डां. राकेश सिंह पाली डूंगरा पहुंचे और ब्लाॅक प्रमुख के परिजनो से घटना की जानकारी ली और ब्यौरा जुटाया। उन्होने उन कमरों और अलमारियों को भी देखा जिन्हें डकैतों ने तोड दिया था। उन्होने मौके पर जल्द ही घटना के खुलासा किये जाने का आश्वासन भी दिया।    

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सौंख के प्रसिद्ध जहारवीर मंदिर पर सजी छप्पन भांेग की झांकी सौंख। बुधवार को स्थानीय जाहरवीर मंदिर पर छप्पन भोग व विशाल प्रसाद भंडारा का आयोजन किया गया। छप्पन भोग की झांकी देर रात सजायी गयीं। श्रद्धालु देर रात तक मंदिर पर झांकियों का आनन्द लेते रहे। हवन भी चलता रहा। इससे पूर्व दिन में विशाल प्रसाद वितरण भंडारा हुआ। जिसमें आस पास के ग्रामीणो ने प्रसाद पाया। इस मौके पर पवन कुमार, विनोद, सुभाष चंद अग्रवाल, छेदालाल सिंघल, महेश अग्रवाल, हीरों अग्रवाल ,सोनू अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल आदि का सहयोग सराहनीय रहा।

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पूज्य काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज की असीम अनुकम्पा एवं पावन सानिध्य में रमणरेती महावन में आज बडी धूमधाम के साथ दिव्य चुनरी मनोरथ मनाया गया। गुरूवार 19 अक्टूबर को चुनरी मनोरथ कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः 9ः30 बजे से यमुना पूजन कार्यक्रम के साथ हुयी वेदपाठी बालकों दिव्य मंत्रोच्चारण के साथ यमुना महारानी का पूजन किया गया। इसके पश्चात् यमुना भक्तों द्वारा महाराज श्री के सानिध्य में बंसल परिवार के सदस्यों द्वारा यमुना महारानी को चुनरी ओढा कर चुनरी मनोरथ मनाया गया। यमुना पूजन एवं चुनरी मनोरथ कार्यक्रम के पश्चात् प्रातः 11ः30 पर यमुना महारानी को 56 भोग अर्पित किये गये एवं भक्तों द्वारा छप्पन भोग की आरती कर मनोकामना मांगी गई। परम पूज्य काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज ने आशीर्वाद देते हुये यमुना महारानी की दशा सुधारने के लिये सभी के एकजुट हो प्रयास करने की बात कही।   यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल जी ने बताया कि यमुना महारानी भगवान श्री कृष्ण की शाश्वत संगीनी है एवं ब्रज में वह भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की साक्षी है। वर्तमान में उनकी स्थिति समस्त वैष्णवों के लिये चिन्ता का विषय है। इसके लिये सभी वैष्णवों को एकजुट हो मजबूत ईच्छाशक्ति के साथ यमुना की स्वच्छता के लिये कार्य करने की। यमुना मिशन यमुना की स्वच्छता के लिये कटिबद्ध है एवं उस दिशा में कार्य कर रहा है।  दोपहर 1 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम की छलकियां देखने को मिली जिसमें बाहर से आये कालाकारों द्वारा भजन प्रस्तुत किये गये इसके पश्चात इस्काॅन वृन्दावन के भक्तों द्वारा संकीर्तन प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम का आकर्षण केन्द्र प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल जी द्वारा गाये गये भजन रहे। उनके द्वारा प्रस्तुत स्वर लहरियों में पूरा पण्डाल झूमने लगा। अनुराधा पौडवाल जी द्वारा यमुना महारानी पर कई भजन गाये गये जिनकों सुन भक्त भाव विहोर हो गये।  इस अवसर पर राजेन्द्र प्रसाद बंसल, हरदेवानन्द जी महाराज, पं अनिल शर्मा, के.एन शशी, पं. देवेन्द्र शर्मा जी, दाउ दयाल जी, राजीव गोस्वामी, मुकेश ठाकुर, लपुटी पंडित, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।   

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दीपक एक युवक है जो कुल्‍लू में एक स्‍थानीय रेस्‍टोरेंट में बरतन धोने का काम करता है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। आंखों की जांच के बाद उसे पता चला कि उसकी दृष्टि लौट सकती है, किन्‍तु इसमें हजारों रुपये लग सकते हैं। मण्‍डी जिले के तालीहाद पंचायत के एक अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी मनीष को उसके बारे में पता चला। मनीष ने बताया कि उसे मुख्‍यमंत्री कोष से वित्‍तीय सहायता मिल सकती है। उसने आवेदन तैयार करने में उसकी मदद की। आवेदन को मुख्‍यमंत्री कार्यालय में भेज दिया गया, जहां से उसे सकारात्‍मक ऊत्‍तर मिला। अब दीपक को 40 हज़ार रुपये मिलेंगे जिससे वह अगले माह पीजीआई, चण्‍डीगढ़ में अपना ऑपरेशन कराएगा। बाजोत गांव के कुछ बच्‍चे स्‍कूल नहीं जा सकते, क्‍योंकि उन्‍हें एक निजी भूमि से होकर जाने की अनुम‍ति नहीं दी गई थी जो एक वरिष्‍ठ माध्‍यमिक विद्यालय तक जाने में उनके रास्‍ते में आती थी। मनीष ने इस मुददे का समाधान निकाला और बच्‍चे फिर से स्‍कूल जाने लगे हैं। एक अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी की सहायता मिलने के कारण दीपक ने 120 से अधिक मामले का समाधान निकालने अथवा मदद करने का संकल्‍प लिया है, जिसमें विभिन्‍न कल्‍याण योजनाओं के बारे में ग्रामीणों को शिक्षित करना और अपने अधिकार के तहत लाभ का दावा करने के लिए आवेदन तैयार करने में उनकी मदद करना तथा विवादों का निपटारा करने में मदद करना शामिल है। राज्‍यों में हजारों अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी हैं, जो अपने अधिकारों, हकों से वंचित ग्रामीणों और विवाद में फंसे लोगों की मदद करते हैं। वर्ष 2009 में राष्‍ट्रीय वैधानिक सेवा प्राधिकरण (नाल्‍सा) ने अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी योजना तैयार की। इसका उद्देश्‍य जीवन के विभिन्‍न क्षेत्रों के चुनिन्‍दा स्‍वयंसेवियों को वैधानिक प्रशिक्षण प्रदान करना था ताकि इस प्रकार की वैधानिक सेवा संस्‍थाओं तक लोगों के पहुंचने के बजाय लोगों के दरवाजे तक वैधानिक सेवा पहुंचाई जा सके। अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी, गांव के आम लोगों की बीपीएल कार्ड प्राप्‍त करने, महात्‍मा गांधी नरेगा योजना के अधीन जॉब कार्ड प्राप्‍त करने, प्रार्थना-पत्र तैयार करके खोए हुए राशन कार्ड आदि बनवाने, आवेदन तैयार करने जैसी समस्‍याओं का समाधान करने में मदद करते हैं। ये मेड़ों, अथवा वृक्ष की शाखाओं के अधिक लटकने, पानी अथवा सिंचाई नहर आदि से जुड़े साधारण विवादों की स्थिति में भी ग्रामीणों की सहायता करते हैं। एक प्रशिक्षित अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी समस्‍याओं के समाधान करने में ग्रामीणों की सहायता कर सकते हैं। आवश्‍यकता पडने पर पेशेवर पैनलबद्ध वकील की सहायता ली जा सकती है। ये अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी जहां काम करते हैं, उसे वैधानिक सहायता क्‍लीनिकों के नाम से जाना जाता है। प्रत्‍येक वैधानिक स‍हायता क्‍लीनिक में कम-से-कम दो अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी उपलब्‍ध होना चाहिए। वैधानिक सेवा संस्‍था की ओर से वैधानिक सहायता क्‍लीनिकों में प्रशिक्षित अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी को तैनात किया जा सकता है। ऐसे क्‍लीनिकों में तैनात अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवियों का काम प्रार्थना-पत्र, आवेदन, दलीलें और अन्‍य वैधानिक दस्‍तावेज तैयार करने में वकीलों की सहायता करना भी है। निकटवर्ती वैधानिक सेवा संस्‍था अपने क्षेत्राधिकार में स्थित वैधानिक सहायता क्‍लीनिक में अपने पैनल के वकीलों अथवा फीस देकर वकीलों को भी तैनात कर सकती है। नाल्‍सा का अंतिम उद्देश्‍य यह है कि दूरस्‍थ गांव में रहने वाले लोग भी अपने वैधानिक अधिकारों और विभिन्‍न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें। राष्ट्रीय वैधानिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) द्वारा ट्रांसजेंड़र (किन्नर) लोगों को कानूनी सेवा देने के लिए नई योजना शुरू की गई। इससे पहले इसी साल नाल्सा द्वारा सर्वोच्च न्यायलय में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए किन्नर समुदाय को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय का कहना था कि हमारे संविधान और संसद तथा राज्य विधानसभा द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत इस समुदाय के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए तीसरे लिंग के रूप में व्यवहार किया जाना चाहिए। न्यायपीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि उन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ी जातियों की तरह सुविधांए दी जाएं और शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। विभिन्न न्यायालयों में लंबित लाखों मामलों के चलते लोक अदालत कई मामलों को निपटाने में सहायता दे रहा हैं। देश के सभी जिलों में लंबित मामलों और साथ ही साथ अदालत में पहुंचने से पहले ही विवादों के निपटारे के लिए नाल्सा स्थायी तौर पर प्रचलित लोक अदालतों के गठन की जिम्मेदारी निभा रहा है। (ब) वैधानिक प्राधिकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में लंबित मामलों और साथ ही साथ अदालत में पहुंचने से पहले ही विवादों के निपटारे हेतु सरकारी विभागों के लिए पृथक स्थायी और प्रचलित लोक अदालतों का गठन। (डी) देश के सभी मजिस्ट्रेट न्यायालयों में कानूनी सहायता परामर्शदाता की नियुक्ति। कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में अभी भी जानकारी का अभाव है और इसलिए नाल्सा कानूनी अज्ञानता दूर करने और कानूनी जागरूकता अभियानों को चलाने पर जोर दे रहा है। नाल्सा कानूनी साक्षरता और कानूनी जागरूकता अभियानों को चलाने के लिए गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमाणन के लिए भी जिम्मेदार है। नाल्सा के मुताबिक सभी राज्य वैधानिक सेवा प्राधिकरण देश के पिछडे औऱ दूर-दराज इलाकों में कानूनी जागरूकता अभियानों को चलाने के लिए उपयुक्त और विश्वसनीय गैर-सरकारी संगठन(एनजीओ) की पहचान कर रही है। जरूरतमंद लोगों को वैधानिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान किये जाने के उद्देश्य के लोगों को इन योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर आयोजित मेलों में भी नाल्सा की मुफ्त कानूनी सहायता की जानकारी मोबाइल वैन के माध्यम से दी जा रही है। शिक्षा विभाग की सहायता से सभी राज्यों में नियोजित तरीके से स्कूलों और कॉलेजों में कानूनी जानकारी कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। युवा पीढ़ी के बीच कानून का पालन और कानूनी नियमों के मनोविज्ञान की जानकारी और कानूनी जागरूकता बढाने के लिए राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरण की देख-रेख में सभी उच्च माध्यमिक शिक्षा विद्यालयों में स्कूल लीगल लिटरेसी क्लब बनाए जा रहे हैं। लोग नि:शुल्क प्रदान की जाने वाली कानूनी सहायताओं से तभी लाभान्वित हो सकेंगे जब अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं की जानकारी होगी। (लेखिका स्‍वतंत्र पत्रकार हैं)

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