मथुरा

सौंख। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने गौरव गुप्ता को भाजयुमो का बृज प्रदेश मंत्री बनने पर हर्ष व्यक्त किया है। हर्ष व्यक्त करने वालों में जिला योजना समिति के सदस्य प्रतिनिधि अनिल चैधरी, ऋषि पचैरी, सोनू अग्रवाल, सीताराम शर्मा, कुलदीप शर्मा, मनोज आदि प्रमुख हैं।

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मथुरा : जनपद स्थित यमुना नदी खादर में चल रही अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम को उस वक्त और बल मिला जब कई सामाजिक संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता खुलकर इसके विरोध में सामने आए। 

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 मथुरा : जनपद स्थित यमुना नदी खादर में चल रही अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम को उस वक्त और बल मिला जब कई सामाजिक संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता खुलकर इसके विरोध में सामने आए।  ध्यान रहे, वृंदावन के अंतर्गत पानी गांव से छटीकरा तक अवैध कालोनी काटने का धंधा चरम पर है। महंगी कारें जैसे बड़े तोहफे देकर एजेंटों के जरिए ग्राहकों को ‘लूटने’ का क्रम जारी है। शहर के कई बड़े होटलों में ऐसी कंपनियों के दफ्तर खोले गए हैं। क्षेत्र में कम से कम 50 ऐसी कंपनियां इन गतिविधियों में लिप्त हैं। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। ‘रुपये 2.40 लाख का प्लॉट खरीदो और रुपये 2.56 लाख का बोनस वापस पाओ’ जैसे लुभावने नारों के चलते ग्राहक आसानी से इनके मकड़जाल में फंस जाते हैं। विज्ञापनों में कहीं भी यह नहीं लिखा जाता है कि इस प्लॉट का आकार क्या होगा और यह कहां होगा। नियम और शर्तों का कहीं भी उल्लेख नहीं किया जा रहा है। विज्ञापनों में यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि ये फ्लैट और प्लॉट विकास प्राधिकरण से ‘अप्रूव’ कराए गए हैं या नहीं...। कहां बन रहे हैं और कितने मंजिल के बन रहे हैं, इसकी भी कोई जानकारी विज्ञापनों में नहीं दी गई है।  राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहले ही 14 सरकारी विभागों को यमुना नदी की खादरों में चल रहे अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस भेज चुका है। अधिकरण ने 26 मई तक नोटिस का जवाब मांगा है।    'ब्रज बचाओ समिति' के संयोजक मनोज चौधरी ने कहा कि खादरों पर कालोनी काटना अवैध है। वृन्दावन और मथुरा में इन कालोनाइजर का बड़ा खेल है। भोले-भाले लोग इनके जाल में फंस जाते हैं। इनके निशाने पर वृन्दावन से बाहर के लोग होते हैं जो इस कृष्णनगरी में अपना आशियाना बसाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को यहां जमीन दिखाकर उनको ठगा जाता है और उनसे मोटी कमाई करके ये कंपनियां रफूचक्कर हो जाती हैं।   सामाजिक कार्यकर्ता पंकज दीक्षित ने बताया कि पट्टे के नाम पर ये लोग सरकार से खेत ले लेते हैं और फिर उसी में कुछ दिन खेती करके उसे मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। अगर प्रशासनिक अधिकारी नजर रखें तो उसमे अवैध कालोनी का निर्माण न हो सकेगा और आम लोगों को इनका शिकार होने से बचाया जा सकता है।  कालोनाइजर विजय कांत शर्मा ने बताया कि खादरों की जमीनों को न तो बेच सकते हैं और ना ही कालोनी बनाई जा सकती हैं। यदि ऐसा कोई करता है यह तो अवैध गतिविधि है। सरकार ये जमीन किसान को खेती करने के लिए देती है न कि उसे बेचने के लिए। यहां के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से ये कंपनियां फर्जी कालोनी काट देती हैं और दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव आदि के लोगों को बेच देते हैं। बाद में इन कंपनियों के कर्ता-धर्ता बोरिया बिस्तर बांधकर यहां से गायब हो जाते हैं। ये बाहर से आए कुछ कालोनाइजर हैं जो इस इलाके में सक्रिय हैं।  इधर, हमारे सहयोगी प्रकाशन समाचारएक्सप्रेस.कॉम से बात करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि खादरों में किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे वहां से हटाया जाएगा।  

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 मथुरा : जनपद स्थित यमुना नदी खादर में चल रही अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम को उस वक्त और बल मिला जब कई सामाजिक संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता खुलकर इसके विरोध में सामने आए।  ध्यान रहे, वृंदावन के अंतर्गत पानी गांव से छटीकरा तक अवैध कालोनी काटने का धंधा चरम पर है। महंगी कारें जैसे बड़े तोहफे देकर एजेंटों के जरिए ग्राहकों को ‘लूटने’ का क्रम जारी है। शहर के कई बड़े होटलों में ऐसी कंपनियों के दफ्तर खोले गए हैं। क्षेत्र में कम से कम 50 ऐसी कंपनियां इन गतिविधियों में लिप्त हैं। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। ‘रुपये 2.40 लाख का प्लॉट खरीदो और रुपये 2.56 लाख का बोनस वापस पाओ’ जैसे लुभावने नारों के चलते ग्राहक आसानी से इनके मकड़जाल में फंस जाते हैं। विज्ञापनों में कहीं भी यह नहीं लिखा जाता है कि इस प्लॉट का आकार क्या होगा और यह कहां होगा। नियम और शर्तों का कहीं भी उल्लेख नहीं किया जा रहा है। विज्ञापनों में यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि ये फ्लैट और प्लॉट विकास प्राधिकरण से ‘अप्रूव’ कराए गए हैं या नहीं...। कहां बन रहे हैं और कितने मंजिल के बन रहे हैं, इसकी भी कोई जानकारी विज्ञापनों में नहीं दी गई है।  राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहले ही 14 सरकारी विभागों को यमुना नदी की खादरों में चल रहे अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस भेज चुका है। अधिकरण ने 26 मई तक नोटिस का जवाब मांगा है।    'ब्रज बचाओ समिति' के संयोजक मनोज चौधरी ने कहा कि खादरों पर कालोनी काटना अवैध है। वृन्दावन और मथुरा में इन कालोनाइजर का बड़ा खेल है। भोले-भाले लोग इनके जाल में फंस जाते हैं। इनके निशाने पर वृन्दावन से बाहर के लोग होते हैं जो इस कृष्णनगरी में अपना आशियाना बसाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को यहां जमीन दिखाकर उनको ठगा जाता है और उनसे मोटी कमाई करके ये कंपनियां रफूचक्कर हो जाती हैं।   सामाजिक कार्यकर्ता पंकज दीक्षित ने बताया कि पट्टे के नाम पर ये लोग सरकार से खेत ले लेते हैं और फिर उसी में कुछ दिन खेती करके उसे मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। अगर प्रशासनिक अधिकारी नजर रखें तो उसमे अवैध कालोनी का निर्माण न हो सकेगा और आम लोगों को इनका शिकार होने से बचाया जा सकता है।  कालोनाइजर विजय कांत शर्मा ने बताया कि खादरों की जमीनों को न तो बेच सकते हैं और ना ही कालोनी बनाई जा सकती हैं। यदि ऐसा कोई करता है यह तो अवैध गतिविधि है। सरकार ये जमीन किसान को खेती करने के लिए देती है न कि उसे बेचने के लिए। यहां के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से ये कंपनियां फर्जी कालोनी काट देती हैं और दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव आदि के लोगों को बेच देते हैं। बाद में इन कंपनियों के कर्ता-धर्ता बोरिया बिस्तर बांधकर यहां से गायब हो जाते हैं। ये बाहर से आए कुछ कालोनाइजर हैं जो इस इलाके में सक्रिय हैं।  समाचारएक्सप्रेस.कॉम से बात करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि खादरों में किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे वहां से हटाया जाएगा।  

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 मथुरा : जनपद स्थित यमुना नदी खादर में चल रही अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम को उस वक्त और बल मिला जब कई सामाजिक संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता खुलकर इसके विरोध में सामने आए।  ध्यान रहे, वृंदावन के अंतर्गत पानी गांव से छटीकरा तक अवैध कालोनी काटने का धंधा चरम पर है। महंगी कारें जैसे बड़े तोहफे देकर एजेंटों के जरिए ग्राहकों को ‘लूटने’ का क्रम जारी है। शहर के कई बड़े होटलों में ऐसी कंपनियों के दफ्तर खोले गए हैं। क्षेत्र में कम से कम 50 ऐसी कंपनियां इन गतिविधियों में लिप्त हैं। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। ‘रुपये 2.40 लाख का प्लॉट खरीदो और रुपये 2.56 लाख का बोनस वापस पाओ’ जैसे लुभावने नारों के चलते ग्राहक आसानी से इनके मकड़जाल में फंस जाते हैं। विज्ञापनों में कहीं भी यह नहीं लिखा जाता है कि इस प्लॉट का आकार क्या होगा और यह कहां होगा। नियम और शर्तों का कहीं भी उल्लेख नहीं किया जा रहा है। विज्ञापनों में यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि ये फ्लैट और प्लॉट विकास प्राधिकरण से ‘अप्रूव’ कराए गए हैं या नहीं...। कहां बन रहे हैं और कितने मंजिल के बन रहे हैं, इसकी भी कोई जानकारी विज्ञापनों में नहीं दी गई है।  राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहले ही 14 सरकारी विभागों को यमुना नदी की खादरों में चल रहे अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस भेज चुका है। अधिकरण ने 26 मई तक नोटिस का जवाब मांगा है।    'ब्रज बचाओ समिति' के संयोजक मनोज चौधरी ने कहा कि खादरों पर कालोनी काटना अवैध है। वृन्दावन और मथुरा में इन कालोनाइजर का बड़ा खेल है। भोले-भाले लोग इनके जाल में फंस जाते हैं। इनके निशाने पर वृन्दावन से बाहर के लोग होते हैं जो इस कृष्णनगरी में अपना आशियाना बसाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को यहां जमीन दिखाकर उनको ठगा जाता है और उनसे मोटी कमाई करके ये कंपनियां रफूचक्कर हो जाती हैं।   सामाजिक कार्यकर्ता पंकज दीक्षित ने बताया कि पट्टे के नाम पर ये लोग सरकार से खेत ले लेते हैं और फिर उसी में कुछ दिन खेती करके उसे मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। अगर प्रशासनिक अधिकारी नजर रखें तो उसमे अवैध कालोनी का निर्माण न हो सकेगा और आम लोगों को इनका शिकार होने से बचाया जा सकता है।  कालोनाइजर विजय कांत शर्मा ने बताया कि खादरों की जमीनों को न तो बेच सकते हैं और ना ही कालोनी बनाई जा सकती हैं। यदि ऐसा कोई करता है यह तो अवैध गतिविधि है। सरकार ये जमीन किसान को खेती करने के लिए देती है न कि उसे बेचने के लिए। यहां के क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से ये कंपनियां फर्जी कालोनी काट देती हैं और दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव आदि के लोगों को बेच देते हैं। बाद में इन कंपनियों के कर्ता-धर्ता बोरिया बिस्तर बांधकर यहां से गायब हो जाते हैं। ये बाहर से आए कुछ कालोनाइजर हैं जो इस इलाके में सक्रिय हैं।  समाचारएक्सप्रेस.कॉम से बात करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि खादरों में किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे वहां से हटाया जाएगा।  

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मथुरा। अमर नाथ शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित ग्रोइंग सोल किड्ज गुरूकुल में मदर्स-डे का कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । परजाजननी भगवती श्रीमां को समर्पित इस समारोह में, जीवन में ‘‘मां’’ के महत्व पर आधरित बच्चों की प्रस्तुतियों ने हर किसी को भाव-विभोर कर दिया । बच्चों की माताओं ने भी विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं अमर नाथ शिक्षण संस्थान की वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्षा ने कहा कि मां केवल जननी ही नहीं है बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाली सच्ची पथ-प्रदर्शक है । मां की महत्ता शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है । उसे सिपर्फ महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन रूपी बगिया को बिना मां के सजाया-संवारा नहीं जा सकता है। उन्होंने मुन्नवर राणा की कविता के अंश ‘‘अभी जिन्दा है मां मेरी, मुझे कुछ नहीं होगा। मैं घर से जब निकलता हूँ, दुआ भी साथ चलती है।’’ को जब सुनाया तो विद्यालय का वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विद्यालय की निदेशिका सोनिका शर्मा द्वारा संचालित मदर-डे के कार्यक्रम में सबसे अध्कि आकर्षण के केन्द्र पाकिस्तान के एक स्कूल में आतंकी हमले में मारे गये बच्चों व हाल मंे आये भूकंप में हुई जनहानि को समर्पित कार्यक्रमों की रही । बच्चों ने भी अपनी मां को प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी बाल भावनाओं का अहसास कराया। सभी अभिभावकों ने विद्यालय में आयोजित मदर-डे के कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुये कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से बच्चों मे अच्छे संस्कार आयेंगे तथा वे बड़ों का भी सम्मान करेेंगे। कृष्णा पुरम् बिरला मंदिर पर स्थित ग्रोइंग सोल किड्ज गुरूकुल में इस अवसर पर माताओं के बीच विभिन्न प्रकार की बौद्विक प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं, जिनमें बच्चों की माताओं ने बड़ी रूचि एवं उत्साह के साथ भाग लिया।  प्रतियोगिता में ‘‘बेस्ट मदर आपॅफ द डे’’ का खिताब कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती मिथलेश वाजपेयी ने श्रीमती रूचि अग्रवाल को प्रदान किया। निर्णायक मण्डल में डा. रजनी सक्सेना, डा. मध्ुबाला शर्मा एवं संगीता सारस्वत थीं। कार्यक्रम की तैयारियों में ग्रोइंग सोल किड्ज गुरूकुल की शिक्षिका निशा इषरानी, स्वीटी, अल्पना, अमृता, प्रियंका, राध्किा सहित सभी शिक्षिकाओं का योगदान सराहनीय रहा।

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