नई दिल्ली : विश्व की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त करने के पश्चात भारत को अब ज्ञान के एक उपभोक्ता के स्थान पर ज्ञान प्रदाता के रूप में परिवर्तित होने की आवश्यकता है।
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नई दिल्ली : विश्व की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त करने के पश्चात भारत को अब ज्ञान के एक उपभोक्ता के स्थान पर ज्ञान प्रदाता के रूप में परिवर्तित होने की आवश्यकता है।
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नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री रुण जेटली द्वारा संसद के पटल पर रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में क्रमश: 2.1 प्रतिशत, 4.4 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत दर की वृद्धि होने की उम्मीद है।
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कल्पना कीजिए बजट पेश किया जा चुका है, अगली सुबह आप क्या करेंगे। जाहिर तौर पर आप अगले साल के बजट की प्रमुखबातों पर एक सरसरी नज़र दौड़ाएंगे।
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खाद्य एवं कृषि संगठन का एक आकलन है कि भूख, गरीबी और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले मौसमी बदलाव की वजह से लगभग 763 मिलियन लोग अपने ही देश में किसानी छोड़कर बेहतर आजीविका अवसरों की तलाश में प्रवास कर जाते है। भारत की लगभग एक तिहाई आबादी यानी 300 मिलियन से अधिक लोग ऐसे ही प्रवासी हैं।
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आजादी के समय 1947 में, भारत में महज 29 करोड़ रुपये के निवेश के साथ केवल पांच केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम थे। इसके अलावा, ब्रिटिश हुक्मरानों को सेवाएं प्रदान करने के लिए संभवत: भारत के पास रेलवे और विस्तृत डाक एवं तार विभाग का काफी हद तक पर्याप्त नेटवर्क था, जो पूरे देश को कवर करता था।
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अचल संपत्ति से संबंधित कानून ‘रेरा’ को अधिसूचित करने के लिए राज्यों को दी गई तीन महीने की मोहलत जुलाई में खत्म होने के साथ ही देश में रीअल एस्टेट और आवास क्षेत्र में बदलाव का रास्ता साफ हो गया। यह मोहलत ऐसी परियोजनाओं की वजह से दी गई थी जिनका निर्माण कार्य चल रहा है और अब मोहलत की अवधि बीत जाने पर अचल संपत्ति और आवास क्षेत्र के परिपक्व, पेशेवर, संगठित और पारदर्शी तरीके से काम करने वाले क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आने की संभावना है जिससे सभी सम्बद्ध पक्षों को फायदा होगा।
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