कृषि / व्यापार / बचत

पिछले कुछ वर्षों में विश्‍व व्‍यापार की विकास दर के कमजोर रहने से विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था में लगातार कमजोरी दिखाई दे रही है, जैसा कि विश्‍व व्‍यापार संगठन ने भी अप्रैल 2017 के अपने अध्‍ययन में पाया है। मगर, विदेश व्‍यापार के मामले में भारत का कार्य निष्‍पादन, तिजारती माल और सेवा दोनों ही क्षेत्रों में लगातार सकारात्‍मक रुझान प्रदर्शित कर रहा है।

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पहली मई से देशभर में रेरा यानी रियल इस्टेट रेग्युलेशन बिल लागू है। इसे आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने निजी बिल्डर्स और डेवलपर्स पर लगाम कसने के लिए तैयार किया गया है। संसद के समक्ष इसे चार साल पहले लाया गया था। इस विधेयक के आधार पर राज्यों को कानून बनाने का जिम्मा दिया गया।

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अठारहवीं शताब्दी में विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में (जीडीपी) 23 प्रतिशत का योगदान करने वाला भारत ब्रिटिश औपनिवेश के लगभग दो सदियों के शासन में अत्यंत गरीबी की स्थिति में रहा लेकिन 1947 में आजाद होने के बाद से लंबी छलांग लगाते हुए भारत आज प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्था और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र हो गया है। आजादी के 70 साल बाद भारत अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर सकता है। (Read in English: Is Indian Stage Set For Faster Economic Development…?)

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विगत 70 वर्षों के दौरान भारत द्वारा आर्थिक क्षेत्र में की गई प्रगति को भी सर्वाधिक दिलचस्‍प सफल गाथाओं में शुमार किया जाता है। इस दौरान भारत के नीति निर्माताओं को अनगिनत चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जहां एक ओर देश में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का अभाव रहा, वहीं दूसरी ओर आर्थिक विकास के लिए आवश्‍यक मानी जाने वाली लगभग प्रत्‍येक चीज की भी सख्‍त कमी महसूस की जाती रही। इससे साफ जाहिर है कि आर्थिक आजादी की दिशा में भारत की लम्‍बी यात्रा अनगिनत चुनौतियों से भरी हुई थी। हालांकि, हमारे संस्‍थापकों ने दृढ़ संकल्‍प दर्शाते हुए इन चुनौतियों का सामना किया और एक-एक ईंट को मजबूती से जोड़कर राष्‍ट्र का निर्माण किया। पंचवर्षीय योजना की अवधारणा सही दिशा में एक बड़ी अच्‍छी शुरुआत थी, जिसके तहत किसानों की मुश्किलों एवं गरीबी के उन्‍मूलन पर विशेष जोर दिया गया। Read in English: India Emerged As Super Economic Power In Last 70 Years

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भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के इतिहास में पिछले 70 वर्ष में अनेक महत्‍वपूर्ण घटनाएं हुईं। इनमें संकट के वर्ष 1966, 1981 तथा 1991 और भारत का आर्थिक संकट से विश्‍व के सबसे तेजी से बढ़ी अर्थव्‍यवथा के रूप में उभरना शामिल है। (Read in English: Critical Milestones During 70 Years Journey Of Indian Economy)

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भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना वर्ष 1935 में देश के केंद्रीय बैंक के रूप में हुई थी। प्रथम गोलमेज सम्मेलन की उप-समिति ने साफ-साफ शब्‍दों में कहा था कि सुदृढ़ नींव और किसी भी राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त एक रिजर्व बैंक की स्‍थापना करने की नितांत आवश्‍यकता है, जिसके लिए हमें कोई भी कसर नहीं छोड़नी चाहिए। उप-समिति ने इसके साथ ही यह भी कहा था कि रिजर्व बैंक को मुद्रा के साथ-साथ मुद्रा विनिमय के प्रबंधन की अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी सौंपी जाएगी।

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