बीते दिन पेश हुए बजट में सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र विकास के लिए अपनी थैली खोली है। यह कहा जा सकता है कि संभवत: पहली बार किसी बजट में गांवों को केंद्र में रखा गया है। यहां तक कि इसके लिए इस बार मध्यम वर्ग को भी एक तरह से दरकिनार कर दिया गया है। अब तक यह माना जाता था कि मध्यम वर्ग को खुश रखकर ही वोट हासिल किए जा सकते हैं। इसे ध्यान में रखें तो अगले वर्ष चुनावों का सामना करने जा रही मोदी सरकार का यह बड़ा और नई तरह का दांव माना जा सकता है। लेकिन, सवाल यह है कि ग्राम्य विकास के इन प्रावधानों को सरकार कितना पूरा कर पाएगी...?
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