साहित्य / मीडिया

महाकवि निराला का जीवन निष्कपट था। जैसा वह कहते थे, वही उनका आचरण था, बाहर-भीतर एक समान। उनके जीवन के ऐसे अनेक प्रसंग हैं जब उन्होंने दीन-दुखियों के आगे अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

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नई दिल्ली : मीडिया की दुनिया के सूरतेहाल को वेब जर्नलिज्म के जरिए व्यापकता देने और राष्ट्रीय पटल पर लाने के अभूतपूर्व योगदान के लिए युवा पत्रकार और मीडिया विश्लेषक अभिषेक मेहरोत्रा को सम्मानित किया गया है।

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"क्या हुआ इतना परेशान क्यों हो...?"

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दोनों एक झोंक में एकदूजे के पास आ गए और अचानक से उसके कांपते होंठों को उसके कोमल होंठो ने थाम लिया। उसकी आंखें बुझती चली गईं और अंदर मीठी सी तरंग दौड़ गई। अचानक से, उसने एक उत्सुकता में अपनी आंखें हल्के से खोलीं तो देखा क़ि दो आंखें उसे भी उस तरंगित दौर में बड़े प्यार से निहार रही थीं।

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भूगोल में, पहाड़ों से निकली नदी के समुद्र में मिलने तक की प्रक्रिया को, तीन अवस्थाओं में बांटा गया है। मुझे प्रेम की संपूर्णता में भी इन अवस्थाओं से साम्य नजर आया है हमेशा...

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फरीदाबाद : लाल बहादुर शास्त्री, लाला लाजपतराय व पं. रामप्रसाद बिस्मिल की स्मृति में सैक्टर 19 स्थित आर्य समाज में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

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फरीदाबाद : स्थानीय सेक्टर 29 के सनातन धर्म मंदिर में संस्कार भारती द्वारा आयोजित मासिक कार्यक्रम के तहत "काव्य कल्लोल" गोष्ठी का आयोजन किया गया।

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14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1949 में इसी तारीख को संविधान सभा ने एक लंबी और सजीव बहस के बाद देवनागरी लिपि में हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था। भारतीय संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 से 351 तक इसी विषय के बारे में है। अनुच्‍छेद 343 (1) में यह घोषणा की गई है कि देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा होगी। लेकिन, अनुच्छेद 343 (2) और उसके बाद के अनुच्‍छेदों को पढ़ने से पता चलता है कि भारत जैसे बहुभाषी राष्ट्र में राजभाषा के मुद्दे को बहुत कठिन और जटिल रास्‍ते से होकर गुजरना है क्‍योंकि देश के सरकारी संस्‍थानों में अंग्रेजी में निर्धारित कानूनों, नियमों और विनियमों का ही वर्चस्व है।

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भारत दुनिया के उन अनूठे देशों में से एक है जहां भाषाओं में विविधता की विरासत है। भारत के संविधान ने 22 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता दी है। बहुभाषावाद भारत में जीवन का मार्ग है क्‍योंकि देश के विभिन्न भागों में लोग अपने जन्म से ही एक से अधिक भाषा बोलते हैं और अपने जीवनकाल के दौरान अतिरिक्त भाषाओं को सीखते हैं। (Read in English)

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नई दिल्ली : मुंशी प्रेमचंद के 'हंस' के पुनर्संस्थापक राजेन्द्र यादव की जयंती पर चौथे 'राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान 2016' का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी सभागार में किया गया। इस बार का यह प्रतिष्ठित सम्मान-पुरस्कार प्रतिभाशाली युवा पत्रकार-कथाकार योगिता यादव और पंकज सुबीर को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। दोनों रचनाकारों को सम्मानस्वरूप 11-11 हजार रुपये की राशि और शॉल प्रदान किया गया। यह सम्मान ‘हंस’ में प्रकाशित किसी कहानी पर प्रदान किया जाता है।

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