साहित्य / मीडिया

आपका चरित्र लोगों को बताता है कि आप क्या है। आपका चरित्र ही आपका व्यक्तित्व बताता है। आपको कई बार ऐसे लोग मिले होंगे जो अपने बारे में हांकते तो ज्यादा हैं पर वास्तविकता कुछ और होती है। आपने वह कहावत भी जरूर सुनी होगी कि कुछ देर के लिए तो आप किसी को बेवकूफ बना सकते हैं, पर ज्यादा समय तक आप कोई भी सच्चाई छिपा नहीं सकते।

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नई दिल्ली : उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के दौर में आज हर आदमी स्कैनर के अंदर है। आप अपने लैपटॉप पर गूगल में अपना घर देख सकते हैं। इसने हमारी जिंदगी को और ज्यादा उलझा दिया है और हम इस बड़े बाजार में खो-से गए हैं।

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मैं एक मरती हुई भाषा बोलती हूं (थी!)। मार दी गई भाषा! तुमने कहा था कि तुम कोई भाषा जानते हो जो हमें हमारे गंवारूपन और उज्जड़ता से उबार ले जाएगी। और हम तो तमाम दूरियां लांघ आए जहां तक हमें विकास की दौड़ में पीछे धकेलती हमारी भाषा सुनी या बोली जा सकती थी।

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मुट्ठीभर आसमान और सीमाबद्ध धरती का अक्स समेटे भारतीय स्त्री ने आंगन की भीतियों को लाल गेरू से पोतकर उसपर बड़ा-सा ’स’ लिख दिया।

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  आर्मी कोर्ट रूम में आज एक केस अनोखा अड़ा था! छाती तान अफसरों के आगे फौजी बलवान खड़ा था!! बिन हुक्म बलवान तूने ये कदम कैसे उठा लिया? किससे पूछ उस रात तू दुश्मन की सीमा में जा लिया??

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एक युवा संन्यासी था। उस पर एक राजकुमारी मोहित हो गई। राजा को पता चला तो उसने संन्यासी से राजकुमारी के साथविवाह करने को कहा। संन्यासी बोला, 'मैं तो हूं ही नहीं।  

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बगदाद में मारुक नाम के एक साधु पुरुष रहते थे। एक बार एक भाई उनके साथ उनकी झोंपड़ी में मेहमान के नाते ठहरे, नमाज का वक्त होने पर वे भाई उठे और एक कोने में जाकर नमाज पढ़ने लगे।  

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मनुष्य का जीवन नश्वर है। सम्भवत: देव-दानवों का जीवन भी नश्वर रहा होगा, इसीलिए उन लोगों ने सागर का मंथन करके अमृत प्राप्त कर अमर हो जाने का संकल्प किया।    

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रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा है, 'तुम्हारे जीवन में जैसे-जैसे दूसरों को स्थान मिलेगा, वैसे-वैसे तुम्हारा अपना व्यक्तित्व होगा।' पुराने समय के खगोलशास्त्री मानते थे कि विश्व का मध्यबिंदु पृथ्वी ही है।

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मनुष्य के आंतरिक शत्रु अरिषड् वर्ग हैं, किंतु बाह्य शत्रु सप्त व्यसन हैं- नारी मोह, धूर्तक्रीड़ा, सुरापान, आखेट, परनिंदा, अधिकार का दर्प और अपव्यय। समाज को स्वस्थ, सुखी, संपन्न, सुदृढ़ तथा सुचरित्र बनाने के लिए मनीषियों एवं आचार्यो ने मानव के लिए एक नैतिक आचार-संहिता का विधान किया है।  

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