बात तब की है जब इंदिरा गांधी बहुत छोटी बच्ची थीं। उन दिनों देश में विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार की लहर थी। जगह-जगह विदेशी वस्त्रों की होली जलाई जा रही थी। घऱ में बड़ों की देखा-देखी उस छोटी सी बच्ची ने भी विदेशी वस्त्र पहनना छोड़ दिया।
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बात तब की है जब इंदिरा गांधी बहुत छोटी बच्ची थीं। उन दिनों देश में विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार की लहर थी। जगह-जगह विदेशी वस्त्रों की होली जलाई जा रही थी। घऱ में बड़ों की देखा-देखी उस छोटी सी बच्ची ने भी विदेशी वस्त्र पहनना छोड़ दिया।
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एक बार राज्यसभा में एक उद्योगपति सदस्य ने शिकायत के लहजे में कहा कि नेहरू स्मारक कोष में जमा किए जा रहे धन के बारे में कई शिकायतें सुनने में आ रही हैं। उन्होंने इसे एक घोटाला करार देते हुए जोरदार शब्दों में इसकी निंदा की और जांच के लिए अपील की।
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बात उन दिनों की है जब लालबहादुर शास्त्री ने इलाहाबाद के सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया ही था और जन सेवा का काम बड़ी रुचि के साथ करने लगे थे। वह एक कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवक थे। अखबारी प्रचार-प्रसार में उनका ज्यादा विश्वास नहीं था।
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राज्यसभा के इतिहास में प्रश्नोत्तर काल के दौरान सबसे पहला सवाल तत्कालीन सदस्य सीता परमानंद ने पूछा था। इसके बाद, दूसरा सवाल सावित्री देवी और तीसरा सवाल एक अन्य राज्यसभा सदस्य पार्वती देवी ने पूछा। उस समय राज्यसभा का संचालन पहले अध्यक्ष सर्वपल्ली राधाकृष्णन कर रहे थे। ऐसा संयोग देखकर उन्हें एक मजाक सूझा।
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बात तब की है जब काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना महामना पंडित मदनमोहन मालवीय द्वारा की जा चुकी थी। इस संस्थान से उन्हें बहुत लगाव था।
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बात उन दिनों की है जब पंडित जवाहर लाल नेहरू तत्कालीन इलाहाबाद नगर महापालिका के अध्यक्ष थे।
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