विविधा

हिंदी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन का आयोजन दिल्ली में हो रहा था। इसके चलते काफी साहित्यिक लोगों का वहां जमावड़ा लगा हुआ था। उसी आयोजन में अध्यक्ष महोदय का जुलूस निकलना था लेकिन अध्यक्ष यानी राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का कोई अता-पता नहीं था।

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स्वामी विवेकानंद के अमेरिका प्रवास के दौरान एक दिन वह बगीचे में टहल रहे थे। तभी एक स्थानीय महिला की नजर उन पर पड़ी। उसने स्वामी जी को गौर से देखा और फिर तंज कसते हुए बोली कि यदि आप अन्यथा न लें तो आप से एक सवाल पूछूं?

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आचार्य विनोबा भावे स्थायी रूप से पवनार आश्रम में रहते थे। हरिजन सेवा और ग्राम स्वच्छता कार्यक्रम के सिलसिले में वह आश्रम से करीब तीन मील दूर स्थित सुरगांव नाम के एक गांव में बहुत दिनों तक आते-जाते रहे। इस दौरान उनका फावड़ा हमेशा उनके साथ ही रहता था।

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महान दार्शनिक सुकरात अपने व्यक्तिगत जीवन में बेहद कोमल स्वभाव के व्यक्ति थे। इसके ठीक विपरीत उनकी पत्नी अत्यंत ही कर्कशा थीं।

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एक बार स्वामी विवेकानंद बनारस की गलियों से गुजर रहे थे। तभी, एक बंदर उनके पीछे दौड़ पड़ा और घुड़कने लगा।

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गहनों का रखरखाव हमेशा से एक समस्या रहा है। यहां हम आपको सात ऐसी बातें बता रहे हैं जिनकी मदद से आप अपने गहनों को हमेशा साफ और चमकदार रख सकते हैं।

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