एक बार डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देखा कि उनकी किसी किताब के कई पन्ने फटे हुए हैं। उन्हें यह बात समझते देर नहीं लगी कि जरूर यह बच्चों का ही काम है।
Read More
एक बार डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देखा कि उनकी किसी किताब के कई पन्ने फटे हुए हैं। उन्हें यह बात समझते देर नहीं लगी कि जरूर यह बच्चों का ही काम है।
Read More
बात उन दिनों की है जब महामना मदन मोहन मालवीय काशी हिंदू विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य के लिए दान एकत्र करने के काम में लगे हुए थे। इसी सिलसिले में वह हैदराबाद के तत्कालीन निजाम के पास भी गए। लेकिन, निजाम ने किसी भी तरह की मदद करने से इनकार कर दिया।
Read More
एक बार पंडित मोती लाल नेहरू को तेज जुकाम हो गया। स्वदेशी आंदोलन का दौर था और उस समय महात्मा गांधी के आह्वान पर सभी लोग खादी के प्रयोग को प्राथमिकता दे रहे थे। इसके चलते मोती लाल नेहरू भी खादी का रुमाल प्रयोग में ला रहे थे। खादी का रुमाल चूंकि खुरदरा होता है तो इस वजह से उनकी नाक लाल हो गई थी।
Read More
बात उन दिनों की है जब ब्रिटिश हुकूमत ने वीर सावरकर को काला पानी की सजा देकर अंडमान जेल में भेज दिया था। उन्हें 40 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। और, इसके लिए उनके गले में एक पट्टा डाला गया था जिस पर ‘40 साल का कारावास’ लिखा था।
Read More
सुभाष चंद्र बोस के जीवन का एक ही लक्ष्य था, देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराना। इसी उद्देश्य को लेकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान महात्मा गांधी और उनके बीच हुई एक बातचीत हमारे गौरवशाली इतिहास की धरोहर है।
Read More
महात्मा गांधी द्वारा सत्य के अनुसरण की तमाम मिसालें दी जाती हैं। हमेशा सत्य का पालन करने की एक ऐसी ही घटना तब घटी जब वह नौवीं कक्षा में पढ़ते थे।
Read More