(फोटो : पीजीसीएन की विशिष्ट धारिता और ऊर्जा घनत्व की तुलना वाणिज्यिक वाईपी-50एफ इलेक्ट्रोड से की गई है।)
दोहरे रूप से कार्य करने में सक्षम छिद्रपूर्ण ग्राफीन कार्बन नैनोकम्पोजिट इलेक्ट्रोड पर आधारित एक उच्च-वोल्टेज सुपरकैपेसिटर विकसित किया गया है। यह सौर पैनलों जैसे अनुप्रयोगों के लिए अधिक स्थिर सुपरकैपेसिटर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही, यह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ी हुई रेंज और तेज त्वरण प्रदान कर सकता है।
वाणिज्यिक सुपरकैपेसिटर में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक इलेक्ट्रोलाइट 2.5-3.0 वोल्ट के बीच काम कर सकते हैं और उच्च वोल्टेज पर विघटित होने लगते हैं या सुरक्षा संबंधी समस्याओं, जैसे ज्वलनशीलता, का सामना करते हैं।
Read in English: New ‘Graphene Tech’ powers faster EVs
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स के शोधकर्ताओं ने दोहरे कार्यात्मक पीजीसीएन इलेक्ट्रोड का उपयोग करते हुए अभूतपूर्व 3.4 वी का वोल्टेज हासिल किया, जिससे पारंपरिक सुपरकैपेसिटर की 3.0 वी की सीमा को पार कर ऊर्जा भंडारण में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
यह नवाचार इलेक्ट्रोलाइट अस्थिरता की समस्या का समाधान प्रदान करता है। ऊर्जा घनत्व को दोगुना करके इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक रेंज और तेज त्वरण प्रदान करता है। साथ ही, सेल स्टैकिंग को कम करके मॉड्यूल डिजाइन को सरल बनाता है।
बेहतर प्रदर्शन पीजीसीएन सामग्री की विशेष रूप से निर्मित सतह के कारण संभव हुआ है, जो जल-प्रतिरोधी होने के साथ-साथ कार्बनिक इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ अत्यधिक अनुकूल भी है। यह दोहरी कार्यक्षमता जल-प्रेरित क्षरण को रोकती है और छिद्रपूर्ण संरचना में इलेक्ट्रोलाइट के तीव्र प्रवेश को सक्षम बनाती है। इससे आयन परिवहन और विद्युत रासायनिक दक्षता में सुधार होता है। परिणामस्वरूप, सुपरकैपेसिटर 33 प्रतिशत अधिक ऊर्जा भंडारण, उच्च शक्ति उत्पादन और उत्कृष्ट दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करता है, जो इसे इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रिड-स्तरीय भंडारण और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयुक्त बनाता है।
पीजीसीएन इलेक्ट्रोड का उत्पादन 1,2-प्रोपेनेडियोल को पूर्ववर्ती पदार्थ के रूप में उपयोग करके पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोथर्मल कार्बोनाइजेशन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। एक सीलबंद पात्र में 300°सेल्सियस पर 25 घंटे तक संचालित यह प्रक्रिया कठोर रसायनों और बाहरी गैसों के उपयोग को समाप्त करती है, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करती है, 20 प्रतिशत से अधिक की उपज प्राप्त करती है, और प्रयोगशाला से लेकर औद्योगिक उत्पादन तक विस्तार योग्य है।
परिणामी पदार्थ में सूक्ष्म और मध्यम छिद्रयुक्त संरचना पाई जाती है जो तीव्र आयन परिवहन और उच्च ऊर्जा भंडारण में सहायक होती है। इससे 17,000 डब्ल्य/किग्रा तक की शक्ति घनत्व प्राप्त होती है। संश्लेषण मापदंडों के सटीक नियंत्रण के माध्यम से निरंतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाता है। व्यावसायिक कार्बन-आधारित इलेक्ट्रोड की तुलना में, पीजीसीएन इलेक्ट्रोड एक साथ परिचालन वोल्टेज और शक्ति उत्पादन को बढ़ाता है।
पीजीसीएन-आधारित सुपरकैपेसिटर पारंपरिक उपकरणों की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक ऊर्जा संग्रहित करता है और 15,000 चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी अपने प्रदर्शन का 96 प्रतिशत बरकरार रखता है, जो असाधारण स्थायित्व को दर्शाता है।
यह परियोजना उन्नत ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करके भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और आत्मनिर्भर भारत पहल का समर्थन करती है। उच्च परिचालन वोल्टेज के कारण कई निम्न-वोल्टेज सेल को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे अधिक सघन और कुशल ऊर्जा भंडारण मॉड्यूल बनाना संभव हो जाता है।






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