RBI को हक हो कि सरकार को "ना" कह सके : राजन

RBI को हक हो कि सरकार को नई दिल्ली । रिजर्व बैंक गवर्नर का पद छोडने से एक दिन पहले गवर्नर रघुराम राजन ने शनिवार को कहा कि सरकार के शीर्ष स्तर को ना कहने की रिजर्व बैंक की क्षमता को बचाए रखना चाहिए क्योंकि देश को एक मजबूत और स्वतंत्र केन्द्रीय बैंक की जरूरत है। 

 

सेंट स्टीफन कॉलज में यहां केन्द्रीय बैंक की स्वतंत्रता विषय पर भाषण देते हुए रिजर्व बैंक के निवर्तमान गवर्नर ने हालांकि, यह भी कहा कि केन्द्रीय बैंक सभी तरह की बाध्यताओं से मुक्त नहीं रह सकता क्योंकि उसे सरकार द्वारा बनाए गए एक ढांचे के तहत काम करना होता है। सरकार के साथ नीतिगत मतभेदों के संबंध में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव की टिप्पणियों को याद करते हुए राजन ने कहा कि इस मामले में वह एक कदम और आगे जाएंगे। उनका मानना है कि रिजर्व बैंक ना कहने की अपनी क्षमता को छोड नहीं सकता है, उसका बचाव होना चाहिए। 

 

राजन ने कहा, होता यह है कि हर समय कई सरकारी एजेंसियां रिजर्व बैंक की गतिविधियों पर नजर रखने पर जोर देती हैं। कई स्तरों पर जांच पडताल होती है और विशेषतौर पर ऎसी एजेंसियां यह करती हैं जिन्हें तकनीकी मामलों की समझ नहीं होती है, इससे केवल निर्णय प्रक्रिया को ही नुकसान होता है। बजाय इसके सरकार द्वारा नियुक्त रिजर्व बैंक बोर्ड को जिसमें कि पूर्व अधिकारी, सरकारी अधिकारी और सरकार द्वारा नियुक्त लोग होते हैं, उसे ही निगरानी की भूमिका निभानी चाहिए। 

 

उन्होंने कहा, वास्तव में निम्न कानूनी दर्जे वाली ताकतवर स्थिति होना काफी खतरनाक है। रिजर्व बैंक गवर्नर का वेतन कैबिनेट सचिव के बराबर होता है और उसकी नियुक्ति वित्त मंत्री के साथ सलाह मशविरा कर प्रधानमंत्री करते हैं। राजन ने कहा कि भारत के लिए वृहद आर्थिक स्थायित्व काफी महत्वपूर्ण है और इस मामले में जब भी स्थिति की जरूरत हो तो केन्द्रीय बैंक के पास संसाधन, ज्ञान और पेशेवर लोग होने चाहिए।                         

साभार-khaskhabar.com

 


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