असली स्वयंसेवक थे राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन

असली स्वयंसेवक थे राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडनहिंदी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन का आयोजन दिल्ली में हो रहा था। इसके चलते काफी साहित्यिक लोगों का वहां जमावड़ा लगा हुआ था। उसी आयोजन में अध्यक्ष महोदय का जुलूस निकलना था लेकिन अध्यक्ष यानी राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का कोई अता-पता नहीं था।

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