कई विसंगतियों के बावजूद सुनिश्चित की गई है मतदान की व्यवस्था

विश्वस के सबसे बड़े गणतंत्र में मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए क्याज कुछ आवश्यवक है? वास्तसव में यह एक बेहद कठिन काम है। 

वर्ष 2009 का आम चुनाव इस बात का सरल प्रमाण है। इस विशाल एवं जटिल गणतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर, देश के सुदूर प्रांतों में कभी बर्फीले पहाड़ों तक पहुंचकर, कभी तपती धूप में मरुभूमि के क्षेत्रों को पार करते हुए तो कभी नदी-नालों को पार करते हुए, पूरी जिम्मेचदारी के साथ जो लोग इस प्रक्रिया में शामिल हुए- उन्हीं  के योगदान के फलस्वदरूप गणतंत्र का दीप प्रज्वेलित है।

लोकसभा चुनाव-2009 पांच चरणों में पूरा हुआ था। पहले चरण का मतदान 16 अप्रैल, 2009 और पांचवें चरण का मतदान 13 मई, 2009 को हुआ। इस प्रक्रिया की विशालता इस बात से स्पलष्ट् होती है कि आम चुनाव, 2009 में 71,377 करोड़ मतदाताओं ने 8,34,944 मतदान केन्द्रोंा में 9,08,643 नियंत्रण इकाईयों तथा 11,83,543 ईवीएम के माध्य7म से अपने मत जाहिर किए। ताकि, मतदान की यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण, पारदर्शी तथा बिना किसी अड़चन के संपूर्ण हो, 4.7 मिलियन मतदान अधिकारी, 1.2 मिलियन सुरक्षाकर्मी तथा 2046 पर्यवेक्षक तैनात किए गए थे। सुरक्षाकर्मियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए 119 विशेष रेलगाड़ियों की व्य वस्था  की गई। साथ ही, 55 हेलीकॉप्टकर भी इस प्रक्रिया में शामिल किए गए। गणना के लिए 16 मई, 2009 को 1080 केन्द्रों  जहां लगभग 60,000 कर्मचारियों को तैनात किया गया था।

भारत निर्वाचन आयोग ने एक भी मतदाता को मतदान देने से वंचित नहीं किया। गुजरात के गिर वन के गुरु भारतदासजी के मतदान को सुनिश्चिभत करने के लिए वहां एक मतदान केन्द्र  खोला गया और तीन मतदान अधिकारियों को तैनात किया गया।

छत्तीरसगढ़ में घने जंगलों से घिरे, पहाड़ी क्षेत्र में स्थिखत कोरिया जिले के शेरेडन्डत गांव में दो मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने विशेष व्यघवस्थाि की थी। इन दो मतदाताओं के लिए एक मतदाता केन्द्रि की स्थाशपना की गई और चार चुनाव अधिकारियों को तीन सुरक्षाकर्मियों के साथ वहां तैनात किया गया।

अरुणाचल प्रदेश में चार ऐसे चुनाव केन्द्रम हैं जहां केवल तीन मतदाता प्रति केन्द्रद हैं। वहां पहुंचने के लिए मतदान अधिकारियों के दल को हेलीकॉप्ट र से उतरकर या निकटतम रास्तेल से तीन-चार दिनों तक पैदल जाना पड़ा। अरुणाचल प्रदेश में 690 मतदान दलों को हेलीकॉप्ट र द्वारा सुदूर गांवों तक पहुंचाया गया। इनमें से कई गांव म्यांचमार तथा चीन सीमा के पास स्थिलत हैं।

हिमाचल प्रदेश के कई भागों में प्रत्येसक वोट को शामिल करने के लिए मतदान अधिकारियों के दलों को ठंडी, बर्फीली हवाओं मे से होते हुए घंटों पैदल चलना पड़ता है। 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थिडत लाहौल-स्पीगति के जनजातीय जिले में हिक्कतम नामक जगह पर स्थिलत मतदान-केंद्र 321 मतदाताओं के लिए स्थाथपित किया गया जो कि देश का सबसे ऊंचा मतदान-केंद्र है। इस जिले के एक-तिहाई से अधिक मतदान-केंद्र 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थि त है- मतदान अधिकारियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। सुदूर पहाड़ों पर स्थिमत होने के कारण 36 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील तथा 23 केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया था। पश्चिकम बंगाल के दार्जिलिंग ज़िले में मतदान-अधिकारियों को 12 किलोमीटर तक की चढ़ाई चढ़कर श्रीखोला मतदान केंद्र तक पहुंचना पड़ा।

बाड़मेड़ निर्वाचन क्षेत्र 71,601 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ हैं। मरुभूमि के क्षेत्र में फैले होने के कारण छह चलायमान केंद्र शुरू किए गए ताकि मेनाऊ, जेसिलिया, नेहदाई, तोबा, कायमकिक, धाणी तथा रबलऊओ फकीरोवाला गांव के 2324 मतदाता अपना मतदान कर सकें। इस प्रयास से मतदाताओं को मतदान के लिए लम्बीि दूरी तक पैदल नहीं जाना पड़ा।

सुन्दनरवन के झाड़ीदार वनों में मतदान-दल नावों की सहायता से पानी के रास्तेत मतदाताओं तक अपना सामान लेकर पहुंचे। 700 किलोमीटर लम्बातई वाले अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूहों में मतदान का आयोजन एक चुनौतीभरी प्रक्रिया थी। कई जगहों पर मतदान-अधिकारियों को 35-40 घंटों तक नावों पर जाकर पहुंचना पड़ा। लक्षद्वीप के 105 मतदान केंद्रों तक केवल नावों के माध्यरम से ही पहुंचा जा सका। मिनीकॉप द्वीप पर हेलीकॉप्टकर के माध्युम से ही ईवीएम पहुँचाए गए।

असम के सोनितपुर जिले में दो बैलगाड़ियां तैनात थी क्योंाकि वहां के रास्तेव बहुत अच्छेन नहीं हैं। राज्यक के कई भागों में मतदान-सम्ब न्धीड उपकरण तथा अधिकारियों के आने जाने के लिए पालतू हाथी उपयोगी साबित हुए। बोक्का इजान ज़िले में जंगली हाथियों के उपद्रव के कारण पांच मतदान केंद्रों तक सामान पहुंचाने के लिए पोर्टर नियुक्त‍ किए गए क्यों कि वहां 40 किलोमीटर तक की दूरी पैदल ही तय करना पड़ता है।

भौगोलिक चुनौतियों के साथ-साथ 79 चुनावी क्षेत्रों में नक्सलवादियों का दबदबा था। साथ ही, देश के ऊत्तजर-पूर्वी क्षेत्रों में अलगाववादी तत्वों  ने धमकी दे रखी थी। चुनाव आयोग ने विस्तृंत योजनाए बनाई और उनका कार्यान्व यन किया। इतनी सारी चुनौतियों के बावजूद 58 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मतदान किया और साबित किया कि गणतांत्रिक भावनाएं अभी हमारे देश में मजबूत हैं।

(Samiksha Bharti News Service)


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