गिरिराज तलहटी में गूंजी राधे-राधे की गूंज

गिरिराज महाराज की परिक्रमा करते श्रद्धालु

भक्तों के सैलाब ने बनाई मानव श्रृंखला 

मथुरा/गोवर्धन। भक्ति में सरोबार गिरिराज तलहटी में विगत रोज भक्ति, श्रद्धा और अटूट आस्था का जन समुद्र उमड़ पड़ा। विगत बुधवार की सांय से ही सप्त कोसीय परिक्रमा मार्ग में मानव श्रंखला बनना चालू हो गयी थी और आज बृहस्पतिवार को देर सायं तक लाखों गिरिराज भक्तों ने कान्हा की क्रीड़ा स्थली पर दंडवत कर परिक्रमा प्रारंभ की। चारों दिशाओं से उल्लास में डूबे गिरिराज भक्तों के कदमों की आहट ने तलहटी को भक्ति के सागर में डूबने पर मजबूर कर दिया। गिरिराज महाराज के जयकारों से तलहटी गुंजायमान हो उठी। राधे राधे की धुनों पर भक्त थिरकते नजर आ रहे थे। तलहटी में बह रही भक्ति की रसधार में लाखों श्रद्धालु गोते लगाकर नंदगांव, बरसाना, वृंदावन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, गोकुल और बल्देव के मंदिरों में मस्तक झुकाने पहुंच गये। 

विगत दिन से कान्हा की बृजभूमि और उसके हृदय कहे जाने वाले गिरिराज धाम का नजारा ही बदल गया है। गुरूवार आते आते तो स्थिति और भी बदल गयी। आज सांय को हर घंटे में करीब पचास से साठ हजार श्रद्धालु चारों दिशाओं से गोवर्धन की तरफ बढ़ रहे थे। रात्रि होते ही तलहटी में चारों तरफ नरमुंड ही नरमुंड नजर आने लगे। परिक्रमा मार्ग में अनवरत मानव श्रंखला बनी रही। लाखों श्रद्धालुओं ने गिरिराज जी की शरण में पहुंचकर मस्तक टेका और बृजरज लगाकर मनोकामना पूर्ण होने की मनौती मांगी। परिक्रमा मार्ग में राधे राधे श्याम मिला दे की गूंज से मानो संपूर्ण ब्रम्हांड कान्हा की नगरी में उतर आया हो। श्रद्धालुओं की हर पीड़ा का ख्याल रख रहे बृजवासियों ने भी उनकी सेवा में पलक पांवड़े बिछा दिये। फल, चाय, दवाऐं, पानी और नाना प्रकार के भोजन कराने के लिऐ कदम कदम पर बने टेंटों पर बालक, युवा और बुजुर्ग पूरे उत्साह और जोश के साथ श्रद्धालुओं की तहेदिल से खातिरदारी करने में जुटे हुये थे। कहीं कोई नृत्य कर परिक्रमा लगाने में मग्न था तो कोई राधे राधे कहते हुये तेज कदमों से आगे बढ़ रहा था। एसएसपी, एसपी सिटी आला अधिकारियों के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर पैनी नजर रखे हुये थे। राधाकुंड कृष्णकुंड के संगम सहित कुसूम सरोवर आदि कुण्डों को चारों ओर बैरीकेटिंग कर श्रद्धालुओं के लिऐ बंद कर दिया गया। श्रद्धालु नहाने व आचमन के लिऐ भटकते नजर आये। कुंडों को पैक करने के कारण स्थानीय लोगों में रोष देखा गया। 

विगत 26 जुलाई से गोवर्धन में चल रहा मुडि़या पूनों मेला पर्व बीती रात चरम पर था। विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु गिरि-गोवर्धन धाम विभिन्न साधनों से पहुंचे। कल शाम से ही गोवर्धन में श्रद्धालुओं की संख्या शनै-शनै बढ़ने लगी थी। देर रात तक लाखों की संख्या में श्रद्धालु सात कोस की परिक्रमा कर रहे थे। गिरिराज महाराज की जय के नारों से गोवर्धन धाम गूंज गया। पूरे कस्बे में तिल धरने को जगह नजर नहीं आयी। रंग बिरंगे परिधानों में सजे श्रद्धालु अपार श्रद्धा और भक्ति के साथ गिरिराज धाम की परिक्रमा कर रहे थे। पुलिस और प्रशासन द्वारा कई दिनों से गोवर्धन में डेरा जमाने के कारण व्यवस्थाएं काफी कुछ ठीक नजर आयीं। पुलिस की चुस्ती से श्रद्धालुओं को भीड़ और जमावड़े का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि कई स्थानों पर अव्यवस्थाएं भी देखने को मिली लेकिन कुला मिलाकर व्यवस्थाओं पर लोगों ने संतोष ही व्यक्त किया। 

गुरू पूर्णिमा का पर्व गोवर्धन में मुडि़या पूनों के नाम से विख्यात है। इस मेले को लेकर कई दिनों से श्रद्धालुओं का गोवर्धन पहुंचना चालू रहता है। बीती रात और आज सुबह भी परिक्रमा का क्रम जारी देखा गया। मुडि़या पूनों को लेकर गोवर्धन के बाजार और परिक्रमा मार्ग में भी काफी रौनक नजर आयी। रोशनी के पर्याप्त साधन थे तो लोगों की सुरक्षा के भी पूरे इंतजाम किए गए थे। आज शुक्रवार देर शाम को मुडि़या शोभायात्रा के साथ ही मेला थमने लगेगा। पूर्णिमा पूरी होने के कारण आज रात्रि में भी मेले में भीड़ रहने की संभावना है। कल सुबह की विदाई के बाद से गोवर्धन धाम खाली खाली नजर आएगा।


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