
किसी जमाने में दूर-दूर तक सुविख्यात रहे मथुरा के अखाड़े आज वीरान पड़े हैं। एक वक्त था जब डेढ़ सौ से ज्यादा छोटे-बड़े अखाड़ों में मल्ल-शिक्षा सिखाई जाती थी। आज कई अखाड़े स्थानीय प्रभावशाली लोगों की निजी जागीर बन गए हैं और बाकी बचे – खुचे अखाड़ों को अंगुलियों पर आसानी से गिना जा सकता है।






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