स्वतंत्रता संग्राम में बुलंद नारों की बुलंद दास्तां

नारों की शक्ल अख्तियार किए कुछ शब्दों ने जनांदोलन में ऐसी जान फूंकी कि ब्रिटिश हुक्मरानों के इरादे शिथिल पड़ गए। नारों की एक-एक गूंज ने ब्रिटिश सत्ता पर आघात किया जिसका परिणाम आखिरकार अंग्रेजी शासन के खात्मे के रूप में सामने आया।जरूरी नहीं कि भावों को व्यक्त करने के लिए हमेशा शब्दों का ही इस्तेमाल किया जाए लेकिन जब बात तीव्र और सशक्त अभिव्यक्ति की हो तो शब्द अनिवार्य बन जाते हैं। शब्द, भावों की शक्ति और जज्बातों की जुबां है। ऐसी जुबां जो कभी-कभी मात्र अभिव्यक्ति का साधन न रहकर ललकार में बदल जाती है जिसकी हुंकार भर से क्रोध, आक्रोश, असंतोष, घृणा, निराशा से व्याप्त भावनाओं का सैलाब कुछ यूं उमड़ता है कि सत्ता की नींव तक हिल जाती है। 


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