धर्म, कला और संस्कृति

दुनिया में ब्रज की होली का डंका बज रहा है। सरकार लगातार होली को प्रचारित प्रसारित कर रही है। होली की व्यवस्थाओं को व्यापक बनाया जा रहा है। होली पर ब्रज में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इसका दूसरा पहलू यह है कि ब्रजवासी लगातार होली से दूर हो रहे हैं।

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सांवरिया सेठ मन्दिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। किंवदंती यह है कि वर्ष 1840 में, भोलाराम गुर्जर नाम के एक दूधवाले ने बागुंड गांव के छापर में तीन दिव्य मूर्तियों के भूमिगत होने का सपना देखा था। उस स्थान को खोदने पर वहां भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियां मिलीं, जैसा कि सपने में देखा गया था...

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भारत में नृत्य महज मनोरंजन का साधन नहीं रहा है, बल्कि यह आत्मा की ज़बान भी रहा है। मंदिरों की देहरी से लेकर राजदरबारों तक, गांव की चौपाल से लेकर बड़े रंगमंच तक, नृत्य ने भाव, राग और रस की परंपरा को ज़िंदा रखा है...

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तीन दशक पहले मुरैना के 85 वर्षीय सीताराम एक ऐसी यात्रा पर निकले थे, जो आज की पीढ़ी के लिए लगभग कहानी बन चुकी है। नंगे पांव बद्रीनाथ तक पैदल। न कोई टाइम-टेबल, न ऑनलाइन बुकिंग, न वीआईपी पास। हिमालय की पथरीली पगडंडियां, होंठों पर भजन, और तारों से ढकी रातों में साथ चलते अनजान लोग, यही उनकी दौलत थी। रास्ते में सब मिलकर सादी रोटियां खाते, एक सुर में “ॐ जय बद्रीनाथ-हरि” गाते। थकान होती थी, पर मन हल्का रहता था। लौटकर उन्होंने गोवर्धन की 21 किलोमीटर की परिक्रमा की। हर कदम भक्ति था। हर ठहराव एक कथा। बुज़ुर्गों से कृष्ण की लीलाएं सुनते और भीतर कुछ बदलता हुआ महसूस करते...

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रोशनी का पर्व दीपावली अब यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हो गया है। इसकी औपचारिक घोषणा 8–13 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित लाल किले में आयोजित 20वें यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति सत्र में कर दी गई...

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मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर, क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित काल भैरव मंदिर एक ऐसी रहस्यमयी जगह है, जहां धार्मिक, तांत्रिक और ऐतिहासिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। लगभग छह हजार साल पुराना यह मंदिर प्रभावशाली वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है...

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