बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

क्या होगा जब किसी पार्क में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार हो और इंसाफ की मांग का शोर चंद मिनटों में तुकबंदी के मुकाबले में बदल जाए? जरूर, पुलिस से जवाब मांगे जाने चाहिए, अफसरों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और बेटियों की हिफाजत सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन, दिल्ली में एक गंभीर वारदात के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे नारे छा गए, मानो इंसाफ की लड़ाई नहीं, कोई हास्य कवि सम्मेलन चल रहा हो!

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कांग्रेस की राजनीति आज जंगल में भटकते कारवां जैसी लगती है। रास्ता भी धुंधला। रहबर भी असमंजस में। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी बार-बार ऐसी राजनीतिक ‘कौवा-भोज’ करती दिखती है, जहां हर अधूरा बयान, हर जल्दबाजी और हर कमजोर रणनीति उसकी साख को थोड़ा और खोखला कर देती है।

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साल 2014 में दो करोड़ नौकरियां हर साल देने का वादा कहां गया? क्या हमारी नदियां सचमुच साफ हो गईं? क्या शहर स्मार्ट हो गए या सिर्फ स्मार्ट बोर्ड लग गए? भ्रष्टाचार कम हुआ या हमने उसके साथ जीना सीख लिया? और बारह साल बाद आखिर वादे और डिलीवरी के बीच कितनी दूरी तय हुई? ये किसी विश्वविद्यालय के शोध के सवाल नहीं हैं। ये वे सवाल हैं जो लोग चाय की दुकानों पर, घरों में, दफ्तरों में और रेलवे प्लेटफॉर्म पर पूछते हैं...

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गत मई में जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे दौरे पर गए, तो एक नॉर्वेजियन पत्रकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद उनसे सवाल उछाल दिया। सवाल था कि भारत प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे से बहुत नीचे क्यों है...

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तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय ने हाल ही में अपने निजी ज्योतिषी को मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी नियुक्त कर दिया। खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। कहा गया कि इसी ज्योतिषी ने वर्षों पहले ‘भविष्यवाणी’ की थी कि विजय एक दिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचेंगे। कुछ ही घंटों में राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। सहयोगी दलों ने सवाल उठाए। तर्कवाद, वैज्ञानिक सोच और संविधान की दुहाई दी जाने लगी। आखिरकार सरकार को कदम पीछे खींचना पड़ा...

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21 मई 1993 को आगरा की पानी की टोंटियों से मौत बह निकली थी। घटिया, खटीक पाड़ा और मंडी सईद खान की तंग गलियों में लोगों ने रोज़ की तरह वाटर वर्क्स का पानी पिया। कुछ ही घंटों में घरों में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों को उल्टियां और तेज़ बुखार होने लगा। पूरे परिवार अस्पतालों की तरफ भागे। 200 से ज़्यादा लोग बुरी तरह बीमार पड़े। दूषित पानी पीने से 21 लोगों की जान चली गई...

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