बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

भारत समेत कई देशों में ट्रेड यूनियनों की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में वर्तमान में 16,000 से अधिक पंजीकृत ट्रेड यूनियनें हैं, जिनमें से केवल 12 राष्ट्रीय स्तर की यूनियनें हैं। यह संख्या पिछले एक दशक में 20 फीसदी कम हुई है, जबकि देश का कार्यबल 50 करोड़ से अधिक हो चुका है।  

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आगरा की सड़कों और फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण ने शहर के बुनियादी ढांचे को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सदर बजार से लेकर बेलनगंज, हॉस्पिटल रोड और पालीवाल पार्क तक, सड़क विक्रेताओं और फेरीवालों ने फुटपाथों पर कब्जा कर लिया है। इससे पैदल चलने वालों को व्यस्त सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है...

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आगरा के नियोजित विकास के लिए दीर्घकालीन सोच, नीतियां और कार्य योजनाएं बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की ही नहीं है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर निर्वाचित सांसदों, विधायकों और पार्षदों के बीच नियमित संवाद अनिवार्य है...

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बीस लाख से अधिक लोगों का शहर आगरा सरकारी लापरवाही और गलत प्राथमिकताओं का जीता-जागता सबूत और असफलता की बेहतरीन मिसाल है...

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हाल ही में पहलगाम नरसंहार से जहां एक शांतिपूर्ण माहौल खूनी संघर्ष में बदल गया, वहीं इसने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच की नाजुक शांति को तोड़ दिया। इस हमले ने सैन्य प्रतिशोध की तीव्र मांगों को फिर से जगा दिया है, जो राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर ज़ोरदार तरीके से गूंज रहा है। पिछले एक हफ्ते में हजारों किलो मोमबत्तियां जल के बुझ चुकी हैं। नारेबाजी से तापमान वृद्धि हो चुकी है। फिर भी, युद्ध के ढोल बजने और पूर्ण शंखनाद से पहले, राष्ट्र को रुककर परिणामों पर विचार करना चाहिए।

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साल 2025 हिंदुस्तान के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है क्योंकि दक्षिण पश्चिमी मानसून अपने वक़्त से पहले ही आ चुका है। इससे मुल्कभर में बहुत ज़रूरी राहत मिलने की उम्मीद है।

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