बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

पश्चिमी दुनिया की राजनीति एक रंगमंच बन चुकी है, जहां लोकतंत्र का मुखौटा पहनकर साम्राज्यवाद का नंगा नाच होता है। मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले खुद युद्ध के सौदागर हैं। कहते हैं शांति, करते हैं तबाही, और परिणाम होता है एक डील, फायदे का सौदा। क्या यही है सभ्यता का पश्चिमी मॉडल — झूठ, छल और पाखंड का गठबंधन…?

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हाल ही में दक्षिण भारत के एक शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गुरु सम्मान कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिला। बड़ी संख्या में डॉक्टर, व्यापारी, प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा हिन्दू संस्कृति, गौरव और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का प्रदर्शन उत्साहित कर रहा था।

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मध्य प्रदेश के एक व्यापारी परिवार के सदस्य के इलाज में इतना खर्च हो गया कि सदमे से उसकी मौत हो गई। ऐसे तमाम खौफनाक किस्से, डॉक्टर, हॉस्पिटल, लेबोरेटरीज की जांचों में घोटालों की लंबी लिस्ट हमारे सामने मौजूद हैं...

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केरल विधान सभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, और इस बार सबकी नजर एक ही चेहरे पर टिकी है, तिरुवनंतपुरम के सांसद डॉ शशि थरूर पर। एक ओर केंद्र सरकार के ग्लोबल डेलिगेशन में उनका चमकता चेहरा, दूसरी ओर कांग्रेस आलाकमान से बढ़ती दूरी। सवाल बड़ा है: क्या थरूर पार्टी बदलेंगे? या फिर केरल में कांग्रेस की नैया पार लगाएंगे?

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"आगरा से नोएडा डेढ़ घंटा, और नोएडा परी चौक से इंदिरा गांधी हवाई अड्डा दो घंटा। 1972 में भी आगरा से दिल्ली पहुंचने में चार-पांच घंटे लगते थे। आज हालात और बदतर हैं, प्रदूषण से आंखें जलती हैं, गले में खराश है, नाक बह रही है।"

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पूरा देश 14 नवंबर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। बिहार में लालू यादव का जंगलराज लौटेगा या नीतीश बाबू का चटपटा करामाती ठेला अपनी जगह टिका रहेगा? बिहार के चुनावी नतीजों से देश की राजनीति प्रभावित हो सकती है...

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