भारत बदल चुका है। चेहरा भी, चाल भी, चरित्र भी। सत्ता की भाषा बदली, शासन का व्याकरण बदला। पर असली सवाल अब सामने खड़ा है कि क्या यह बदलाव की आंधी आगे भी चलेगी, या अब इसकी सांस फूलने लगी है? 4 मई को पांच राज्यों के नतीजे इस पहेली का जवाब लिखेंगे।
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