पेरिस ने हमारा स्वागत नहीं किया बल्कि उसने पहले हमारा इम्तिहान लिया। यहां उतरते ही लगा कि हम किसी दूसरे ग्रह पर आ गए हैं। भाषा फ्रेंच थी, इमारतें बेहद सलीकेदार थीं, लोग फैशनेबल दिख रहे थे और ट्रैफिक ऐसा था जैसे सड़क पर कोई मुकाबला चल रहा हो। मौसम ने भी अपना अलग ही मिज़ाज दिखाया। कुल मिलाकर शहर नहीं बदला था, पूरी दुनिया बदल गई थी। और, फिर आया यूरोस्टार...
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