बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

धार्मिक स्थलों पर गतिविधियां और आध्यात्मिक नेताओं की आबादी चिंताजनक रूप से बेतहाशा बढ़ रही हैं। अदालतों में धार्मिक मसलों का अंबार लग गया है...

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एक बुजुर्ग सज्जन ने सुबह की सैर के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिस तरह पीड़ित अपने साथ अपराध हो जाने के बावजूद पुलिस के पास जाने से डरते हैं, ठीक उसी तरह मरीज़ भी आजकल चिकित्सा सेवा लेने अस्पताल जाने से कतराते हैं। डॉक्टरों पर जो भरोसा कभी था, जिन्हें कभी ईश्वरीय स्वरूप माना जाता था, वह अब काफी हद तक खत्म हो चुका है...

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क्या आपने हाल ही में कोई पांच दिन तक चलने वाली ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ में भाग लिया है? अगर नहीं लिया है तो कोई बात नहीं। लेकिन, आपने सोशल मीडिया पर अंबानी की शादी के वीडियो क्लिप जरूर देखे होंगे...

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कर्नाटक में मिली सफलता के बाद, उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब राज्य सरकार से सरकारी बसों में मुफ़्त यात्रा प्रदान करने का आग्रह कर रही हैं। महिला समूहों ने पूरे राज्य में यूपी राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ़्त यात्रा की मांग की है...

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साल 1947 में स्वतंत्रता मिलने पर बहुत से सेक्युलरवादियों ने सोचा था कि युगों से चला आ रहा विचारधाराओं का संघर्ष, ‘टू नेशन थ्योरी’ के जनक मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान मिलने के बाद समाप्त हो जाएगा। जिन्ना शुरू से ही कहते आए थे कि हिन्दू, मुस्लिम दो अलग राष्ट्र हैं, इसलिए विभाजन ही इस दम घोंटू स्थिति का एकमात्र समाधान है...

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कैसे ये तथ्य नजरअंदाज करें कि आबादी के नियंत्रण से आज भारत की सामाजिक आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, मध्यम वर्ग की जीवन शैली तथा शिक्षा स्तर काफी सुधरा है। स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है। साल 1952 में शुरू हुए परिवार नियोजन अभियान का प्रभाव अब दिखने लगा है। ऐसे में जनसंख्या वृद्धि का सुझाव कौन मानेगा?

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