बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

हाल ही में, ट्रैफिक पुलिस के कर्णधारों ने आगरा शहर की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए एक बैठक बुलाई। बैठक में हर बार की तरह वही पुराने सुझाव दिए गए और कठोर फैसले लेने से बचा गया...

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आगरा में स्थानीय मेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों की समृद्ध परंपरा लगभग 40 साल पहले तक हमारे मोहल्लों और बाज़ारों में फलती-फूलती थी। दुर्भाग्य से, हमारे सामुदायिक जीवन का यह जीवंत हिस्सा काफी हद तक लुप्त हो गया है।

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा नागरिकों से अधिक बच्चे पैदा करने के आह्वान ने आर्थिक, सामाजिक और नैतिक चिंताओं को छूते हुए एक नई बहस छेड़ दी है।  ध्यान रहे, दक्षिणी राज्यों में उच्च जन्म दर को प्रोत्साहित करने के विचार के पक्ष में काफी नेता मैदान में उतर आए हैं...

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कहीं झाड़ी में, कहीं कूड़ेदान में, कहीं अनाथालय के बाहर लटकी डलियों में, अब बच्चों के चीखने रोने की आवाज कम सुनाई दे रही है। पुरानी फिल्मों में अवैध संतानों के संघर्ष की कहानियां अब रोमांचित नहीं करतीं...

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चाहिए सिर्फ एक मोबाइल फोन विद इंटरनेट कनेक्शन..., जी हां..., और आ गया आपके हाथ में अलादीन का चिराग, या बंदर के हाथ  में उस्तरा...

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क्या दुनिया के लोकतांत्रिक देश वर्तमान में नेतृत्व संकट से जूझ रहे हैं? ऐसा लगता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को चलाने या मार्गदर्शन करने वाले प्रेरक नेताओं की कमी का खामियाजा जनता भुगत रही है।

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