बस्तर आर्ट के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ का लौह शिल्प देश और दुनिया में न सिर्फ अपनी एक पहचान बना रहा है बल्कि लोगों के रोजगार का जरिया भी बन रहा है।
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समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।
बस्तर आर्ट के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ का लौह शिल्प देश और दुनिया में न सिर्फ अपनी एक पहचान बना रहा है बल्कि लोगों के रोजगार का जरिया भी बन रहा है।
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आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भी बिहार की इस राजधानी को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। पटना से 80 किलोमीटर की दूरी पर, उत्तरपूर्व में स्थित छपरा से करीब 70 किलोमीटर दूर पुराने सारण जिले के गांव जीरादेई में साल 1884 में सरलता और सादगी के अवतार राजेन्द्र बाबू का जन्म हुआ।
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ऊंचे-ऊंचे नारियल के पेड़ व उन पर लगे नारियल जिनका पानी तो आपने जरूर पीया होगा, लेकिन क्या आपको मालूम है कि नारियल के इस पेड़ से एक और अमूल्य उत्पाद भी हमें प्राप्त होता है, जिसका नाम है 'नीरा'। इसे प्राप्त करने के लिए बड़ी मशक्कत से नीरा टैपर्स को नारियल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है, वह भी दिन में कई बार...
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अक्सर लोगों को लगता है कि मोतियाबिंद केवल बड़े-बुजुर्गों को ही होता है, लेकिन यह बीमारी बच्चों को भी हो सकती है। सफेद मोतिया या मोतियाबिंद बच्चों में दृष्टिहीनता होने का एक बड़ा कारण है...
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आज के समय में ऐसे कई कारक हैं जो हमारी सुनने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुके ईयर फोन और डीजे जैसी उपकरण कानों के लिए बेहद नुकसानदेह हैं...
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आज से करीब 100 साल पहले मदुरै में जब महात्मा गांधी देश के लिए विदेशी कपड़े छोड़कर सूत की धोती को धारण कर रहे थे, उसी समय बिहार के अररिया में शीलानाथ मंडल के यहां एक बालक ने जन्म लिया। बच्चे के जन्म पर परिवार को ऋण लेना पड़ा तो परिवार वाले बच्चे को ‘रेनुआ’ पुकारने लगे। यही रेनुआ अपनी लेखनी से हिंदी साहित्य प्रेमियों को ऋणी कर गये।
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