पवन गौतम

पवन गौतम समाचारएक्सप्रैस.कॉम के संपादक हैं।

कृष्ण को हम कन्हैया, कुंजबिहारी, राधेश्याम, बांकेबिहारी, नंदलाल और कई अन्य नामों से जानते हैं। इन्हीं में से उनका एक नाम ‘दामोदर’ भी है। ‘दामोदर’ शब्द में दाम का अर्थ होता है 'रस्सी' और उदर का अर्थ होता है 'पेट', यानी रस्सी से बंधा हुआ पेट। कृष्ण को ‘दामोदर’ के नाम से पुकारे जाने के पीछे एक रोचक कहानी है...

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यमुना व यमराज भाई-बहन हैं और इसीलिए यमपाश से मुक्ति के लिए भाई व बहन द्वारा यमुना नदी में एकसाथ स्नान करने का विधान हैं। माना जाता है कि कार्तिक द्वितीया यानी भैया दूज के दिन यमुना नदी में स्नान करने से यमराज के भय से छुटकारा प्राप्त होता है।

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वृंदावन स्थित कात्यायनी देवी मंदिर का नाम प्राचीन सिद्धपीठ के अंतर्गत आता है। यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है...

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नवरात्रि के दिनों में कन्हैया की नगरी मथुरा देवी नगरी बन जाती है। यहां के कई देवी मंदिरों में देर रात तक पूजा-अर्चना के कार्यक्रम चलते रहते हैं।

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प्राय: कुछ लोग यह शंका करते हैं कि श्राद्ध में समर्पित की गईं वस्तुएं पितरों तक कैसे पहुंचती हैं? कर्मों की भिन्नता के कारण मरने के बाद गतियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं–कोई देवता, कोई पितर, कोई प्रेत, कोई हाथी, कोई चींटी, कोई वृक्ष और कोई तृण बन जाता है। तब मन में यह शंका होती है कि छोटे से पिण्ड से अलग-अलग योनियों में पितरों को तृप्ति कैसे मिलती है? इस शंका का स्कन्दपुराण में बहुत सुन्दर समाधान मिलता है...

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अक्सर मन में प्रश्न उठता है कि यदि पुनर्जन्म है और आत्मा को दूसरा शरीर ग्रहण करना ही होता है तो फिर श्राद्ध कर्म का प्रयोजन क्या है? या यदि वह आत्मा विशेष सदा आत्मा ही रहती है तो क्या पुनर्जन्म की अवधारणा बिल्कुल ग़लत है?

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