यदुवंश के राजा शूरसेन के एक पुत्र वसुदेव और एक पुत्री पृथा थे। पृथा को शूरसेन ने अपनी बुआ के संतानहीन पुत्र कुंतीभोज को गोद दे दिया। जहां कुंतीभोज ने इस कन्या का नाम ‘कुंती’ रखा...
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पवन गौतम समाचारएक्सप्रैस.कॉम के संपादक हैं।
यदुवंश के राजा शूरसेन के एक पुत्र वसुदेव और एक पुत्री पृथा थे। पृथा को शूरसेन ने अपनी बुआ के संतानहीन पुत्र कुंतीभोज को गोद दे दिया। जहां कुंतीभोज ने इस कन्या का नाम ‘कुंती’ रखा...
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मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में ऐंती ग्राम के निकट शनि पर्वत पर स्थित शनिचरा मंदिर को शनि महाराज की तपोभूमि माना जाता है। शनि पर्वत का उल्लेख त्रेता युग से ही मिलता है...
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'महामृत्युंजय मंत्र' को मृत्यु टालने वाला मंत्र बताया गया है। इसकी रचना के पीछे भी एक रोचक कहानी है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव के परम भक्त ऋषि मृकण्डु हमेशा शिव की भक्ति में लीन रहते थे।
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राजस्थान के दौसा जनपद में करीब एक हजार साल पुराना पपलाज माता का मंदिर है। यहां स्थापित माता की मूर्ति को एक चमत्कारी मूर्ति माना जाता है। यह स्थान जिला मुख्यालय से 35 किमी और उपखंड क्षेत्र लालसोट से 15 किमी की दूरी पर घाटा में स्थित है।
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सनातनी परंपरा में ‘चिरंजीवी’ उसे कहा जाता है जो अमर हो अर्थात जिसका कोई अंत न हो। वैदिक परंपरा में ऐसे आठ चिरंजीवियों का उल्लेख आता है। ये आठों व्यक्तित्व किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे, दिव्य शक्तियों से संपन्न हैं। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है, वे सारी शक्तियां इनमें विद्यमान है। जो लोग परामनोविज्ञान को जानते और समझते हैं, वे इन पर विश्वास करते हैं।
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ब्रज में एक लोकोक्ति बहुत प्रसिद्ध है – “हलुआ में हरि बसत हैं, घेबर में घनश्याम। मक्खन में मोहन बसैं, रबड़ी में श्री राम।। यहां बात हो रही है भगवान की खान-पान से संबंधित रुचियों की। और, यदि भगवान के खान-पान की बात चले तो सबसे पहले याद आता है ‘छप्पन भोग’...
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