बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जोशीला भाषण जितने सवालों के जवाब देने आया था, उससे कहीं ज़्यादा प्रश्न खड़े कर गया। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बहाने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला, लेकिन क्या यह ‘हमला’ सरकार पर भारी पड़ा, या फिर उनकी अपनी समझदारी पर नए सवालिया निशान छोड़ गया...

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योगी आदित्यनाथ ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं। आंकड़ों की समीक्षा से लगने लगा है कि 2025 का उत्तर प्रदेश उड़ान भरने को तैयार है। प्रदेश का बुलडोजर मॉडल क्राइम कंट्रोल के लिए कारगर हथियार साबित हुआ है। आज नहीं तो कल वर्तमान नेतृत्व नई पीढ़ी को जगह देगी। अगर यह सवाल पूछा जा रहा है कि मोदी के बाद कौन, तो इसमें गलत क्या है?

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चेन्नई शहर में, अचानक रास्ता पूछने के चक्कर में एक लैदर बेल्ट और बटुए बेचने वाले से टकराहट हुई। हमने गलतफहमी में उससे अंग्रेजी में जानकारी लेनी चाही, उसने हिंदी में बताया। बोली का लहजा कुछ जाना पहचाना सा लगने पर हमारा अगला सवाल था... कहां से हो? सकुचाते हुए वह बोला, “आगरा से हैं…”। “आगरा में कहां से?” “इटौरा के पास के गांव से…“ उसने बताया “निरे लौंडे” अपनी तरफ के यहां हैं...

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क्यों ताज महल देखकर तुरंत आगरा से भागता है पर्यटक? कितने पर्यटक राम बाग, एत्माद्दौला, चीनी का रोजा, महताब बाग जाते हैं? क्या पर्यटन विभाग को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए?

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एक तरफ पश्चिमी मीडिया में चीन का दबदबा है। चीनी लोग अमेरिका के कई प्रमुख अखबारों के प्रबंधकीय बोर्ड में निदेशक हैं। वे लॉबी और जन संचार कंपनियों पर मोटा खर्च करके सरकारों पर दबाव बनाते हैं। उधर, भारत की कहानी पर सवालिया निशान लग रहे हैं। कहने को अमेरिकी प्रशासन में तमाम भारतीय मूलवंशी हैं, लेकिन रुतबा जीरो है। पश्चिमी मीडिया के लोग, जर्मनी से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक, भारतीय कथ्य को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वक्त पर कोई साथ नहीं दे रहा है। कहां चूक हो रही है? कैसे विश्व गुरु हैं हम?

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आगरा, मथुरा और फिरोजाबाद जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिलों को समेटे बृज क्षेत्र की हरी-भरी विरासत पर विलायती बबूल का एक मौन और गंभीर खतरा मंडरा रहा है...

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