बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

भारतीय इतिहास में संत सुधारकों ने गहन और जटिल आध्यात्मिक ज्ञान को जनसाधारण की भाषा में अनुवादित कर जनसंचार का एक अनोखा माध्यम विकसित किया। यह प्रक्रिया न केवल ज्ञान को सुलभ बनाती थी, बल्कि उसे लोकप्रिय बनाकर समाज में गहराई से स्थापित करती थी...

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एक अरसे के बाद, मैं अपने नाती को लेने स्कूल पहुंचा। छुट्टी में अभी वक्त था, सोचा कि एक चक्कर लगा लूं। तभी मोड़ पर 7–8 बच्चे दिखे। एक एलीट स्कूल के चकाचौंधभरे कॉरिडोर में उनकी भाषा सुनकर कान सुन्न पड़ गए। ‘जेन-जी’ की तेज़, कटी-कटी, इमोजी-टपकाती जुबान… और हर वाक्य में चार-अक्षरों की भीषण आग...

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बीते 28 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फ़ैसला दिया है जिसने पूरे मुल्क को झकझोर दिया है। अदालत ने उस शख़्स की ज़मानत रद्द कर दी जिस पर शादी के महज़ चार महीने बाद ही बीवी को ज़हर देकर मारने का इल्ज़ाम है।

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बीते 29 नवंबर को नागपुर बुक फेस्टिवल में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने महात्मा गांधी की किताब ‘हिंद स्वराज’ के एक विवादित वाक्य की आलोचना की। गांधी ने लिखा था कि भारत एक राष्ट्र के रूप में वास्तव में ब्रिटिश शासन के कारण ही उभरा...

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कर्नाटक इन दिनों किसी रियासत की तरह चल रहा है! नाश्ते की मेज़ पर मुख्यमंत्री और उनके डिप्टी इडली-वड़ा नहीं, बल्कि तख़्त की लड़ाई लड़ रहे हैं, धीमी गति की चाकू-छुरी वाली जंग की तरह, और दिल्ली का तथाकथित हाईकमान गलियारे में सहमा खड़ा है, महाभारत के धृतराष्ट्र जैसा हिचकिचाता हुआ...

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लहरिया सराय का 40 वर्षीय युवा राम सहाय रेलवे स्टेशन पर आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां उसका हर कदम आगे बढ़ता है तो कोई न कोई ताक़त उसे पीछे खींच लेती है। गांव की मिट्टी की सुगंध, और शहरी चकाचौंध के आकर्षण से जूझता यह शख्स हर भारतीय नागरिक की दुविधा का आईना बन चुका है...

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