जिला अस्पताल में बालिका से दुष्कर्म के मामले में अस्पताल प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से न लिये जाने को लेकर धरना प्रदर्शन करतीं महिलायें।
मथुरा। गत दिवस जिला अस्पताल में इलाजरत लावारिस बालिका से दुराचार का मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा मामला गंभीरता से न लिये जाने से नाराज भाजपा महिला संगठन की कार्यकर्ताओं ने आज जिला अस्पताल में आगरा मंडल की महिला नेत्री कुन्दनिका शर्मा के साथ सीएमएस के कार्य से असंतुष्ट होकर मोर्चा खोल दिया है।
आज दर्जनों की संख्या मंे महिलाओं ने सीएमएस कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने के साथ सही कार्यवाही न होने की स्थिति में आत्मदाह तक की धमकी दे डाली है। महिलाओं की न्यायोचित मांग व घटना से बौखलाए अस्पताल प्रशासन ने पुलिस अधकारियों को भी सूचित कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला थाना प्रभारी ममता पवार, हाईवे थाने मं तैनात सब इंस्पैक्टर रीना चैधरी भी मौके पर आ गयी है जहां भाजपा नेत्रियों को समझाने के प्रयास के साथ कड़ी कार्यवाही करने का भरोसा पुलिस ने दिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी असलम पुत्र इसलाम हिरासत में ले लिया गया हे। वहंी महिला नेत्री उसके साथ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग पर अड़ी हैं। प्रदर्शन करने वाली महिलाओं में अनीता थापा, डा. दीपा अग्रवाल, सुषमा अग्रवाल, नीलम पांडे, लता अग्रवाल, मीरा मित्तल, मोहिनी शर्मा, ललिता नागर, पारूल शर्मा, गीता, ममता अग्रवाल, रीता चैधरी आदि उपस्थित थीं।
दरिंदगी की शिकार बालिका को देखने नहीं पंहुचे डीएम-एसएसपी
सामाजिक संगठन और महिलाओं ने की भारी निंदा
मथुरा। एक रोज पूर्व जिला अस्पताल में लावारिस बालिका के साथ दरिंदगी की घटना ने जहां जनपदवासियों का हिला दिया है। महिला संगठन आज जिला अस्पताल पहुंचकर खूब लाल-पीली हुयीं। सीएमएस की भी जमकर खिंचाई की गयी। यहां तक कि महिलाओं का बच्ची को देखकर गुस्सा इतना अधिक बढ़ गया कि उन्होंने उल्टी-सीधी बातें भी सीएमएस से कहीं। यह सब उस अबोध और लावारिस बालिका के प्रति महिलाओं की भावनाएं थीं लेकिन अफसोस! इस बात का कि जिले में इतनी बड़ी घटना अस्पताल में हो गयी और मथुरा के डीएम और एसएसपी ने अपना इतना भी फर्ज नहीं समझा कि वे इस अबोध बालिका की कुशलक्षेम तो पूछते। पब्लिक और महिला संगठनों में भी इस बात को लेकर भारी नाराजगी देखी गयी। जिले के दोनों बड़े अधिकारियों ने जिला अस्पताल पंहुचकर सांत्वना भी नहीं दी। यह अमानवीय बातें लोगों के गले नहीं उतर रही हैं।






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