मथुरा : आखिर नए और छोटे अखबार खोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है। इसका सीधा कारण है कि सारे बड़े अखबारों पर व्यवसायीकरण हावी हो गया है और बड़े-बड़े उद्योग घराने के हाथों में हैं, इतना ही नहीं आज पत्रकार जो समाज में अन्याय हो रहा है उसे भी निर्भीकता से नहीं लिख सकता है।






Related Items
बजट में नदियों की अनदेखी, छोटे शहरों को दिखाए नए ख़्वाब…!
‘छोटे’ झगड़ों को ‘अपराध’ बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति…
बुलेट स्पीड में विकास की गाड़ी, छूट रहे हैं छोटे स्टेशन...