नास्तिकों का वृन्दावन में दो दिवसीय सम्मेलन

सम्मेलन को लेकर संत विरोध प्रदर्शन करते हुए मथुरा। एक तरफ धर्म और आस्था को लेकर देश और दुनियां में आस्थावान लोग मंदिर, देवालय, चर्च, ईदगाह, गुरूद्वारा जाकर शीश नवाते है। वहीं ऐसे भी लोग है जो धर्म को कुछ भी नहीं मानते है। उनकी नजर में यह एक मनोरंजन का साधन और अन्धविश्वास को बढ़ावा देने वाला होता है। इसी सब को लेकर वृन्दावन में नास्तिक लोगों का एक बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें 18 राज्यों के नास्तिक लोग भाग ले रहे है। स्वामी बालेन्दु ने बताया दो दिन के सम्मेलन में 18 राज्यों के लोग भाग लेंगे। धर्म अन्धविश्वास को बढ़ावा देता है और नास्तिक लोग इसे कुछ नहीं समझते। इसी सब पर नास्तिकों का सम्मेलन शुरू होगा। 

नास्तिकों के सम्मेलन के विरोध में उतरे साधु, सन्त विवाद की संभावना 

मथुरा।  वृंदावन में आस्था को लेकर आने वाले दूर-दूर के श्रद्धालुओं के लिये यहां के संत महंत श्रद्धा का केन्द्र बने है। ऐसे में इन साधु सन्तों पर नास्तिकों से होने वाला सम्मेलन परेशानी का कारण बन गया है। इसको लेकर संतों में भारी नाराजगी है। और वे इसका पुरजोर विरोध कर रहे है। जैसे ही इसकी जानकारी संतों को लगी तो उनमें आक्रोश फैल गया। इस सम्मेलन के विरोध में साधु सन्त इकटठे होते नजर आये। दोनों पक्षों में कभी भी कोई विवाद हो सकता है। साधु, संत नास्तिकों के सम्मेलन को लेकर खफा है और वे वृन्दावन में इसका आयोजन करने वालों का विरोध करने पर उतर आये है। कभी भी इससे विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। 

सिटी मजिस्ट्रेट राम अरज यादव ने बताया कि इस सम्मलेन कि कोई परमिशन नहीं ली गयी है , धारा 144 लागू है. कोई भी सम्मेलन जो समाज के विरोद्ध, सामाजिक विध्वंस इसको फ़ैलाने का अधिकार या किसी के इष्ट देव या धार्मिक ग्रन्थ के विरूद्ध बोलने का अधिकार किसी को नहीं है. बिना परमिशन के कोई भी कार्यक्रम होगा उस पे कार्यवाही की जायेगी। 

 


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