संपादकीय

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान।

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ठीक 188 साल पहले पं. जुगल किशोर शुक्ल ने वर्ष 1826 में जब पहला हिन्दी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’ निकाला तो हिंदी पत्रकारिता का मतलब सिर्फ ‘अखबार’ ही रहा होगा... ऐसा शायद किसी ने न सोचा होगा कि आने वाले युग में अखबार के अलावा दूसरे कई माध्यम संवाद संप्रेषण करने के लिए अपनी जगह बनाएंगे।

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आपके घर में अगर मेहमान आ गए तो अपके अंदर का 'वर्तमान विचारक' अपने आपको व्यवहार करते हुए देख पाएगा। 'देखा! मेहमान के सामने मैं कैसे व्यवहार कर रहा हूं।' वह वर्तमान विचारक हैं, वह सिर्फ मेहमान को ही नहीं देख रहा है बल्कि मेहमान को देखकर अपने अंदर क्या हो रहा है, वह भी देख रहा है। वह कहां सिकुड़ रहा है और कहां खुल रहा है, ये सभी बातें भी वह देख सकता है।

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हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में देश की जनता ने ऐसा जनमत दिया जिसकी उम्मीद बेहद कम ही लोगों को थी। यह चुनाव हर मायने में 'अलग' था।

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प्रायः सभी प्रतिष्ठित मीडिया चैनलों पर जो चुनाव पूर्व 'जनमत' (ओपिनियन पोल) आया उसमें मोदी की 'हवा-पानी' की बात की गई। बीजेपी के हवाले से 'लहर -सुनामी' की भी खूब चर्चा हुई! 'एग्जिट' पोल में भी मोदी के नेतृत्व में एनडीए की जीत अच्छी 'तय' मानी गई! आज सचमुच मोदी अपने कहे अनुसार जीत गए हैं! शानदार। 1984 के बाद सबसे अधिक सीट। बीजेपी के इतिहास में श्रेष्ठ। अभूतपूर्व। अकेले दम पर बहुमत। नरेंद्र मोदी की 'जीत' को कैसे देखा जाए? 'अच्छे दिन आने वाले हैं' के रूप में! आवश्यकतानुसार पिछड़ा राजनीति (बिहार-यूपी में खासकर), गरीबी, चाय बेचनेवाला के साथ विकास की राजनीति। 

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हाल में ही देश में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के मतदान के तुरंत बाद देश के कई टीवी चैनलों ने एग्जिट पोल के माध्यम से यह बताने का सिलसिला शुरू कर दिया कि देश में किसकी सरकार बनेगी...।

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