मथुरा

कोलंबो । श्रीलंका के विस्फोटक ओपनर तिलकरत्ने दिलशान ने गुरुवार को वनडे और टी20 क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी सीरीज का तीसरा मैच दिलशान के करिअर का आखिरी वनडे होगा। यह मुकाबला दांबुला में रविवार को खेला जाना है। कोलंबो में नौ सितंबर को वे ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ अंतिम टी20 मैच खेलेंगे। माना जा रहा है कि चयनकर्ताओं के दबाव के चलते दिलशान ने संन्यास का फैसला लिया है। दिलशान ने वर्ष 2015 में 52.47 की औसत से 1207 रन जुटाए। अटकलें लगाई जा रही हैं कि कप्तान एंजलो मैथ्यूज और चयनकर्ता 2019 विश्व कप के लिए टीम तैयार करना चाहते हैं और इसीलिए दिलशान पर संन्यास लेने का दबाव डाला गया। दिलशान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रही सीरीज के शुरुआती दोनों मैच में फ्लॉप साबित हुए। पहले मैच में उन्होंने 22 और दूसरे में 10 रन की पारी खेली। दिलशान वनडे टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। दिलशान को 11 दिसंबर 1999 को जिम्बाब्वे के खिलाफ करिअर का पहला वनडे खेलने का मौका मिला था। दिलशान ने 329 वनडे में 22 शतक व 47 अर्धशतकों की मदद से 10248 रन जुटाए हैं। वनडे में दिलशान के अलावा तीन और श्रीलंकाई बल्लेबाज 10000 रन का आंकड़ा पार कर चुके हैं। दिलशान ने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी की मदद से वनडे में 106 विकेट भी चटकाए हैं। दिलशान का दिलस्कूप शॉट काफी लोकप्रिय रहा। श्रीलंका क्रिकेट ने फैसला किया है कि तीसरा वनडे दिलशान के सम्मान में खेला जाएगा। 39 वर्षीय दिलशान टी20 में श्रीलंका के दूसरे क्रिकेटर हैं, जिन्होंने शतक लगाया है। उनसे पहले महेला जयवर्धने ने यह कमाल किया था। दिलशान ने वर्ष 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पल्लेकल में नाबाद 104 रन बनाए थे। दिलशान ने 78 टी20 मैच में 1884 रन जुटाए हैं, जिनमें 13 अर्धशतक भी शुमार हैं। दिलशान ने 87 टेस्ट में 40.98 के औसत से 5492 रन बनाए थे।                  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की लड़ाई सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से है। उन्होंने कहा कि इस बार उत्तर प्रदेश में बदलाव के लिए वोट पड़ेंगे और वोटरों की पसंद भाजपा होगी। शाह ने कहा कि जनता ने परिवर्तन का मन बनाया है और जब वोटों की गिनती होगी, तब आप इसे याद रखना। उन्होंने राज्य के चुनाव को लेकर अपनी योजनाओं के बारे में भी बात की। साथ ही, राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों, गुजरात में दलित सवाल से लेकर भाजपा-कांग्रेस संबंधों और सरकार-न्यायपालिका के रिश्तों पर भी बात की। शाह का कहना था कि उनकी उत्तर प्रदेश रणनीति इस भरोसे पर आधारित है कि अगर इस राज्य में बदलाव होता है कि भारत आसानी से डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य हासिल कर सकता है और उनका काम जनता के बीच यह संदेश देना है कि भाजपा इस काम को अंजाम दे सकती है।   बसपा को नहीं आंक रहे कम यूपी के बारे में इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में शाह इस राय पर अडिग दिखे कि लड़ाई भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच है। उन्होंने इससे भी इनकार किया कि उनकी पार्टी बसपा को कमजोर मान कर चल रही है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण पार्टी यूपी में वोटरों के बीच बदलाव का संदेश लेकर जाएगी। उन्होंने कहा मेरी पार्टी का मूल सिद्धांत अंत्योदय है। जब अंतिम का उदय करोगे तो देश का उदय होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने यूपी के लिए जितना किया है, उतना किसी अन्य सरकार ने नहीं किया। उन्होंने गुजरात में दलितों के विरोध-प्रदर्शनों को राजनीति से प्रेरित बताया।   मुख्यमंत्री पद पर अभी फैसला नहीं  यूनिवर्सिटी आंदोलनों पर शाह का कहना था, विश्वविद्यालयों में युवा लोग आंदोलन करते हैं और इसे अक्सर काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। यूपी में सीएम कैंडिडेट के सवाल पर शाह ने कहा कि इस बारे में अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। शाह ने इस बात से भी इनकार किया कि गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि मेरे आनंदीबेन के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं। भाजपा-कांग्रेस के रिश्ते पर शाह ने कहा, हमारे संबंध ठीक वैसे हैं, जैसा सत्ता पक्ष और विपक्ष का होना चाहिए।   कश्मीर मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एक  शाह को भाजपा और जम्मू-कश्मीर में उसकी सहयोगी पार्टी पीडीपी में भी कोई अंतर नजर नहीं आता है। कश्मीर घाटी में मौजूदा हालात से निपटने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अगर आप कश्मीर पर महबूबा के बयान को सुनेंगे, तो आप पाएंगे कि उनकी लाइन वही है, जो दूसरी राजनीतिक पार्टियों की है। यह पूछे जाने पर देश का दूसरा सबसे पावरफुल शख्स होने पर वह कैसा महसूस करते हैं, शाह ने इसे खारिज करते हुए कहा, इस देश में पहला पावरफुल शख्स ही कोई नहीं है। प्रधानमंत्री खुद को प्रधान सेवक कहते हैं, तो सेकेंड का कोई सवाल नहीं उठता।                   साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हाजी अली दरगाह में अब महिलाओं की एंट्री की अनुमति दे दी है। शुक्रवार बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट की ओर से प्रवेश पर पाबंदी को गैरजरूरी माना और बैन हटा लिया। नौ जुलाई को दो जजों की बेंच में मामले में आखिरी सुनवाई हुई थी। जस्टिस वीएम कनाडे और जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे की खंडपीठ मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता नूरजहां सफिया नियाज की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव मोरे ने हाई कोर्ट में पैरवी की। नियाज ने अगस्त 2014 में अदालत में याचिका दायर कर यह मामला उठाया थाउन्होंने हाई कोर्ट से सूफी संत हाजी अली के मकबरे तक महिलाओं के प्रवेश की इजाजत मांगी थी। अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से मामला सुलझाने को भी कहा, लेकिन दरगाह के अधिकारी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने देने पर अड़े हुए हैं।  दरगाह के ट्रस्ट का कहना है कि यह प्रतिबंध इस्लाम का अभिन्न अंग है और महिलाओं को पुरुष संतों की कब्रों को छूने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है और महिलाएं दरगाह के भीतर प्रवेश करती हैं तो यह पाप होगा।                   साभार-khaskhabar.com  

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बॉलीवुड अभिनेत्री ग्रेसी सिंह ने बताया कि बॉलीवुड फिल्म ‘लगान: वन्स अपॉन अ टाइम इन इंडिया’ में गौरी के किरदार की वजह से प्रशंसक हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर बेसब्री से उनकी प्रस्तुति का इंतजार करते हैं। वर्ष 2001 के मशहूर गीत ‘राधा कैसे ना जले’ में ग्रेसी ने राधा का किरदार निभाया था, जो भगवान कृष्ण की पूजा करती थीं, उनका जन्म जन्माष्टमी वाले दिन हुआ था। वर्तमान में टेलीविजन धारावाहिक ‘संतोषी मां’ में नजर आ रही ग्रेसी ने कहा, ‘‘मैं इस्कॉन मंदिर की सदस्य हूं और जन्माष्टमी पर हर साल वहां जाती हूं। मुझे खुद लगता है कि इस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ है और मुझे इस्कॉन जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब से मैंने ‘लगान’ में राधा के रूप में प्रस्तुति दी है तब से प्रशंसक चाहते हैं इस पर प्रस्तुति दूं। हालांकि, यह हमेशा जन्माष्टमी के त्योहार से जुड़ा है।’’ कृष्ण जन्माष्टमी गुरुवार को मनाई जा रही है।            साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । महाराष्ट्र के लासलगांव में एशिया की सबसे बडी प्याज मंडी है जहां कारोबारियों की ह़डताल से किसान टूट गए हैं, पैदावार सड रही है, उन्हें कीमत मिल नहीं रही। वे प्याज बेचने के बजाए फेंकने को मजबूर हैं। नासिक के सायखेडा में मंडी में किसान को एक कि्वंटल पर 5 रूपये का लाभ मिल रहा था, लिहाजा उन्होंने इसे बेचने के बजाए, खेतों में फेंकना मुनासिब समझा।    नासिक की मंडियों में प्याज नीलामी के जरिए बेचा जाता है। फिलहाल यहां प्याज की कीमत 4 रूपये प्रति किलो है लेकिन हडताल की वजह से प्याज स्टोर करके रखने से वह सडने लगी है। किसानों का कहना है कि एक कि्वंटल प्याज उगाने की लागत 650-700 रूपये है, लेकिन बाजार में कीमत 400-500 रूपये प्रति कि्वंटल तक आ गई है। महाराष्ट्र सरकार ने कुछ दिनों पहले नए नियमों के तहत किसानों को उत्पाद सीधे बाजार में बेचने की छूट दे दी है, जिसके खिलाफ लासलगांव में कारोबारियों ने महीने भर से ज्यादा हडताल रखी। अब किसान चाहते हैं कि सरकार प्याज का समर्थन मूल्य बढाए।            साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने पिछले साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। इस फैसले के बाद एक बार तो उनके फैंस काफी निराश हो गए, लेकिन सहवाग ने जल्द ही सोशल मीडिया से नाता जोड़ उस पर लगातार सक्रिय रहकर अपने चुटिले अंदाज से उन्हें फिर से अपना दीवाना बना लिया। वीरू अपने ट्विटर अकाउंट पर क्रिकेटर्स को खास तरीके से बधाई देते रहते हैं। अब उन्होंने रियो ओलंपिक में दो पदक जीतने के बाद भारत में हुए शानदार जश्न को लेकर ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मोर्गन के व्यंग्यात्मक ट्वीट का ऐसा करारा जवाब दिया कि उनकी बोलती ही बंद हो गई। दरअसल, मोर्गन ने भारत में ओलंपिक पदक विजेताओं बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु और पहलवान साक्षी मलिक के जबरदस्त स्वागत की खबर को ट्वीट करते हुए लिखा कि सवा अरब की जनसंख्या वाला देश सिर्फ 2 मेडल जीतकर खुशी मना रहा है। यह कितना शर्मनाक है। ऐसी टिप्पणी वीरू को नागवार गुजरी। वीरू ने जवाब में लिखा कि हम हर छोटी खुशी का भी मजा लेते हैं लेकिन इंग्लैंड, जिसने क्रिकेट की शुरुआत की, वह आज तक वनडे विश्व कप नहीं जीत सका और फिर भी उसमें खेलता है। क्या यह शर्मनाक नहीं है। वीरू के इस जवाब को 11 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट और करीब 13 हजार लोगों ने लाइक किया। मोर्गन इस जवाब से बौखला गए और उन्होंने फिर लिखा कि अगर केविन पीटरसन खेल रहे होते, तो इंग्लैंड विश्व कप जरूर जीतता। वैसे ही जैसे हमने टी20 विश्व कप जीता था जिसमें पीटरसन मैन ऑफ द सीरीज थे। वीरू के पास इसका भी तोड़ था। वीरू ने तुरंत लिखा कि पीटरसन इंग्लैंड के नहीं, मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका से थे और उनके तर्क के हिसाब से तो इंग्लैंड को 2007 का विश्व कप जीतना चाहिए था, क्योंकि पीटरसन उस टीम का हिस्सा थे। हमारे जश्न से आपको क्या दिक्कत है।            साभार-khaskhabar.com  

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