मथुरा

सिने इतिहास की सबसे बडी स्टार कास्ट और सबसे बडी फिल्म के नाम से मशहूर हुई फिल्म ‘शोले’ ने आज प्रदर्शन के 41 साल पूरे कर लिए हैं। प्रदर्शन के प्रथम तीन दिन में असफल करार दे दी गई इस फिल्म ने प्रदर्शन के चौथे दिन से दर्शकों को अपनी ओर चुम्बक की भांति आकर्षित किया और एक साधारण से बदले की कहानी हिन्दी फिल्मों के इतिहास में इस तरह दर्ज हुई कि उसके बाद सैंकडों की तादाद में विभिन्न भाषाओं में इस फिल्म की कहानी पर फिल्में बनने लगीं। पन्द्रह अगस्त 1975 को प्रदर्शित हुई इस फिल्म की सफलता ने बॉक्स ऑफिस पर कई कीर्तिमान स्थापित किए। यह हिन्दी उद्योग की पहली ऐसी फिल्म थी, जिसके संवाद के रिकॉर्ड जारी किए थे। यह एक ऐसी फिल्म थी, जिसे दर्शकों ने बार-बार देखा और सराहा। आज भी यह फिल्म टीवी पर प्रदर्शित होती है तो दर्शक बेरोक इसे देखना पसन्द करते हैं। इस फिल्म के संवादों ने जन-जन में अपनी पैठ बनाई। उस वक्त का दौर ऐसा था जब हर बच्चा, हर जवान, यहाँ तक कि हर बुर्जुग की जबान पर ‘कितने आदमी थे’, ‘तेरा क्या होगा कालिया’, ‘पहले नमक खाया, ले अब गोली खा’, ‘कब-कब है होली’, ‘अरे ओ सांभा’ और ‘ये हाथ नहीं फांसी का फंदा है गब्बर’ या ‘ये हाथ हमको दे दे ठाकुर. . .’ या फिर ‘चल धन्नो आज तेरी बसन्ती की इज्जत का सवाल है’। सलीम-जावेद की कलम से निकले ये ऐसे संवाद थे, जिनके बारे में कोई नहीं कह सकता था कि ये इतने प्रसिद्ध होंगे। यही हाल इस फिल्म के गीतों का था। शुरुआती दौर में इस फिल्म के गीतों को लोगों ने नकार दिया था लेकिन फिर दिन-ब-दिन गीतों ने श्रोताओं और दर्शकों को अपना दीवाना बनाया। इस फिल्म को फिल्माने में निर्देशक रमेश सिप्पी को ढाई साल का वक्त लगा था। बंगलौर के पास स्थित रामनगरम में फिल्मायी गई इस फिल्म में इसे ‘रामगढ़’ बताया गया था। वहां के लोग आज भी इसे रामनगरम के स्थान पर ‘रामगढ़’ कहते हैं। ‘शोले’ का हर किरदार फिल्म इतिहास में जीवित किंवदंती बन थे। विशेष रूप से ‘गब्बर सिंह’ का किरदार जितना कोई किरदार प्रसिद्ध नहीं हुआ। अमजद खान द्वारा अभिनीत यह किरदार उनकी बेजोड अदाकारी और संवाद अदायगी के बल पर अविस्मरणीय बन गया था। इस फिल्म से पहले अमजद खान ने हिन्दी फिल्म ‘हिन्दुस्तान की कसम’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में उनको सलीम खान के कहने पर लिया गया था, जो इस फिल्म के कथा-पटकथाकार थे। पहले यह भूमिका डैनी को सौंपी गई थी, लेकिन उन दिनों डैनी ‘धुंध’ और ‘खोटे सिक्के’ में व्यस्त होने के कारण इसे नहीं कर पाए। आज ‘गब्बर’ को देखकर महसूस होता है कि उनसे बढकर कोई और इस भूमिका को नहीं निभा सकता था। 27 जुलाई 1992 को सिर्फ 51 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहने वाले अजमद खान गब्बर सिंह की भूमिका निभाने के बाद रातों-रात शोहरत की बुलंदियों पर जा पहुंचे थे। उनके द्वारा बोले गए संवाद बच्चे-बच्चे की जुबान पर आज भी हैं। गांव-गांव और शहर-शहर सिर्फ गब्बर सिंह के ही चर्चे थे। कंधे पर कारतूस की पेटी लटकाए हुए वो तम्बाकू खाने का अनूठा अंदाज, खतरनाक ढंग से हंसते हुए अपने आदमियों से सवाल-जवाब और फिर गालियों और गोलियों की झड़ी। यही थी गब्बर सिंह की अदाएं। हिंदी सिनेमा के हरफनमौला अदाकार संजीव कुमार ने ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह का रोल किया था। उन्होंने ये भूमिका इतनी शिद्दत से निभाई थी कि आज भी ठाकुर का किरदार लोगों के जेहन में ताजा है। 6 नवंबर 1985 को सिर्फ 47 साल की उम्र में संजीव कुमार हम सबसे जुदा होकर बहुत दूर चले गए। बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर एके हंगल ने शोले में रहीम चाचा का किरदार निभाया था। ये भूमिका भले ही छोटी थी, लेकिन थी असरदार। इस किरदार को निभाने के बाद उनकी पॉपुलैरिटी में और भी इजाफा हो गया। पूरे करियर में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले एके हंगल 26 अगस्त 2012 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।   ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह के नौकर रामलाल की भूमिका निभाने वाले एक्टर सत्येन कप्पू आज हमारे बीच नहीं हैं। 27 अक्टूबर 2007 को मुंबई में उनका देहांत हो गया। सत्येन कप्पू ने रामलाल के किरदार को बड़े ही सहज ढंग से निभाया था।   अभिनेता केस्टो मुखर्जी ने फिल्म ‘शोले’ में जेल के नाई और जेलर के साथी हरिराम की भूमिका निभाई थी। भले ही ये भूमिका छोटी थी, लेकिन इसमें भी केस्टो मुखर्जी ने दर्शकों को गुदगुदाने पर मजबूर कर दिया था। परदे पर हर बार शराबी का किरदार निभाने वाले केस्टो मुखर्जी 1985 में इस दुनिया को अलविदा कह गए।     हिन्दी फिल्मों में स्थायी पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने वाले अभिनेता इफ्तिखार ने ‘शोले’ में जया भादुडी के पिता की छोटी सी भूमिका निभाई थी। लेकिन जितना रोल उन्हें मिला, उसके साथ उन्होंने इंसाफ किया। परदे पर नपे-तुले अंदाज में अदाकारी दिखाने वाले इफ्तिखार खान का 4 मार्च 1995 को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। वैसे तो ‘शोले’ का हर गीत सुपर हिट हुआ था। लेकिन इस फिल्म में जलाल आगा और हेलन पर फिल्माया गया आइटम गीत ‘मेहबूबा-मेहबूबा’ ने दर्शकों और श्रोताओं पर अपनी अलग ही छाप छोडी थी। आर.डी.बर्मन द्वारा गाए गए इस गीत का संगीत भी आर.डी.बर्मन ने ही दिया था। इस गाने में जलाल आगा हेलन के साथ डांस करते दिखाई देते हैं। फिल्म में स्पेशल अपीयरंस के रूप में होने के बाद भी दर्शकों का दिल जीतने वाले जलाल आगा 5 मार्च 1995 को इस दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए चले गए। यूं तो एक्टर मैकमोहन ने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें जो पॉपुलैरिटी ‘शोले’ ने दिलाई वो आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है। उन्होंने शोले में गब्बर सिंह के साथी ‘सांभा’ की भूमिका निभाई थी। ये भूमिका थी तो छोटी, लेकिन थी असरदार। इसमें उनके द्वारा बोला गया संवाद ‘पूरे पचास हजार’ भला कौन भूल सकता है। 10 मई 2010 को 72 साल की उम्र में मैकमोहन ने आखिरी सांस ली।   एक्ट्रेस लीला मिश्रा आज भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन ‘शोले’ में उनके द्वारा निभाया गया मौसी का किरदार हम आज तक नहीं भूले हैं। जरा याद कीजिए मौसी का वो संवाद जब अमिताभ, धर्मेंद्र का रिश्ता लेकर मौसी के पास जाते हैं, तब मौसी कहती हैं- ‘भले ही सारी जिंदगी लडक़ी कुंवारी बैठी रहे, लेकिन मैं ऐसे आदमी से बसंती को नहीं ब्याहने वाली, सगी मौसी हूं कोई सौतेली मां नहीं।’ वहीं, फिल्म में धर्मेंद्र द्वारा टंकी पर चढक़र बोला गया संवाद ‘मौसी भी तैयार है, बसंती भी तैयार है, इसलिए मरना कैंसिल’ बार-बार लीला मिश्रा की याद दिलाता है। लीला मिश्रा 17 जनवरी 1988 को इस दुनिया को अलविदा कह गईं।            साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । देश के शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मंगलवार को मजबूती का रुख देखने को मिल रहा है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.50 बजे 27.98 अंकों की मजबूती के साथ 28,180.38 पर जबकि निफ्टी भी लगभग इसी समय 8.35 की बढ़त के साथ 8,680.50 पर कारोबार करते देखे गए। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 37.64 अंकों की मजबूती के साथ 28,190.04 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 1.9 अंकों की कमजोरी के साथ 8,670.25 पर खुला।             साभार-khaskhabar.com  

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रियो डी जनेरियो । भारत की स्टार महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु पदक की सम्भावनाओं को जिंदा रखते हुए सोमवार को यहां जारी 31वें ओलम्पिक खेलों के एकल मुकाबलों के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई।    विश्व चैम्पियनशिप में दो बार कांस्य जीत चुकीं सिंधु ने चीनी ताइपे की खिलाड़ी ताई जू यिंग को सीधे गेम में हराया। महिला वर्ग में भारत की एकमात्र उम्मीद सिंधु ने रियोसेंट्रो पवेलियन में आयोजित यह मैच 21-13, 21-15 से जीता। यह मैच 40 मिनट चला। सोमवार को हुए इस पहले ताई और सिंधु के बीच कुल छह मैच हुए थे, जिनमें से चार में ताई ने जीत हासिल की थी लेकिन अहम पड़ाव पर सिंधु ने बाजी मारते हुए भारत के लिए बैडमिंटन में पदक की उम्मीदें जिंदा रखीं। क्वार्टर फाइनल में हालांकि जीत के लिए सिंधु को अपना पूरा दमखम लगाना होगा क्योंकि सामना चीन की यिहान वांग से होगा, जो लंदन ओलम्पिक में एकल वर्ग का रजत जीत चुकी हैं। साथ ही वह एशियाई चैम्पियन भी हैं और 2011 विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण हासिल कर चुकी हैं। दुनिया की नम्बर-2 खिलाड़ी वांग से होने वाले अपने अगले मुकाबले को लेकर सिंधु ने कहा, मैं हर चीज को लेकर चौकन्नी थी। मैं किसी एक खास रणनीति के तहत नहीं खेल रही थी। मेरा अगल मैच वांग के खिलाफ है और मुझे हर लिहाज से चौकन्ना रहना होगा। वैसे मुझे उम्मीद है कि मैं वांग को हराने में सफल होऊंगी। सिंधु ने यह भी कहा कि वांग के खिलाफ वह अपना बेहतरीन खेल दिखाएंगी। वांग से कैसे भिडऩा है, इस सम्बंध में मैं अपने कोच से विचार-विमर्श करूंगी। मैंने वांग के खिलाफ काफी खेला है लेकिन अंतिम मैच हुए काफी अरसा गुजर गया है।             साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । ओडिशा सरकार के मंत्री और बीजू जनता दल (बीजेडी) के वरिष्ठ नेता योगेंद्र बेहरा का सोमवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर रौब-ताव देखने को मिला। इस मौके पर मंत्रीजी ने हजारों की भीड़ के सामने अपने सुरक्षा अधिकारी से सैंडल के फीते बंधवाए, और ऐसा करवाने में उन्हें कुछ गलत भी नहीं लगा। इसके पीछे उनका तर्क था, ‘वह वीवीआईपी हैं और उन्होंने यहां झंडा फहराया है।’   बीजेडी नेता योगेंद्र बेहरा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कोएनझार जिले में एक कार्यक्रम में तिरंगा फहराने के लिए आए थे। इस दौरान उनके पर्सनल सिक्योरिटी अफसर (पीएसओ) ने सैंडल के फीते बांधे। जब यह सब चल रहा था, वह हजारों लोग मौजूद थे और सैकड़ों टीवी चैनल्स भी अपने कैमरे में यह सब कैद कर रहे थे। बेहरा से जब इस बाबत सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘मैं एक वीवीआईपी हूं और मैंने तिरंगा फहराया है। सुरक्षा अधिकारियों ने मुझे सैंडल पहनाया था।’ बाद में मामले नेतूल पकड़ा तो मंत्रीजी ने सफाई में कहा, ‘उनके घुटने में कुछ समस्या है इसलिए सुरक्षा अधिकारियों के सैंडल पहनाने में कोई बुराई नहीं थी, सुरक्षा अधिकारी ऐसा कर उनकी मदद कर रहे थे।’ दूसरी ओर, मंत्रीजी की पार्टी बीजेडी के प्रवक्ता सज्जन शर्मा ने इस घटना का ‘शर्मनाक’ बताया। उन्होंने कहा, ‘यह घटना शर्मनाक है। नवीन पटनायक की सरकार में सरकारी स्टाफ और पर्सनल स्टाफ में कोई अंतर ही नहीं रह गया है। ओडिशा सरकार के मंत्रियों को लगता है कि ओडिशा उनकी जागीर है।’             साभार-khaskhabar.com  

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बीजिंग ।  चीन ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के विरोध को दरकिनार करते हुए कहा है कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अपने इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट ‘सीपैक’ को हर हाल में पूर्ण करेगा। शनिवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के भारत दौरे पर सुषमा स्वराज ने इस आर्थिक गलियारे को लेकर भारत की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया था। चीन के अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा है,‘चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपैक) पर भारत के विरोध की वजह से चीन इस प्रोजेक्ट को नहीं रोकेगा। मंगलवार को छपे कॉलम में लिखा गया है कि भारत को इकोनॉमिक कॉरिडोर योजना को लेकर उदार रवैया अपनाना चाहिए, क्योंकि इस योजना से विकास में तेजी आएगी और स्थानीय लोगों को फायदा मिलेगा। कॉलम में लिखा गया है कि अगर चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग से संबंधित क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार होता है तो इससे भारत के लिए मध्य एशिया में व्यापार के रास्ते खुलेंगे।   46 अरब डॉलर की लागत से बन रहा है कॉरिडोर  चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से चीन के शिनझियांग को जोडऩे वाले कॉरिडोर की योजना है। यह कॉरिडोर ग्वादर से शुरू होकर काशगर तक जाएगा। अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान प्रवेश द्वार का काम करेगा। चीन इस क्षेत्र में औद्योगिक पार्क, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, रेलवे लाइन और सडक़ें बना रहा है। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में कराकोरम हाईवे का विस्तार चीन के अशांत रहने वाले शिंजिआंग सूबे तक किया जाएगा। इससे घाटी तक चीन को मुक्त और ट्रेन से तेज रफ्तार पहुंच मिलेगी। गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों तक रेलवे लाइन और सडक़ों का काम पूरा हो जाने पर ग्वादर, पासनी और ओरमारा में चीन निर्मित नौसेना बेस के रास्ते आने वाले चीनी कार्गो को पाकिस्तान पहुंचने में सिर्फ 48 घंटे लगेंगे। अभी इसमें 16 से 25 दिन का समय लगता है।            साभार-khaskhabar.com  

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मथुरा। स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर रतनलाल फूल कटोरी देवी स्कूल के बच्चों ने भारत के नक्शे आकृति उकेर कर शहीदों को नमन किया। ज्ञानदीप शिक्षा भारती गोवर्धन रोड पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झण्डा रोहण प्रातः 8ः59 बजे होगा। आज सोमवार प्रातः 6 बजे शहर काॅग्रेस कार्यालय होलीगेट से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रभात फेरी शुभारम्भ होकर कोतवाली रोड, भरतपुर गेट, चैक बाजार, छत्ता बाजार होते हुए शहर काॅग्रेस कार्यालय पहुॅचकर ध्वजा रोहण कार्यक्रम होगा। यह जानकारी आबिद हुसैन ने दी। वहीं स्वतंत्रता दिवस पर यमुना मिशन कैम्प कार्यालय यमुना मिशन मार्ग पर ध्वजारोहण वरिष्ठ अधिवक्ता व बृज केसरी पलवानों के सानिध्य में 15 अगस्त सोमवार को सुबह 10 बजे मनाया जायेगा। मिशन के संयोजक पं. अनिल शर्मा ने कहा कि सभी यमुना भक्तों से समय पर उपस्थित होने का आग्रह किया है। शहर के प्रतिष्ठित गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम में उपस्थित होंगे। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी जावेगी व इस कार्यक्रम के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता तथा बृज केसरी पहवानों द्वारा यमुना मिशन मार्ग पर वृक्षारोपण भी किया जावेगा। वहीं यमुना मिशन द्वारा साप्ताहिक फेसबुक लाईक प्रतियोगिता कराई गई जिसमें सफल विजेता रहे प्रतिभागियों के द्वारा यमुना मिशन मार्ग पर स्वतंत्रता दिवस पर वृक्षारोपण कराया जायेगा। मिशन के संयोजक पं. अनिल शर्मा ने सभी विजेता प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामना दी तथा उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से युवा वर्ग में नई चेतना का संचार होता रहेगा और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा, यमुना मिशन उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है। 

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