मथुरा

नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के एक विवादित ट्वीट पर सियासी जगत में बवाल हो गया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने अपने नेता राजीव गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए उनकी उस टिप्पणी को ट्वीट कर दिया जो राजीव गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत के बाद दी थी। इसमें उन्होंने कहा था, ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है।’ हालांकि बवाल होने के बाद इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया। बता दें कि राजीव गांधी ने अपनी मां और देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भडक़े सिख दंगों के संबंध में यह बयान दिया था। इस टिप्पणी को लेकर राजीव गांधी की आलोचना की जाती रही है। राजीव गांधी का यह बयान कई किताबों में भी उद्धृत हुआ है, जो सिख दंगों के विरोध में लिखी गई है। इस बयान पर राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। भाजपा ने इस ट्वीट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर लोगों के जख्म को कुरेदने का काम किया है। पंजाब में डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के सलाहकार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस पर हमला किया है। ट्वीट को मुद्दा बनाते हुए सिरसा ने कहा कि यह बयान 1984 में सिखों के भयानक नरसंहार के बाद राजीव गांधी ने दिया था और आज फिर इसे ट्विटर पर कांग्रेस ने दोहराया है।                 साभार-khaskhabar.com  

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अभिनेत्री रवीना टंडन को बच्चियों के सशक्तिकरण की दिशा में उनके योगदान के लिए सैन फ्रांसिस्को के सिलिकॉन वैली में आयोजित फेस्टिवल ऑफ ग्लोब (एफओजी) में सम्मानित किया गया। एफओजी एक वार्षिक आयोजन है, जिसे फिल्म कला, प्रदर्शन कला, दृश्यव्य कला और लोक कला के माध्यम से वैश्विक संस्कृतियों और समुदायों को सशक्त व एकीकृत करने लिए आयोजित किया जाता है। अभिनेत्री, निर्माता, स्तंभकार और पूर्व मॉडल, रवीना ने 21 साल की उम्र में दो लड़कियों को गोद लिया था। वह मातृत्व और महिलाओं के अधिकारों के साथ जुड़ी कई पहलों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। रवीना ने कहा, ‘इस प्रकार के पुरस्कार से मुझे बहुत खुशी होती है। मुझे गर्व है कि मैं फेस्टिवल ऑफ ग्लोब के साथ यौन अपराधों के खिलाफ उनकी लड़ाई और युवाओं को सशक्त बनाने के अभियान में उनके साथ जुड़ सकी हूं।’ रवीना की अगली फिल्म अस्तर सैयद की ‘द मदर’ है, जिसका लेखन और निर्माण माइकल पेलिको ने किया है।        साभार-khaskhabar.com  

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रियो डी जनेरियो । भारत की युवा महिला गोल्फ खिलाड़ी अदिति अशोक रियो ओलम्पिक खेलों में बुधवार को इतिहास रचने के इरादे से उतरेंगी। 18 वर्षीय अदिति ने जब से महिला यूरोपियन टूर (एलईटी) के क्वालीफाइंग फाइनल्स में फुल कार्ड जीता है तब से वे शानदार फॉर्म में हैं। इसके बाद उन्होंने बड़े टूर्नामेंटों में भी अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा है। अदिति स्पेन की कार्लोट सिगांडा और रूस की मारिया मेरचेनोवा के साथ खेलेंगी। ओलम्पिक खेलों के विशाल मंच पर उतरना किसी भी खिलाड़ी को दबाव में ला सकता है। अदिति के लिए बड़ी चुनौती इस वातावरण के साथ तालमेल बिठाने की होगी। अदिति ने 2013 में एशियन यूथ खेल और 2014 में हुए यूथ ओलम्पिक खेल में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसका अनुभव अदिति के काम आएगा। बेंगलुरु की रहने वाली अदिति ने 2016 में पेशेवर गोल्फ में कदम रखा था। वे पहली बार ओलम्पिक खेलों में हिस्सा ले रही हैं। अभी तक अदिति का सबसे मजबूत पक्ष उनकी निरंतरता रहा है। उन्होंने अभी तक 12 पेशेवर टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया है और 11 जगह वह कट पार करने में कामयाब रही हैं। उनके नाम छह अंतरराष्ट्रीय जीत, 17 खिताब दर्ज हैं। इन 17 खिताबों में पांच लो एमेच्योर खिताब शामिल हैं। वे कई बार शीर्ष 10 में भी रही हैं। वे एशिया की पहली खिलाड़ी हैं जिन्होंने 2015 में सेंट रूल ट्रॉफी और लॉसन ट्रॉफी अपने नाम की थी। वर्ष 2015 में अंतरराष्ट्रीय यूरोपियन लेडीज एमेच्योर चैम्पियनशिप में रजत पदक हासिल करने वाली वे पहली एशियाई खिलाड़ी थीं। वे पहली भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने लेडीज ब्रिटिश एमेच्योर ओपन स्ट्रोक प्ले चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 2015 में यह खिताब जीता था। इसी तरह के शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने ओलम्पिक में जगह बनाई है।        साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । महंगाई के मोर्चे पर केंद्र सरकार को एक और झटका लगा है। जुलाई में थोक महंगाई दर बढक़र 23 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई है। यह आंकडे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महंगाई कम रहने के दावे के बाद आए है। मंगलवार को जारी आंकडों के मुताबिक जुलाई में थोक मंहगाई दर बढक़र 3.55 फीसदी हो गई है। जून में थोक महंगाई दर 1.62 फीसदी रही थी।   मई की थोक महंगाई दर 0.79 फीसदी से संशोधित होकर 1.24 फीसदी हो गई है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 8.18 फीसदी से बढक़र 11.82 फीसदी हो गई है। जुलाई में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर दिसंबर 2013 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 5.5 फीसदी से बढक़र 9.38 फीसदी हो गई है।    महीने दर महीने आधार पर जुलाई में सब्जियों की चीजों की महंगाई दर 16.91 फीसदी से बढक़र 28.05 फीसदी हो गई है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में दालों की महंगाई दर 26.61 फीसदी से बढक़र 35.76 फीसदी हो गई है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में अनाजों की महंगाई दर 6.32 फीसदी से बढक़र 7.03 फीसदी हो गई है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में फलों की महंगाई दर 5.97 फीसदी से बढक़र 17.3 फीसदी हो गई है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में अंडे, मांस और मछली की महंगाई दर 6.67 फीसदी से बढक़र 7.49 फीसदी हो गई है।    महीने दर महीने आधार पर जुलाई में ईंधन की महंगाई दर -3.62 फीसदी से बढक़र -1 फीसदी रही है। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर 1.17 फीसदी से बढक़र 1.82 फीसदी हो गई है।         साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । राजभवन के नीचे था 150 साल पुराना खुफिया बंकर, गवर्नर ने खोजा मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने यहां मालाबार हिल स्थित राजभवन परिसर में अंग्रेजों के समय का 150 मीटर लंबे एक बंकर का पता लगाया है जो कई दशकों से बंद पड़ा था। इस बंकर में अंग्रेजों के शासनकाल में हथियार रखे जाते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद इस बंकर को देखने पहुंचे। राव अपनी पत्नी विनोधा के साथ बंकर देखने गए। इसके बाद राज्यपाल ने इसे संरक्षित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से मशविरा करने का अपना इरादा व्यक्त किया। राज्यपाल ने बंकर को तब खोलने का निर्देश दिया था जब तीन महीने पहले पुराने लोगों ने उन्हें राजभवन के भीतर एक सुरंग मौजूद होने के बारे में बताया था। अधिकारी ने एक बयान में कहा कि 12 अगस्त को राजभवन में लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने बंकर के प्रवेश को बंद करने वाली एक अस्थायी दीवार खोल दी। इसके बाद वहां एक भूमिगत सुरंग की बजाय विभिन्न आकार के 13 कमरों वाली एक पूरी बैरक का पता चला।          साभार-khaskhabar.com  

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वॉशिंगटन । पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक ने अपने ही देश को चौराहे पर खड़ा करते हुए कहा कि अशांत बलोचिस्तान के कई हिस्से ऐसे हैं जिन पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। उसका कहना है कि क्योंकि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे जटिल क्षेत्र है। अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने ‘द अटलांटा’ पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे जटिल क्षेत्र है और दुर्भाग्यवश लोग वहां समस्याओं को सरल करने की कोशिश करते हैं। यह पाकिस्तानी सेना की गलतियों या सत्ता में मौजूद लोगों के भ्रष्टाचार या राष्ट्रवादियों या तालिबान की मौजूदगी के बारे में ही नहीं है, यह इन सभी चीजों के बारे में है। हक्कानी ने कहा कि बलूचिस्तान के कई हिस्सों पर पाकिस्तान की केंद्र सरकार का नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि मूल निवासी बहुल बलूच हिस्सों में उन राष्ट्रवादियों के लिए बहुत सहानुभूति है जो एक स्वतंत्र या स्वायत्त बलूचिस्तान देखना चाहते हैं। हक्कानी ने कहा कि सेना उन्हें दबाने की कोशिश करती है और वह कई बार धार्मिक अतिवादियों की मदद से ऐसा करती है। हक्कानी ने कहा कि इसके अलावा प्रांत में चयनित सरकार को सार्थक जनादेश नहीं मिला, क्योंकि बलूच पार्टियों ने पिछले चुनाव का बहिष्कार कर दिया था और कई लोगों को 10, 12 प्रतिशत और कुछ स्थानों में 15 प्रतिशत मतदान के साथ चुना गया इसलिए अधिकतर बलूच इन राजनीतिक दलों को इस्लामाबाद की कठपुतलियों की तरह देखते हैं। उन्होंने बलूचिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि यह देश के निर्माण के समय की बात है जब भारत का मुस्लिम बहुल हिस्सा उससे अलग होकर पाकिस्तान बना था। हक्कानी ने कहा कि कुछ बलूच नेताओं का कहना है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान में जबरन शामिल किया गया था लेकिन इससे जरूरी बात, इसे नजरअंदाज किया जाना है। वह संसाधन समृद्ध प्रांत है लेकिन वहां के लोगों को इन संसाधनों का कोई लाभ नहीं मिलता।उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना के पास इस बात की स्पष्ट परिषाभा होनी चाहिए कि वह किसे शत्रु समझती है। उन्होंने कहा कि जिहादियों के किसी एक समूह को मदद देने और अन्यों के खिलाफ लडऩे के बजाए, उसे सभी जिहादियों और अतिवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने की आवश्यकता है। हक्कानी ने कहा कि उसे बलूच राष्ट्रवादियों के साथ सुलह प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता है। वे पाकिस्तान के ऐसे नागरिक हैं जिन्हें लगता है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है और इसलिए वे अशांत और नाखुश हैं। अधिक बलों की तैनाती से केवल हिंसा और बढ़ेगी, इससे यह खत्म नहीं होगी।           साभार-khaskhabar.com  

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