नई दिल्ली । चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शनिवार को पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की। वांग ने मोदी को चीन में जी-20 शिखर सम्मेलन में आने का न्योता दिया। वांग ने भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से 3 घंटे तक बातचीत की। दोनों देशों ने आपसी बातचीत के लिए 2 नई व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई। तय हुआ कि भारत के संयुक्त सचिव (निरस्त्रीकरण) अमनदीप गिल और चीन के मुख्य परमाणु मध्यस्थ वांग कुन की एनपीटी को लेकर आपस में बातचीत करेंगे। साथ ही भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष के बीच द्विपक्षीय रिश्तों पर भी वार्ता होगी। चीनी विदेशमंत्री के इस मौजूदा भारत दौरे के कार्यक्रम में ना तो एनएसजी पर चर्चा करना शामिल था और ना ही मसूद अजहर पर ही दोनों देशों में कोई बात होनी थी। इसके बावजूद सुषमा ने एनएसजी में चीन द्वारा एंट्री सहित जैश-ए-मुहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ वोट किए जाने का मसला उठाया। वहीं, वांग ने भी जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर मामले में चीन का विरोध करने की अपील की। इस दौरे के लिए वांग का मुख्य अजेंडा विकसित देशों द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर अपनाई जा रही रक्षात्मक नीति पर बात करने के साथ-साथ भारत और चीन के बीच निवेश बढ़ाने, बुनियादी ढांचा विकसित करने में सहयोग, वीजा की सरलता, सांस्कृति व पर्यटन संबंधी सहयोग और शैक्षिक व नागरिक जीवन के क्षेत्र में दोनों राष्ट्रों के बीच बातचीत का दायरा बढ़ाने जाने जैसे मुद्दों पर था। इससे उलट सुषमा स्वराज ने इस मुलाकात में उन मुद्दों को उठाया जो कि भारत के लिए काफी अहम हैं। सुषमा ने एनएसी सदस्यता पर चीन की आपत्ति के अलावा आतंकी मसूद अजहर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर चीन के विरोध को खासतौर पर चर्चा में शामिल किया। सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इन मसलों पर विस्तृत चर्चा को लेकर जोर दिया। मसूद अजहर के मसले पर चीन ने भारत को सलाह दी कि वह पाकिस्तान के साथ इसे सुलझाए। कूटनीतिक भाषा में कहें तो भारत ने चीन को साफ संकेत दिया कि वह अपने महत्वपूर्ण मुद्दों से नहीं हटेगा। साभार-khaskhabar.com
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