मथुरा

नई दिल्ली। भाजपा ने भारत-अमेरिका परमाणु करार का विरोध किया था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते इससे उलट इसकी तारीफ की और यहां तक कहा कि यह दोनों देशों की नई रणनीतिक साझेदारी में मुख्य बिंदु है। अब वह पिछली सरकार के दौरान बोई गई इस फसल की उपज एनएसजी और एमसीटीआर की सदस्यता के रूप में काटते दिख रहे हैं। अगर मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका को स्वीकार करें तो इस तरह वह स्टेट्समैनशिप दिखाएंगे।  सिंह ने अपनी सरकार से कहा था कि यह डील होनी चाहिए और उन्होंने इन उपलब्धियों की जमीन तैयार की थी। भारत-अमेरिका परमाणु करार कभी भी मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा के बारे में नहीं रहा, हालांकि इसे पेश इसी तरह किया गया। यह करार भारत को तकनीक मुहैया न कराने के सिस्टम से आजाद कराने के बारे में था। यह शिकंजा परमाणु परीक्षण करने के बाद भारत पर कसा गया था। अमेरिका ने इस संबंध में पहल की, क्योंकि वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन को रणनीतिक तौर पर जवाब देने लायक सिस्टम बनाना चाहता है।   अगर भारत टेक्नोलॉजी कंट्रोल करने वाली व्यवस्था में बंधक बना रहता तो ऐसी शक्ति के रूप में रणनीतिक क्षमता हासिल नहीं कर सकता, जिससे वह चीन के सामने एक भरोसेमंद चुनौती के रूप में खड़ा हो सके। अमेरिका ने इसे समझा है और भारत के राजनीतिक नेतृत्व ने भी। यही वजह है कि मनमोहन सिंह टेक्नोलॉजी कंट्रोल के शिकंजे से भारत को छुड़ाने के बुश प्रशासन के उत्साह से फायदा लेने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने उनकी सरकार को समर्थन दे रहे वाम दलों के विरोध की परवाह भी नहीं की थी। भाजपा में कुछ लोगों को पूरी तरह से पता था कि इस न्यूक्लियर डील के परिणाम क्या हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसका इस उम्मीद में विरोध किया कि इससे यूपीए सरकार को घेरा जा सकता है, क्योंकि वह पहले से ही वाम दलों के विरोध से परेशान थी। चीनी लोग भी इसके प्रभाव को जानते थे, लेकिन वे आक्रामक ढंग से कोई विरोध दर्ज नहीं करा पाए, क्योंकि अमेरिका ने तय कर लिया था कि वह इस मामले में भारत की मदद करेगा। प्रतिबंध से आजादी दिलाने का यह सहयोग न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफेरेशन ट्रीटी (एनपीटी) पर दस्तखत न करने वाले भारत को न्यूक्लियर क्लब की सदस्यता दिलाने के लिए जरूरी था। इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील ने भारत के लिए चार टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम्स यानी न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप, मिसाइल कंट्रोल टेक्नोलॉजी रिजीम, ऑस्ट्रेलियन ग्रुप और वासेनार अरेंजमेंट की मेंबरशिप की राह पर बढऩे का रास्ता खोला था। हालांकि यूपीए-2 के लडख़ड़ाने और वैश्विक समुदाय के 2008 के आर्थिक संकट से उबरने में संघर्ष करते रहने के कारण मेंबरशिप का प्रोसेस पूरा नहीं हो सका। जिम्मा इंडियन डिप्लोमेसी पर है कि वह इस प्रक्रिया को पूरा करे।  एमटीसीआर की मेंबरशिप तो हाथ में आने वाली है और एनएसजी मेंबरशिप की राह में अकेले चीन ही बाधा है। हालांकि चीन की बाधा बड़ी साबित नहीं होगी, क्योंकि भारत को प्रमुख महाशक्तियों का एकमत से समर्थन हासिल है। वहीं पाकिस्तान को भारत के बराबर दर्जा देने की चीन की दलील में भी विश्व को कोई दम नहीं दिख रहा है। एनएसजी और एमटीसीआर की मेंबरशिप मिल जाने पर वासेनार अरेंजमेंट और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप का मामला अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा। तब भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह और अमेरिका के तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री स्ट्रॉब टॉलबोट के बीच कई दौर की जो वार्ताएं हुई थीं, वे अपने तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचेंगी। हालांकि इससे अमेरिका को कुछ निराशा हो सकती है। साभार-khaskhabar.com

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तिरुवनंतपुरम । मुक्केबाज मोहम्मद अली के निधन पर विवादास्पद बयान देने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे केरल के खेल मंत्री ई.पी. जयराजन एक बार फिर मुसीबत में पड़ गए हैं। भारत की पूर्व ओलम्पिक महिला खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज ने गुरुवार को उन पर बुरे व्यवहार का आरोप लगाया है।  केरल खेल परिषद की अध्यक्ष जॉर्ज ने मीडिया को बताया कि बैठक में मंत्री का व्यवहार काफी बुरा था।  जॉर्ज ने बताया, ‘‘जब मैं उनसे मिलने गई तो उन्होंने कहा कि परिषद में कोई भी खेल से जुड़ा व्यक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां भ्रष्टाचार बहुत था और परिषद में नियुक्ति और स्थानांतरण सही तरीक से नहीं हुए।’’ उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से की, जिन्होंने यह कहते हुए इस बात को नकार दिया कि  ऐसी कोई घटना बैठक में नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया,‘‘ यह सही है कि जॉर्ज जयराजन से मिली थीं। उन्होंने परिषद के अध्यक्ष से उनके द्वारा ली जाने वाली यातायात सुविधा के बारे में पूछा था। इसमें गलत क्या है? जॉर्ज ने किसी तरह की कोई शिकायत नहीं की है। हम खेल से जुड़े लोगों के साथ राजनीति नहीं करते।’’ जॉर्ज 2003 में पेरिस में हुई विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में पदक  जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी थीं। 2002 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित जॉर्ज ने राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और विश्व चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्तव किया है। जॉर्ज को ओमान चांडी की सरकार ने परिषद का अध्यक्ष बनाया था। जयराजन ने हालांकि इस विवाद को खारिज कर दिया।  उन्होंने कहा, ‘‘वह मुझसे मिली थीं और हमने कई मुद्दों पर चर्चा की। वह एक खुश इंसान की तरह बैठक से बाहर गई थीं।’’ राज्य के पूर्व खेल मंत्री तिरुवानचोर राधाकृष्णनन ने जयराजन की आलोचना की है।  उन्होंने कहा, ‘‘खेल से जुड़े लोगों को राजनीति की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम ऊंचा किया है। जॉर्ज के प्रति उनका व्यवहार इस तरह का नहीं होना चाहिए।’’ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष कुम्मानेन राजशेखरन ने कहा कि मंत्री को अपने व्यवहार के लिए माफी मांगनी चाहिए।  साभार-khaskhabar.com

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मुंबई । देश के शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में शुक्रवार को गिरावट का रुख बना हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.38 बजे 35.14 अंकों की कमजोरी के साथ 26,728.32 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 7.75 अंकों की कमजोरी के साथ 8,195.85 पर कारोबार करते देखे गए।   बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 21.2 अंकों की कमजोरी के साथ 26,742.26 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 23.35 अंकों की गिरावट के साथ 8,180.25 पर खुला।   साभार-khaskhabar.com

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मेक्सिको सिटी । चार देशों का दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार सुबह मेक्सिको पहुंचे। मोदी ने मैक्सिकन राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त बयान जारी किया। पीएम मोदी ने बताया कि एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर मैक्सिको ने भी अपना समर्थन दिया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैक्सिको का शुक्रिया अदा किया। भारत और मैक्सिको अब नए क्षेत्रों में साथ आगे बढऩे जा रहे हैं। आपको बात दें कि मोदी के इस दौरे के जरिए मेक्सिको 30 साल बाद भारत के एजेंडे पर आ गया। 1986 में राजीव गांधी यहां आए थे। उनके बाद 2012 में मनमोहन सिंह भी यहां पहुंचे थे लेकिन तब उनका दौरा जी20 समिट के लिए हुआ था।  मोदी गुरुवार तडके 5 बजे मेक्सिको सिटी पहुंचे। यहां विदेश मंत्री क्लॉडियो मैसियू ने पीएम को स्वागत किया। मोदी के पहुंचने से पहले इंडियन कम्युनिटी के लोग एयरपोर्ट के बाहर जमा थे। उन्होंने मोदी-मोदी और भारत माता की जय के नारे लगाए। मेक्सिको के प्रेसिडेंट ने कहा कि हम एनएसजी में भारत की मेंबरशिप का पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव सपोर्ट करते हैं। इस पर मोदी ने कहा- एनएसजी की मेंबरशिप में हमारी दावेदारी और इंटरनेशनल सोलर अलायंस में हमारे सपोर्ट के लिए शुक्रिया। मोदी अमेरिका और स्विट्जरलैंड का सपोर्ट पहले ही हासिल कर चुके हैं। मेक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो के साथ मीटिंग के दौरान मोदी के एजेंडे में सबसे ऊपर रहा- न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के लिए सपोर्ट हासिल करना। भारत-मेक्सिको के बीच ट्रेड 6 अरब डॉलर का है। एशिया में मेक्सिको के लिए भारत सबसे बड़ा क्रूड ऑयल इम्पोर्टर है। वहीं, भारत से फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और ऑटो पार्ट्स मेक्सिको में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। भारत मेक्सिको में सबसे बड़ा इन्वेस्टर है। मोदी ने लैटिन अमेरिकी लैंग्वेज में अपनी स्पीच की शुरुआत की और कहा बहुत-बहुत शुक्रिया मिस्टर प्रेसिडेंट। मोदी ने कहा- हम दो साल में तीसरी बार मिल रहे हैं। यह हमारी दोस्ती की सही तस्वीर बताता है। हम स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को अपग्रेड करने के लिए हमारे रिश्ते मजबूत से आगे बढ़ाने का रोडमैप बनाने पर रजामंद हुए हैं। आजादी के बाद भारत को मान्यता देने वाला मेक्सिको पहला लैटिन अमेरिकी देश था। हमें एग्रीकल्चरल रिसर्च, बायो टेक्नोलॉजी, वेस्ट मैनेजमेंट, डिजास्टर वॉर्निंग और सोलर एनर्जी के सेक्टर में अपने प्रोजेक्ट्स की प्रायोरिटी तय करनी होगी।  हम बायर-सेलर रिलेशनिशप से आगे जाना चाहते हैं। आईटी, एनर्जी, फार्मा और ऑटोमोटिव हमारी ग्रोथ के बड़े सेक्टर्स हैं।   साभार-khaskhabar.com

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इस्लामाबाद । परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए अमेरिका का भारत को समर्थन मिलने से पाकिस्तान तिलमिला गया है। आनन-फानन में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सदस्यता पर समर्थन के लिए एनएसजी देशों के राजनयिक मिशन को अपनी बात समझाने के लिए बुलाया। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में इन देशों से कहा कि भारत को एनएसजी सदस्यता मिलना दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थायित्व पर नकारात्मक असर डालेगा। इस बीच, पाकिस्तान प्रधानमंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने तीन देशों के विदेश मंत्रियों से बात कर एनएसजी सदस्यता के मुद्दे पर समर्थन की बात कही। पाकिस्तान के शीर्ष विदेश सलाहकार ने कहा है कि 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के भारत के प्रयास को रोकने के लिए पाकिस्तान प्रभावशाली ढंग से लगातार प्रयास कर रहा है। सरताज अजीज ने पाकिस्तान की सीनेट में कहा, गैर भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण के लिए पाकिस्तान का प्रयास फलीभूत होगा। अजीज का यह बयान भारत के एनएसजी में शामिल होने के प्रयास और इस दिशा में देश को अमेरिका, स्विट्जरलैंड और मैक्सिको से मिले समर्थन के बाद आया है।  अजीज पाकिस्तानी सीनेटरों की ‘भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती मिलीभगत’ को लेकर चिंता और उनकी इस आशंका का जवाब दे रहे थे कि एनएसजी सदस्य देश भारत के इसमें शामिल होने के आग्रह का सकारात्मक जवाब देंगे। भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन किया है, जिससे दोनों देशों को परमाणु व्यापार में शामिल होने की अनुमति मिलेगी। सीनेट की सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क्यू के सीनेटर मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा कि एनएसजी सदस्य समूह में शामिल होने के भारत के आग्रह पर विचार कर रहे होंगे।   भारत की वजह से रुक सकती है पाक की एंट्री  सैयद ने यह आरोप लगाया कि पाकिस्तान की कूटनीति ‘असफल’ हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर भारत एनएसजी का सदस्य बन जाएगा तो वह पाकिस्तान को समूह में शामिल होने से रोकने में सफल हो जाएगा। उन्होंने कहा, हमने ईरान और अफगानिस्तान को अलग-थलग कर दिया है और दोनों देश अब भारत के साथ अपने आर्थिक संबंध बेहतर कर रहे हैं।   अमेरिका, स्विट्जरलैंड और मैक्सिको के समर्थन के बाद माना जा रहा है कि भारत एनएसजी सदस्यता हासिल कर लेगा। पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ की खबर के मुताबिक, अजीज ने रूस, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की। अजीज ने तीनों देशों के विदेश मंत्रियों से एनएसजी सदस्यता के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने की बात कही। पाकिस्तान विदेश विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, अजीज की तीन देशों से बातचीत को पाकिस्तान का कूटनीतिक प्रयास माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा, अजीज ने सदस्यता के लिए पाकिस्तान के मजबूत दावे का जिक्र किया।   अपनी सदस्यता के लिए पाक ने अपने दावे मे कहा-  एनएसजी देशों के साथ ब्रीफिंग सेशन में पाक विदेश विभाग में संयुक्त राष्ट्र डेस्क की हेड तस्नीम असलम ने कहा, हमारे पास विशेषज्ञता के अलावा मानव शक्ति, इन्फ्रास्ट्रक्चर और एनएसजी मानकों के तहत कंट्रोल्ड एटॉमिक आइटम और सर्विस देने की क्षमता है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के पास शांति कार्यों के लिए पर्याप्त न्यक्लियर सामान मौजूद है। तस्नीम ने कहा, मैं ब्रीफिंग में आए सभी डिप्लोमेट्स से अपील करती हूं कि वे एनएसजी सदस्यता के मुद्दे पर नॉन-एनपीटी मुल्कों को समर्थन करने के लिए भेदभाव न करें।   चीन कर रहा लगातार विरोध  बता दें कि चीन की आड़ लेकर पाकिस्तान भारत की एनएसजी में एंट्री का विरोध कर रहा है। पाकिस्तान और चीन का तर्क है कि बिना नॉन-प्रोलिफिकेशन ट्रीटी (परमाणु अप्रसार संधि-एनपीटी) पर हस्ताक्षर किए बिना भारत कैसे एनएसजी की सदस्यता हासिल कर सकता है? अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी हाल ही अपने संपादकीय में लिखा था, भारत तब तक एनएसजी सदस्यता पाने का हकदार नहीं होगा, जब तक वह सभी मानकों पर खरा नहीं उतर जाता।   चीन के विरोध के बावजूद मिल सकती है एनएसजी सदस्यता  माना जा रहा है कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड और मैक्सिको के समर्थन के बाद भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल सकती है। वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों नेता भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में एंट्री को बेहतरी के रूप में देखते हैं। राष्ट्रपति ओबामा एनएसजी सदस्यता को लेकर भारत के आवेदन का स्वागत करते हैं। अमेरिका इस बात को दोबारा साफ करता है कि भारत सदस्यता के लिए तैयार है। हम दूसरे देशों से भी अपील करते हैं कि इस महीने होने वाली एनएसजी प्लेनरी की मीटिंग में वे भारत का समर्थन करें।   खुद पर खतरे का आकलन कर रहा पाकिस्तान अजीज ने जोर देकर कहा कि देश के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भारतीय परमाणु सिद्धांत से देश की सुरक्षा को उत्पन्न रणनीतिक खतरे का आकलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमित स्रोतों के बावजूद पाकिस्तान ने एक मजबूत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली विकसित की है। अजीज ने कहा कि पाकिस्तान हिंद महासागर को परमाणुकृत करने की भारत की योजना के ‘खतरनाक निहितार्थ’ को भी उजागर करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंद महासागर को परमाणु मुक्त घोषित करने का प्रस्ताव पेश करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।    साभार-khaskhabar.com

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मुंबई । देश के शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में गुरुवार को गिरावट का रुख बना हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.37 बजे 71.47 अंकों की गिरावट के साथ 26,949.19 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 18.70 अंकों की कमजोरी के साथ 8,254.35 पर कारोबार करते देखे गए।   बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 26.18 अंकों की गिरावट के साथ 26,994.48 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.3 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 8,273.35 पर खुला।  साभार-khaskhabar.com

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