नई दिल्ली । पांच देशों के दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्विट्जरलैंड के बाद अमेरिका में भी बडी सफलता हाथ लगी है। उनकी यह अमेरिका यात्रा भारत के नाम एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गई। भारत अब मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर) के सदस्य देशों में शामिल हो गया है। भारत इसका 35वां सदस्य होगा। इसके मायने ये हुए कि भारत अब आसानी से आधुनिक मिसाइल से लेकर खतरनाक ड्रोन तक सदस्य देशों से खरीद सकेगा। इससे अब भारतीय सेना बेहद मजबूत हो जाएगी।
भारत को अनोखे तरीके से एमटीसीआर में एंट्री मिली। एमटीसीआर के सदस्य देशों को इस समूह में भारत के शामिल होने के आवेदन के खिलाफ सोमवार 6 जून, 2016 तक आपत्ति दर्ज करानी थी, लेकिन 34 सदस्यों में से किसी की ओर से भी ऐसा न करने पर भारत इस ग्रुप में शामिल माना जा रहा है। अब एमटीसीआर में भारत के सदस्य होने की घोषणा केवल औपचारिकता ही है। एमटीसीआर ने भारत को भी इस एलिट ग्रुप में शामिल करने की सहमति दे दी है। भारत को अब अन्य विकसित देशों की तरह ही आधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी मिल जाएगी।
अमेरिकी प्रशासन ने भी कहा है कि इस प्रतिष्ठित संधि में भारत के शामिल होने की घोषणा कभी भी हो सकती है। अमेरिका की सहायक विदेश मंत्री (साउथ और सेंट्रल एशिया) निशा बिस्वाल ने कहा, एनटीसीआर सदस्यों ने कहा है कि भारत इस ग्रुप में आने की शर्तें पूरी करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो भारत की एनएसजी दावेदारी का भी जोरदार समर्थन किया है। भारत परमाणु और मिसाइल तकनीकी के हस्तांतरण और नियंत्रण से जुडे चार अहम समूहों में शामिल होने की कोशिश पिछले एक दशक से कर रहा है, जिसमें एनएसजी और एमटीसीआर अहम ग्रुप हैं।
जब आरत के एमटीसीआर में शामिल होने की खबर आई, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पीएम मोदी व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय वार्ता कर रहे थे। यह भारत के लिए बडी सफलता है, क्योंकि इस माह परमाणु तकनीकी के हस्तांतरण से जुडे समझौते एनएसजी के लिए होने वाली वोटिंग से उम्मीदें बढ गई हैं।
भारत के लिए क्यों है बडी सफलता और क्या होगा फायदा ! एमटीसीआर की स्थापना 1987 में हुई थी। इसका मकसद बैलिस्टिक मिसाइल और दूसरे मानवरहित डिलिवरी सिस्टम के प्रसार को सीमित करना था, जिसका इस्तेमाल रासायकिन, जैविक परमाणु हमलों में हो सकता है।
- इस ग्रुप में दुनिया के प्रमुख मिसाइल निर्माता देश हैं। इसका मकसद 500 किलो वजन ले जाने वाले और कम से कम 300 किमी दूरी तक मार करने वाले मिसाइल के निर्यात या किसी तरह के व्यापक नरसंहार के हथियारों की डिलिवरी पर अंकुश लगाना है। इसके सदस्य देशों को बैलिस्टिक मिसाइल से संबंधित निर्यात नियंत्रण नीति लागू करनी होती है।
- भारत अब हाई-एंड मिसाइल तकनीक और निर्मित हो रहे ड्रोन खरीद सकता है।
- रूस के साथ मिलकर भारत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ का निर्माण भई करता है। अब इसे अन्य देशों को बेचने की उम्मीद की जा सकती है।
- एमटीसीआर में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, रूस, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और कनाडा जैसे 34 अहम देश शामिल हैं। भारत अब इसका 35वां सदस्य होगा। इस ग्रुप में चीन की भी एंट्री नहीं है।
- एनटीसीआर में एंट्री से भारत का प्रेडेंटर जैसे निगरानी ड्रोन खरीदने का सपना पूरा हो जाएगा।
- एनटीसीआर के सदस्य देश ही एनएसजी के कोर ग्रुप के सदस्य हैं। इस तरह से एमटीसीआर में भारत की एंट्री से एनएसजी के लिए भारत एक कदम और आगे बढ गया है।
- भारत ने वेस्ंिटगहाउस के 6 परमाणु रिएक्टर (एपी-1000) पर काम शुरू करने का वादा किया है।
- एमटीसीआर में आने पर किसी देश को हथियार बेचने से पहले उसका मकसद और इच्छाओं को ध्यान में रखना होगा।
- भारत के इस प्रभावशाली देशों के इस ग्रुप में शामिल होने से भारत को सामरिक क्षेत्र में कई फायदे होंगे।
- इस उपबलब्धि के बाद भारत अमेरिका से 40 ड्रोन विमान खरीदेगा, जिससे भारतीय सेना पाकिस्तान और चीन की सीमा पर और पैनी नजर रख सकेगी। सिर्फ जमीन ही नहीं, समंदर में भी दुश्मन की निगरानी की जा सकेगी।
- भारतीय सेना के साथ-साथ नेवी के लिए भी यह काफी कारगर साबित होगा। ये ड्रोन 35 घंटे तक लगातार आसमान में चक्कर लगाते हुए समंदर पर नजर रखेंगे। ऐसे में जब चीन की समंदर में गतिविधियां तेज हो गई हैं, ऐसे पायलट रहित ये जहाज बेहद सहायक होंगे।
- सिर्फ नेवी ही नहीं, भारतीय वायु सेना के लिए भी एमटीसीआर किसी सौगात से कम नहीं है। अब इंडियन आर्मी अमेरिका से खतरनाक हथियारों से लैस 100 ड्रोन विमानों को खरीद सकेगा। ये वही विमान हैं जिनका अमेरिका इस समय उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इस्लामिक आतंकियों के खात्मे में इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन ये सभी ड्रोन हासिल करने के लिए पहले एनटीसीआर से क्लियरेंस मिलना जरूरी है। अब भारत के इस ग्रुप में शामिल होने से यह राह भी आसान हो जाएगी।
इस ग्रुप में शामिल होने के लिए भारत ने पिछले साल आवेदन किया था, लेकिन एमटीसीआर के कुछ सदस्य देशों ने इसका कड़ा विरोध किया। साल 2008 से भारत उन पांच देशों में से एक है जो एमटीसीआर का एकतरफा पालन कर रहे हैं।
साभार-khaskhabar.com
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