मथुरा

नई दिल्ली । वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के तूफानी बल्लेबाज लिंडल सिमंस ने विराट कोहली को घंमडी बताया है। उन्होने कहा टी-20 वल्र्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में विराट कोहली का घंमड तोडने के लिए मेने यह यादगार पारी खेली थी। इस मुकाबले में सिमंस ने 52 गेंदो पर 89 रन ठोके थे।   विराट के लिए ये बोले सिमंस क्रिकेट साइट को दिये साक्षात्कार में सिमंस ने कहा मैने अपने साथी खिलाडियों से कहा मै अपने आप को साबित कर दूगा केवल विराट अच्छे खिलाडी नही है। बल्लेबाजी के दौरान कोहली लगातार उन्हें उकसा रहे थे। परन्तु मैने संयम से बेंटिग कर टीम को जीत दिलाई थी। सिमंस ने कहा, वह कोहली ऐसा ही है। वह घमंडी है। मैदान पर बैटिंग के समय वह हमेशा अटैकिंग प्लान में रहता है।   वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐसे हारी टीम इंडिया टी-20 वल्र्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में वेस्टइंडीज के सलामी  सिमंस बैटिंग के लिए आए थे तो उस वक्त वेस्टइंडीज मुश्किल में था। 19 रन पर उसके दो विकेट गिर चुके थे। भारतीय टीम पहले बैटिंग करते हुए 192 रन का पहाड़ सा लक्ष्य खडा कर दिया था। फिर भी वेस्ट इंडीज ने भारतीय टीम को 7 विकेट से हराया था। जॉनसन चार्ल्स और आंद्रे रसेल ने भी अच्छी पारी खेली थी।    साभार-khaskhabar.com

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मुंबई । अभिनेता शक्ति कपूर ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी बेटी श्रद्धा कपूर और बेटा सिद्धांत कपूर बायोपिक हसीना में हसीना पार्कर और उसके भाई कुख्यात गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के किरदार में नजर आएंगे। अपनी फिल्म दिल साला सनकी के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर शक्ति कपूर ने कहा, वे दोनों हसीना में काम करेंगे।   गौरतलब है कि इस फिल्म में हसीना के किरदार के लिए अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा का नाम सामने आ रहा था लेकिन किसी कारणवश सोनाक्षी यह फिल्म नहीं पाई। अब हसीना का किरदार श्रद्धा कपूर करेंगी। इसमें असल जिंदगी की भाई-बहन की जोडी पर्दे पर भी भाई-बहन की भूमिका में नजर आएगी। श्रद्धा हसीना की भूमिका निभाएंगी, जबकि सिद्धांत दाऊद के किरदार में नजर आएंगे। खबरें हैं कि पहले सोनाक्षी सिन्हा को हसीना पार्कर की भूमिका के लिए चुना गया था, लेकिन उन्हें शायद तारीखों की समस्या के कारण फिल्म छोडनी पडी थी। फिल्म का निर्देशन शूटआउट एट लोखंडवाला से मशहूर हुए निर्देशक अपूर्व लखिया करेंगे। श्रद्धा फिलहाल ओके जानू की शूटिंग कर रही हैं। जल्द ही वह हॉफ गर्लफ्रेंड के साथ ही रॉक ऑन 2 की भी शूटिंग करेंगी। इन तीनों फिल्मों के बाद वह हसीना की शूटिंग कर सकती हैं। श्रद्धा को आखिरी बार बागी में देखा गया था और सिद्धांत जज्बा में दिखाई दिए थे।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी सेरेना विलियम्स पिछले कई सालों से टेनिस जगत पर राज कर रही हैं। 34 वर्षीय सेरेना अब तक महिला एकल वर्ग में 21 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुकी हैं और पूर्व जर्मन खिलाड़ी स्टेफी ग्राफ के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करने से सिर्फ एक कदम दूर हैं।    हालांकि वे इस साल दो बार यह मौका चूक गईं, जब उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन और फ्रेंच ओपन के फाइनल में हार का मुंह देखना पड़ गया। इसके बावजूद सेरेना फोब्र्स मैगजीन की सबसे अमीर महिला खिलाडिय़ों में शीर्ष पर पहुंच गई हैं। हाल ही फ्रेंच ओपन के फाइनल में स्पेन की गार्बाइन मुगुरुजा से हारने वाली सेरेना ने पिछले 12 महीने में 29.9 मिलियन डॉलर कमाए हैं।    उन्होंने 11 साल से कमाई के मामले में नंबर एक पोजिशन पर चल रहीं रूस की ग्लेमर गर्ल मारिया शारापोवा को पछाड़ा है। सेरेना ने अपने टेनिस करिअर के दौरान अब तक 77.6 मिलियन डॉलर कमाए, जो किसी भी अन्य महिला टेनिस खिलाड़ी की तुलना में दोगुनी रकम है।शारापोवा की कमाई पिछले साल 21.9 मिलियन डॉलर रही। अमेरिकी मिक्सड मार्शल आर्ट स्टार रोंडा राउसी इस सूची में तीसरे नंबर पर हैं। सेरेना इससे पहले फोब्र्स की इस लिस्ट में वर्ष 2004 में टॉप पर रही थीं। उनसे पहले लगातार पांच सालों के लिए नंबर वन पर उनकी बहन वीनस विलियम्स और मार्टिना हिंगिस का कब्जा रहा था।    शारापोवा ने 2004 का विंबलडन ग्रैंडस्लैम जीता और उसके बाद से वे लगातार शीर्ष पर बनी हुई थीं। इस साल शारापोवा ने मार्च में ड्रग टेस्ट में फेल होने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद लिए गए खून के नमूने में प्रतिबंधित मेलडोनियम की मात्रा पाई गई है।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कयासों के अनुकूल मौद्रिक नीति की द्वैमासिक समीक्षा पेश करते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का ऐलान किया। रेपो रेट बिना बदलाव के 6.50 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 6 फीसदी बरकरार रहेगी। आरबीआई ने सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है और ये 4 फीसदी पर कायम है। एमएसएफ यानी मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर भी 7 फीसदी पर बरकरार है। मौद्रिक समीक्षा के बाद आरबीआई वर्नर रघुराम राजन की मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अभी ब्याज दरों में बदलाव संभव नहीं है। हां, अगर मानसून अच्छा रहा तो दरों में कटौती की जाएगी। महंगाई की चिंता के कारण दरों में कटौती नहीं की गई है। राजन ने कहां कि अभी बैंकों में पूंजी डालने पर फोकस जरूरी है। राजन कहा कि कच्चे तेल के दामों में वृद्धि और 7वें वेतन आयोग कि सिफारिशें लागू होने से महंगाई बढऩे का जोखिम है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे थे कि महंगाई बढऩे के संकेतों और वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के बढ़ते दामों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रख सकता है। विशेषज्ञों का मानना था कि किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले आरबीआई चाहेगा कि वह पहले मॉनसून की दशा और दिशा को समझ ले। यहां बता दें कि मौसम विभाग ने पहले ही कहा है कि इस साल मॉनसून सामान्य या सामान्य से अधिक रहेगा। रिजर्व बैंक के गर्वनर रघुराम राजन नीतिगत दरों में कटौती करने के साथ-साथ बैंकों को उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए भी जोर देते आ रहे हैं। टारगेट है कि मार्च 2017 तक खुदरा मुद्रास्फीति की दर 5 फीसदी ले आए।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । पांच देशों के दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्विट्जरलैंड के बाद अमेरिका में भी बडी सफलता हाथ लगी है। उनकी यह अमेरिका यात्रा भारत के नाम एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गई। भारत अब मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर) के सदस्य देशों में शामिल हो गया है। भारत इसका 35वां सदस्य होगा। इसके मायने ये हुए कि भारत अब आसानी से आधुनिक मिसाइल से लेकर खतरनाक ड्रोन तक सदस्य देशों से खरीद सकेगा। इससे अब भारतीय सेना बेहद मजबूत हो जाएगी। भारत को अनोखे तरीके से एमटीसीआर में एंट्री मिली। एमटीसीआर के सदस्य देशों को इस समूह में भारत के शामिल होने के आवेदन के खिलाफ सोमवार 6 जून, 2016 तक आपत्ति दर्ज करानी थी, लेकिन 34 सदस्यों में से किसी की ओर से भी ऐसा न करने पर भारत इस ग्रुप में शामिल माना जा रहा है। अब एमटीसीआर में भारत के सदस्य होने की घोषणा केवल औपचारिकता ही है। एमटीसीआर ने भारत को भी इस एलिट ग्रुप में शामिल करने की सहमति दे दी है। भारत को अब अन्य विकसित देशों की तरह ही आधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी मिल जाएगी। अमेरिकी प्रशासन ने भी कहा है कि इस प्रतिष्ठित संधि में भारत के शामिल होने की घोषणा कभी भी हो सकती है। अमेरिका की सहायक विदेश मंत्री (साउथ और सेंट्रल एशिया) निशा बिस्वाल ने कहा, एनटीसीआर सदस्यों ने कहा है कि भारत इस ग्रुप में आने की शर्तें पूरी करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो भारत की एनएसजी दावेदारी का भी जोरदार समर्थन किया है। भारत परमाणु और मिसाइल तकनीकी के हस्तांतरण और नियंत्रण से जुडे चार अहम समूहों में शामिल होने की कोशिश पिछले एक दशक से कर रहा है, जिसमें एनएसजी और एमटीसीआर अहम ग्रुप हैं। जब आरत के एमटीसीआर में शामिल होने की खबर आई, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पीएम मोदी व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय वार्ता कर रहे थे। यह भारत के लिए बडी सफलता है, क्योंकि इस माह परमाणु तकनीकी के हस्तांतरण से जुडे समझौते एनएसजी के लिए होने वाली वोटिंग से उम्मीदें बढ गई हैं। भारत के लिए क्यों है बडी सफलता और क्या होगा फायदा ! एमटीसीआर की स्थापना 1987 में हुई थी। इसका मकसद बैलिस्टिक मिसाइल और दूसरे मानवरहित डिलिवरी सिस्टम के प्रसार को सीमित करना था, जिसका इस्तेमाल रासायकिन, जैविक परमाणु हमलों में हो सकता है। - इस ग्रुप में दुनिया के प्रमुख मिसाइल निर्माता देश हैं। इसका मकसद 500 किलो वजन ले जाने वाले  और कम से कम 300 किमी दूरी तक मार करने वाले मिसाइल के निर्यात या किसी तरह के व्यापक नरसंहार  के हथियारों की डिलिवरी पर अंकुश लगाना है। इसके सदस्य देशों को बैलिस्टिक मिसाइल से संबंधित निर्यात  नियंत्रण नीति लागू करनी होती है। -  भारत अब हाई-एंड मिसाइल तकनीक और निर्मित हो रहे ड्रोन खरीद सकता है। -  रूस के साथ मिलकर भारत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ का निर्माण भई करता है। अब इसे     अन्य देशों को बेचने की उम्मीद की जा सकती है। - एमटीसीआर में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, रूस, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और कनाडा जैसे 34 अहम   देश शामिल हैं। भारत अब इसका 35वां सदस्य होगा। इस ग्रुप में चीन की भी एंट्री नहीं है। -  एनटीसीआर में एंट्री से भारत का प्रेडेंटर जैसे निगरानी ड्रोन खरीदने का सपना पूरा हो जाएगा। -  एनटीसीआर के सदस्य देश ही एनएसजी के कोर ग्रुप के सदस्य हैं। इस तरह से एमटीसीआर में भारत की   एंट्री से एनएसजी के लिए भारत एक कदम और आगे बढ गया है। -  भारत ने वेस्ंिटगहाउस के 6 परमाणु रिएक्टर (एपी-1000) पर काम शुरू करने का वादा किया है। -  एमटीसीआर में आने पर किसी देश को हथियार बेचने से पहले उसका मकसद और इच्छाओं को ध्यान में    रखना होगा। - भारत के इस प्रभावशाली देशों के इस ग्रुप में शामिल होने से भारत को सामरिक क्षेत्र में कई फायदे होंगे। - इस उपबलब्धि के बाद भारत अमेरिका से 40 ड्रोन विमान खरीदेगा, जिससे भारतीय सेना पाकिस्तान और चीन की सीमा पर और पैनी नजर रख सकेगी। सिर्फ जमीन ही नहीं, समंदर में भी दुश्मन की निगरानी की जा सकेगी। - भारतीय सेना के साथ-साथ नेवी के लिए भी यह काफी कारगर साबित होगा। ये ड्रोन 35 घंटे तक लगातार आसमान में चक्कर लगाते हुए समंदर पर नजर रखेंगे। ऐसे में जब चीन की समंदर में गतिविधियां तेज हो गई हैं, ऐसे पायलट रहित ये जहाज बेहद सहायक होंगे। - सिर्फ नेवी ही नहीं, भारतीय वायु सेना के लिए भी एमटीसीआर किसी सौगात से कम नहीं है। अब इंडियन आर्मी अमेरिका से खतरनाक हथियारों से लैस 100 ड्रोन विमानों को खरीद सकेगा। ये वही विमान हैं जिनका अमेरिका इस समय उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इस्लामिक आतंकियों के खात्मे में इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन ये सभी ड्रोन हासिल करने के लिए पहले एनटीसीआर से क्लियरेंस मिलना जरूरी है। अब भारत के इस ग्रुप में शामिल होने से यह राह भी आसान हो जाएगी। इस ग्रुप में शामिल होने के लिए भारत ने पिछले साल आवेदन किया था, लेकिन एमटीसीआर के कुछ सदस्य देशों ने इसका कड़ा विरोध किया। साल 2008 से भारत उन पांच देशों में से एक है जो एमटीसीआर का एकतरफा पालन कर रहे हैं।   साभार-khaskhabar.com

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लखनऊ/मथुरा । मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा के बाद पुलिस का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। वहीं, थुरा हिंसा के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव को लेकर हर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को घटना स्थल से एक रॉकेट लॉन्चर मिला है। मेड इन यूएसए लिखे इस लॉन्चर पर jeffersonoh1044047 नंबर भी लिखा है। इस लॉन्चर के बरामद होने के बाद बी.डी.एस. टीम के प्रभारी राम पाल सिंह ने थाना सदर बाजार में मुकदमा अपराध संख्या 297/16 पर विस्फोटक अधिनियम की धारा 3/5 में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर लिया है। साथ ही छानबीन के दौरान पुलिस को यहां से भारी मात्रा में हथियार भी मिले थे।  दूसरी ओर खबर है कि अगर और दो महीने तक रामवृक्ष के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई नहीं होती तो उसकी संस्था को जवाहरबाग की 280 एकड़ जमीन कौडिय़ों के भाव 99 साल के लिए लीज पर मिलने वाली थी। गौरतलब है कि अवैध कब्जा करने वाले लोगों से हुई इस पुलिस मुठभेड़ में 29 लोग मारे गए थे।   बदली जांच  इधर, मथुरा कांड में डीएम, एसएसपी से लेकर डीजीपी, एडीजी एलओ और प्रमुख सचिव गृह तक की भूमिका पर सवाल उठे हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा कमिश्नर को जांच सौंपा जाना सवालों के घेरे में था। कमिश्नर से इन सब के खिलाफ जांच संभव नहीं थी। सरकार को ये भी अंदेशा है कि अगर मामले की सीबीआई से जांच करवाने के लिए लोग कोर्ट गए तो कमिश्नर से जांच करवाने पर सरकार कोर्ट में घिर सकती थी। इसलिए पेशबंदी के लिए न्यायिक जांच आयोग बना दिया गया। आयोग के बहाने सरकार को दो माह का समय भी मिल जाएगा। गौरतलब है कि मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा और दो अफसरों की शहादत के बाद बैकफुट पर आई प्रदेश सरकार ने छह दिन के अंदर तीसरी बार जांच बदल दी है। अब मुख्यमंत्री ने मामले की न्यायिक जांच करवाने के आदेश दिए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर जस्टिस मिर्जा इम्त्यिाज मुर्तजा की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया गया है। इस जांच आयोग का मुख्यालय लखनऊ में होगा।    साभार-khaskhabar.com

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