मथुरा

खुशबू और स्वाती ने प्रथम स्थान प्राप्त किया  मथुरा। बाल विकास समिति के तत्वाधान में रंगोली एवं महेंदी प्रतियोगिता का आयोजन कस्बा राया में किया गया, जिसमें विद्यालय के छात्राओं भाग लिया और प्रथम स्थान खुशबू ने प्राप्त किया। सादाबाद रोड पर स्थित मैरिज होम में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें महेंदी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कु खुशबू द्वितीय मीनू, तीसरा स्थान रिंकी ने प्राप्त किया वहीं रंगोली में प्रथम कु स्वाती, द्वितीय ताशु और तीसरा स्थान मुनेश ने प्राप्त किया। इस दौरान विजय छात्र छात्राओं को पुरूस्कार देकर सम्मानित किया गया इस अवसर पर पंकज शर्मा, नरेन्द्र उपाध्याय, श्रीमती गुंजन,सुशीला, देवरानी शर्मा, राजकुमारी, उमा गुप्ता आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे। 

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मथुरा।  अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति सौंख के तत्वावधान में आरक्षण की मांग को लेकर स्थानीय इंटर कालेज में धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसमें जाट आरक्षण के लिए राष्टपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार गोवर्धन अजय यादव को ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव वीरपाल सिंह व जिलाध्यक्ष भरत सिंह कुंतल ने कहा कि हरियाणा सरकार जाटों के साथ वादाखिलाफी कर रही है। केन्द्र सरकार ने पूर्व में जाटों को आरक्षण देने का वादा किया था लेकिन अब कोई पैरवी नहीं की जा रही है। इस मौके पर प्रोफेसर दुर्गपाल सिंह, विनोद सिंह, हेमराज सिंह कुंतल, नाहर सिंह, रामसिंह, सहदेव सिंह, हरदेव सिंह, वीरीसिंह, राजबहादुर सिंह, कप्तान सिंह, सुनील गावर, करन सिंह, महेन्द्र सिंह, भीम सिंह, देशराज सिंह, भोवल हवलदार, लच्छी सिंह, आदि उपस्थित थे।

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मथुरा। जिला पंचायत अध्यक्ष ममता चैधरी की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार में सम्पन्न सिंचाई बन्धु की बैठक में अपर आगरा खण्ड के नहरों की सफाई कार्य पर संतोष व्यक्त किया गया। साथ ही खण्ड के अधिशासी अभियन्ता द्वारा सभी रजवाहों की टेल फीडिंग हेतु 15 से 25 जून के मध्य मशीनों द्वारा सफाई कराने के आश्वासन पर सभी ने खुशी जाहिर की। पूर्व विधायक चै. लक्ष्मी नारायण एवं किसानों द्वारा धान फसल हेतु नहरों में पानी चलाये जाने की मॉग पर अधिशासी अभियंता ने आगामी 19 जून से लगातार तीन सप्ताह तक सभी रजवाहों को चलाये जाने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि शेरगढ़ से निकलने वाली माइनर की किसानों द्वारा तोड़ी टक्कर को बनवाया है जिसके रहते माइनर में पानी पहुॅचा और अब टेल तक पानी पहुॅचाने के प्रयास किये जा रहे हैं। ग्रामवासियों के मांग के क्रम में सिंचाई विभाग के अभियंता ने बताया कि खायरा से विजवाह नाले के टूटे पुल निर्माण के पूर्व सफाई के दौरान इसकी दोनो ओर पटरी ठीक करा दी जायेंगी। इसके अलावा बछगांव से छाता नाला एवं अन्य रजवाहों की सफाई सम्बन्धी उन्होंने जानकारी दी। चैधरी लक्ष्मी नारायण ने पैगॉव से निकले नाले के अलावा शेरगढ़ रजवाह पर 4 गांव के किसानों द्वारा पटरी काटे जाने और आगे किसानों की समस्या के कारण झगड़ों के मामले रखते हुए इनके समाधान की बात रखी जिस पर अधिशासी अभियंता ने कहा कि इस पर एक कुलावा लगवाया गया है, जरूरत होगी तो एक ओर लगवा देंगे किन्तु टूट फूट न हो इसमें सहयोग करें। चैधरी लक्ष्मी नारायण ने आश्वसन दिया कि इसकी सफाई कराने पर किसी भी कीमत पर पटरी नहीं कटने दी जायेगी। बैठक में मांट ब्रॉच क्षेत्र के कुरसण्डा रजवाह और अट्ठाइसी में लगभग 3 दशक से पानी की जटिल समस्या का मामला विशेष रूप से रखा गया और कहा गया कि राया से माइनर निकालने पर इसका समाधान हो सकता है किन्तु इसके पूर्व श्यामली से होकर बिरहना आने वाली माइनर के माध्यम से समाधान के प्रयास किये जा सकते हैं। सम्बन्धित अधिशासी अभियंता ने इस दिशा में उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। जिला पंचायत सदस्य नरदेव चैधरी, जगदीश के अलावा हुलवाना के प्रधान कुंवरपाल, चैधरी सत्यपाल, चैधरी सरनाम, राजवीर, दिनेश, रूपचन्द, बॉवी, नेत्रराम, प्रताप चैधरी,हंसराज आदि ने बैठक के दौरान समस्यायें रखीं।  

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मथुरा। वृन्दावन छटीकरा मार्ग स्थित शांति सेवा धाम में आयोजित पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने सूबे की सपा सरकार व केन्द्र में आशीन भाजपा को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि जबाहर बाग प्रकरण में हुई जनहानि सीधे-सीधे सपा सरकार की नाकामी का नतीजा है तो वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के द्वारा दलित के घर में भोजन करने को ड्रामा करार दिया। गुरूवार को छटीकरा मार्ग स्थित शांति सेवा धाम में आये ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने जबाहर बाग में विगत कई वर्षों से जमे कथित सत्याग्रहियों को सूबे की सत्ताधारी पार्टी के मंत्रियों पर संरक्षण का आरोप लगाते कहा कि रामवृक्ष द्वारा सत्याग्रह के नाम पर मथुरा के 300 एकड़ भूमि को हथियाने का षड़यंत्र था, जिसे पुलिस के जाबांज अफसर एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी व एसओ फरह संतोष कुमार यादव ने नाकाम कर दिया। महाराज श्री ने सारे फसाद की जड़ बाबा जयगुरूदेव के आश्रम व अथाथ सम्पत्ति को करार दिया। तो वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के द्वारा दलित के घर भोजन करने को राजनीतिक स्टण्ट करार दिया।

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मथुरा। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत जनपद के 11 गांव खुले में शौच मुक्त घोषित हो गये हैं जिनमें ब्लॉक मथुरा के चार, राया का एक, बल्देव के दो, फरह के दो, नन्द्गॉव का एक तथा गोवर्धन का एक गांव शामिल है। नवागत जिलाधिकारी निखिल चन्द्र शुक्ल के दिशानिर्देशन में मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने यहां राजीव सभागार में आयोजित एक समारोह के दौरान इन ग्रामों के प्रधानों एवं निगरानी टीम के सदस्यों को माला पहनाकर एवं प्रसस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। ब्लॉक मथुरा के राजपुर नौबरामद, वृन्दावन बांगर, जौनाई, मथुरा बांगर, ब्लॉक राया के ग्राम थोकज्ञान, बल्देव के ग्राम नरहोली जुन्नरदार, इस्लामपुर, फरह के ग्राम नगला चन्द्रभान, धाना समशाबाद, नन्द्गॉव के ग्राम गाजीपुर एवं ब्लॉक गोवर्धन के ग्राम पैंठा के प्रधान एवं निगरानी टीम के सदस्य अपने ग्रामों के सबसे पहले खुले में शौचमुक्त के गौरव सहित सम्मान पाने पर गद्गद थे। इनमें प्रेरक का सम्मान पाने वाली नगला चन्द्रभान की छोटी बच्ची मोनिका का उत्साह देखते ही बनता था। सभी ने इस छोटी बच्ची के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्य विकास अधिकरी श्री वर्मा ने आव्हान किया कि जिस लगन एवं मेहनत से यह गॉव खुले में शौच से मुक्त किये गये हैं वे आगे भी इसे कायम रखें इसके लिए प्रयासों में कोई कमी न की जाय। साथ ही बताया कि इन गांव के सत्यापन हेतु मण्डल एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों की टीम सत्यापन हेतु आयेंगी, उनकी अनुकूल रिपोर्ट होने पर गांव के सोलिड बेस्ट प्रबन्धन- विकास हेतु 10 से 15 लाख रूपए की व्यवस्था हो सकेगी। उन्होंने कहा कि उनके मन में इन ग्रामों के प्रधानों एवं निगरानी समिति के सदस्यों की बहुत श्रद्घा है। उन्होंने जो मान बढाया है उसके लिए प्रयास रहेंगे कि इन ग्रामों में सभी योजनाये सही एवं गुणवत्ता परक चलें। साथ ही आव्हान किया कि गांव को खुले में शौचमुक्त व माता बहनों को सुरक्षित करने के इस कार्य के अलावा सफाई के और तरीके भी अपनाये जायें तथा अपने बगल के ग्राम वासियों को भी इसका संदेश दें। धाना समशाबाद के देवेन्द्र दीक्षित ने हाथों से दिमाग से एवं दिल से कलाकार की भांति इसमें योगदान पर बल दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी सहित सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित अन्य ग्राम पंचायतों नोडलध्सहायक नोडल अधिकारी एवं सचिव आदि भी कार्यक्रम उपस्थित रहे।

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मथुरा । उत्तर प्रदेश के मथुरा में पिछली 2 जून को हुए खूनी संघर्ष मामले में आरोप-प्रत्यारोप के बीच सवालों के घेरे में यूपी सरकार भी घिर गई है। टीवी चैनल ‘आज तक’ के स्टिंग ऑपरेशन में इस बात का खुलासा हुआ है कि कैसे 280 एकड़ जमीन पर कब्जे का बीज बोया गया और कैसे वह धीरे-धीरे हिंसा का ‘रामवृक्ष’ खडा हो गया। स्टिंग सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का इस्तीफा मांगा है। पार्टी इस मामले को लेकर आज दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करने वाली है। इसमें कोई शक नहीं कि मथुरा में जो कुछ हुआ, उसमें वहां की कानून-व्यवस्था भी शामिल है. लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुई हिंसा ने कई सवाल खडे कर दिए हैं। यथा, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? किसकी चूक से मारे गए बहादुर अफसर? किसके संरक्षण के कारण रामवृक्ष यादव इतने लंबे समय तक जवाहरबाग में अपनी हुकूमत चलाता रहा? चैनल के मुताबिक, 80 बार इनपुट और अलर्ट के बावजूद अखिलेश यादव की सरकार और वहां की पुलिस सोई रही। इंटेलिजेंस यूनिट बार-बार सरकार और पुलिस को आगाह करती रही, इनपुट भेजे जाते रहे। जवाहरबाग में तैनात पुलिसकर्मियों को भी इस बात का पूरा इल्म था कि रामवृक्ष मथुरा का कंस बन चुका है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि यह इंटेलिजेंस का फेल्योर था, मगर सच्चाई यह नहीं है, लोकल इंटेलिजेंस ने पल-पल की जानकारी सरकार को दी थी, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।   इंटेलिजेंस के इंस्पेक्टर ने की हकीकत बयां - इंटेलिजेंस यूनिट के मुखिया मुन्नीलाल गौर, जो बतौर इंस्पेक्टर तैनात है, ने चैनल को सारी हकीकत बताई है। गौर की पोस्टिंग साल 2012 से मथुरा में ही है। उन्होंने चैनल को बताया, जैसे-जैसी परिस्थितियां आईं, हमने यूपी सरकार को एक दो बार नहीं, बल्कि पूरे 80 बार जवाहरबाग का इनपुट भेजा। उन्होंने कहा, ‘हमारी तो लिखा-पढ़ी में है। हमने करीब 80-80 प्रतिवेदन भेजे है।. डीओ लेटर होते हैं। डीओ नोट्स भेजे हैं। 80 बार करीब 250-300 पन्नों की रिपोर्ट है। अलग अलग तारीखों में। एक महीने में कभी चार बार भेजे, कभी पांच बार भेजे। जब जब जैसी घटना परिस्थितियां आईं, वैसे मैं लिखता-भेजता रहा, लेकिन किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया।’   जनवरी 2015 में भेजी थी छह पन्नों की रिपोर्ट इंस्पेक्टर गौर ने समय-समय पर सरकार और शासन दोनों को चेताया कि मथुरा का जवाहर बाग बारूद के ढेर पर है। इंटेलिजेंस यूनिट के इंस्पेक्टर मुन्नीलाल गौर ने वो रिपोर्ट भी दिखाई, जिसको लखनऊ यानी अखिलेश सरकार को भेजा गया था। वह कहते हैं, यह रिपोर्ट है। डेली की डेली जो भेजी है। सबसे पहले मैंने इनको दिया है अवैध असलहों के संबंध में। टैग लगा है, अवैध असलहों के संबंध में। यह रिपोर्ट इनको 23 जनवरी 2015 को लिखा है, यह 6 पन्नों की है।’ सरकार और प्रशासन को गौर बार-बार चेताते रहे कि जवाहरबाग में कब्जेधारियों के पास भारी मात्रा में अवैध असलाह है और ये चेतावनी तकरीबन डेढ़ साल पहले ही दे दी गई थी।   कहा था- प्रशासन से लडऩे को तैयार हैं सत्याग्रही मुन्नीलाल गौर ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा, ऐसा सुनने में आया है कि यह लोग अपने साथ अवैध असलहे भी रखे हुए हैं, जिनका समय आने पर प्रयोग करने में नहीं चूकेंगे। वर्तमान में जवाहरबाग में रह रहे सत्याग्रही अत्यधिक उत्तेजित और प्रशासन से लडऩे झगडऩे को तैयार हैं। अगर इनके पास पर्याप्त संख्या में पुलिस बल लेकर कार्रवाई नहीं की गई तो अपर्याप्त पुलिस बल के साथ कोई भी घटना घटित हो सकती है। गौर ने यह रिपोर्ट डीएम, एसएसपी और गृह सचिव को भी भेजी थी। यही नहीं, ऐसी 15 रिपोर्ट भेजी गईं, जिसे डीएम ने शासन को भेजा था। इनमें एक रिपोर्ट 10 नवंबर 2014 की भी है। फिर नवंबर 2014 की. 13 जनवरी 2015 की एक रिपोर्ट भी है, जिसमें मारपीट का जिक्र है।   घटना से एक दिन पहले भी किया था आगाह  इंटेलिजेंस यूनिट के इंस्पेक्टर ने आगे बताया कि खूनी संघर्ष से ठीक एक दिन पहले यानी एक जून को भी सरकार को चेताया गया था। गौर ने अपनी 1 जून की रिपोर्ट में लिखा है, ‘उल्लेखनीय है कि जवाहरबाग को खाली करवाए जाने को लेकर दिए गए नोटिस और पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई के चलते पड़ावरत सत्याग्रही हतोत्साहित न होने और पुन: एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन करने वाले हैं। साथ ही प्रशासन को भी यह बताना चाह रहे हैं कि वे किसी भी कार्रवाई से कतई सशंकित नहीं हैं। ये दर्शाने के उद्देश्य से सत्याग्रही द्वारा आज महिला, बच्चों को आगे कर मार्च निकाला गया। साथ ही यह भी जानकारी में आया है कि इनके द्वारा छोटे-छोटे ईंट पत्थर के टुकड़े जवाहरबाग के अंदर जगह-जगह एकत्र किए जा रहे हैं, जिनका प्रयोग इनके द्वारा पुलिस कार्रवाई के दौरान किया जा सकता है।’ इस कदर चेतावनी देने के बाद भी, लखनऊ में बैठी अखिलेश सरकार के कान पर जू तक नहीं रेंगी। और इसके बावजूद भी सरकार अगर यह कहती है कि लोकल लेवल पर इंटेलिजेंस फेल्योर था, इंटेलिजेंस चूक थी तो अब यह किसी के भी समझ आ जाता है कि चूक किससे हुई, और कैसे हुई?   लंबे समय से थी खूनी खेल की तैयारी यह सब यूं अचानक भी नहीं हुआ था। खूनी खेल की तैयारी तो जवाहरबाग में लंबे वक्त से चल रही थी। खुफिया विभाग ने सरकार को जवाहरबाग की एक-एक हरकत की सूचना बाकायदा लिखत-पढ़त में दे दी थी। मथुरा कांड की हकीकत की तह में जाने के लिए चैनल की टीम सब इंस्पेक्टर सुनील कुमार तोमर को भी कुरेदा। जवाहरबाग में तैनात सब इंस्पेक्टर सुनील कुमार तोमर ने अपनी आंख से देखा था कि किस तरह महीनों से रामवृक्ष के गुर्गे खुलेआम तमंचे लहराते हुए घूम रहे थे। सब इंस्पेक्टर तोमर कहते हैं, ‘मथुरा पुलिस को जवाहरबाग में सिर्फ पहरेदारी की जिम्मेदारी दी गई थी, किसी भी तरह के एक्शन का अधिकार नहीं दिया गया था।’ दो जून को खूनी संघर्ष वाले दिन भी सुनील जवाहरबाग में ही थे। वह कहते हैं, ‘जवाहर बाग की खरबों रुपये की कीमत की जमीन को रामवृक्ष को लीज पर देने का खेल चल रहा था।’ जवाहरबाग अराजक तत्वों का अड्डा बन चुका था। रामवृक्ष यादव को ‘खादी’ का संरक्षण मिला हुआ था। अपराधी से लेकर नेता तक उससे मिलने आते थे। जवाहरबाग में ठेके पर फल और सब्जी उगाने वाले नारायण सिंह बताते हैं कि जवाहरबाग अपराधियों का गढ़ बन चुका था और इन्हें संरक्षण दे रहा था रामवृक्ष यादव।   2014 में भी रामवृक्ष के गुर्गों ने की थी पुलिस की पिटाई कांस्टेबल मनोज यादव रामवृक्ष यादव और उसके गुर्गों की क्रूरता के साक्षी रहे हैं। मनोज ने टीम के समक्ष रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया बयान किया। वह बताते हैं कि जनवरी 2014 में पुलिस टीम रामवृक्ष के अवैध कब्जे की जांच करने जवाहरबाग पहुंची थी। तब रामवृक्ष के गुर्गों ने पुलिस टीम को घेरकर उनकी बुरी तरह पिटाई की थी। इन बातों से यह साफ है कि जवाहर बाग में रामवृक्ष यादव का रावणराज चलता था। उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक थी। रसूखदार लोगों का उसे संरक्षण मिला हुआ था, यही वजह है कि उसे किसी का खौफ नहीं था। जवाहरबाग से ही वो बेखौफ अपराधिक गतिविधियां चलाता था। पुलिस ने जब जब उसके अवैध कब्जे पर कार्रवाई की सोची, तब तब पुलिस को मुंह की खानी पड़ी और 2 जून की आखिरी लड़ाई में दो जांबाज अफसरों समेत 29 लोगों की जान चली गई।    साभार-khaskhabar.com

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