मथुरा

नई दिल्ली। फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल देश के 23 शहरों में से 13 शहर इस लिस्ट में शामिल हो गए। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू मंगलवार को स्मार्ट सिटी के फास्ट ट्रैक राउंड का रिजल्ट जारी किया। लखनऊ, भागलपुर और फरीदाबाद सहित 13 नये शहरों का स्मार्ट सिटी के लिए सिलेक्ट किया गया। इस लिस्ट में लखनऊ की रैंकिग टॉप पर रही। हालांकि, पहले यह लिस्ट सोमवार को जारी होनी थी, लेकिन आज घोषणा की गई। नायडू ने बताया कि  रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार के बाद 13 शहरों का चयन किया गया। इन शहरों में लखनऊ, वारंगल, चंडीगढ़, धर्मशाला, रायपुर जैसे शहर शामिल हैं।   फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल 23 शहरों में से 15 शहर ऐसे हैं, जो विभिन्न राज्यों की राजधानी हैं। इन सभी शहरों का चयन फास्ट ट्रैक प्रतियोगिता के जरिये किया गया है। इससे पहले यह सभी शहर इस दौड़ में खराब रैकिंग के चलते पिछड़ गए थे। बाद में मंत्रालय ने इन्हें अपनी रैंक सुधारने का मौका दिया था। शहरी विकास मंत्रालय के मुताबिक फास्ट ट्रैक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले शहरों के बीच यह मुकाबला अप्रैल में शुरू किया गया था। इसके तहत देश के 23 शहरों ने नए सिरे से अपनी दावेदारी पेश की थी। बाद में मंत्रालय ने इन सभी शहरों के बीच स्मार्ट सिटी चयन प्रक्रिया के तहत प्रतियोगिता कराई जो 15 मई को पूरी हुई। इन शहरों को मिली लिस्ट में जगह    लखनऊ, वारंगल, धर्मशाला, चंडीगढ, रायपुर, न्यू टाउन कोलकाता, भागलपुर, पणजी, पोर्ट ब्लेयर, इंफाल, रांची, अगरतला, फरीदाबाद।  ये शहर थे दौड़ में शामिल  वारगंल, चंडीगढ़, लखनऊ, न्यू टाउन कोलकाता, गोवा, पसीघाट (अरुणाचल प्रदेश), धर्मशाला, फरीदाबाद, रायपुर, भागलपुर, शिलांग, नामची (सिक्किम), पोर्ट ब्लेयर, दीव-दमन, सिल्वासा, इंफाल, रांची, अगरतला, कोहिमा, कावित्री (लक्ष्यद्वीप), पुडुचेरी, देहरादून।  साभार-khaskhabar.com     

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लॉस एंजेलिस। हवाई में सोमवार को एक छोटे विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। काउंटी अधिकारियों ने बताया कि काउई द्वीप के हैनापेपे में विमान के उतरने के दौरान इस स्कआइडाइविंग विमान में आग लग गई। घटनास्थाल पर ही चार लोगों की मौत हो गई जबकि एक शख्स ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। समाचार पत्र होनोलुलु ने संघीय विमानन प्रशासन के प्रवक्ता इयान ग्रेगोर के हवाले से बताया कि यह एकल इंजन सेसना 182एच विमान सुबह लगभग 9.30 बजो पोर्ट एलेन हवाईअड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें चार यात्री और एक चालक सवार था। दुर्घटना के समय विमान में पायलट, दो स्काइडाइविंग इंस्ट्रक्टर और दो जंपर थे। काउई दुर्घटना हवाई में सोमवार को हुई दो दुर्घटनाओं में से एक है। हवाई में ही सोमवार को एक छोटा विमान माखाह में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें दो लोग सवार थे।  साभार-khaskhabar.com 

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तेहरान । तेहरान में सोमवार को भारत और ईरान के बीच दोस्ती का नया अध्याय लिखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिनी ईरान यात्रा में 12 बड़े समझौते किए हैं, इनमें चाबहार पोर्ट के लिए किया गया समझौता बेहद खास है। भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच हुआ त्रिपक्षीय चाबहार समझौता, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के बरअक्स काफी अहम है। यह समझौता कर भारत ने सामरिक नजरिए से पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब दिया है। जानिए इस समझौते से जुडी अहम बातें- -    भारत चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के विकास के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेगा। -    भारत पहले ही ईरान-अफगान सीमा पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 200 किमी से ज्यादा लंबी सडक़ बना चुका है। -    भारत ईरान के चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में ऐल्यूमिनियम स्मेल्टर से लेकर यूरिया संयंत्र तक स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेगा जिसके लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। -    पीएम मोदी ने कहा है कि ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास का समझौता एक महत्वपूर्ण घटना है। इसके लिए भारत ईरान को 50 करोड़ डॉलर मुहैया कराएगा।   जानिए चाबहार डील पाकिस्तान के लिए क्यों है हार    1. चाबहार दक्षिण पूर्व ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित एक बंदरगाह है, जिसके जरिए भारत अपने पडोसी पाकिस्तान को बाइपास करके अफगानिस्तान के लिए रास्ता बनाएगा। यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि अफगानिस्तान की कोई भी सीमा समुद्र से नहीं मिलती है और भारत के साथ इस मुल्क के सुरक्षा संबंध और आर्थिक हित हैं। 2. सडक़ परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक चाबहार के रणनीतिक बंदरगाह के निर्माण और परिचालन संबंधी वाणिज्यिक अनुबंध पर समझौते से भारत को ईरान में अपने पैर जमाने और पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान, रूस और यूरोप तक सीधी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। 3. फारस की खाडी के बाहर बसे इस बंदरगाह तक भारत के पश्चिमी समुद्री तट से पहुंचना आसान है। इस बंदरगाह के जरिए भारतीय सामानों के ट्रांसपोर्ट का खर्च और समय एक तिहाई कम हो  जाएगा। 4. कांडला एवं चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी, नई दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम है। इसलिए इस समझौते से भारत पहले वस्तुएं ईरान तक तेजी से पहुंचाने और फिर नए रेल एवं सडक़ मार्ग के जरिए अफगानिस्तान ले जाने में मदद मिलेगी। 5. ईरान मध्य एशिया और हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से में बसे बाजारों तक आवागमन आसान बनाने के लिए चाबहार पोर्ट को एक ट्रांजिट हब के तौर पर विकसित करने की योजना बना रहा है। 6. ईरान के पास सस्ती प्राकृतिक गैस और बिजली है। भारतीय कंपनियां 50 लाख टन का एल्यूमिनियम स्मेल्टर संयंत्र और यूरिया विनिर्माण इकाइयां स्थापित करना चाहती हैं। भारत यूरिया सब्सिडी पर 45,000 करोड़ रुपये सालाना खर्च करता हैं। यदि भारत इसका विनिर्माण चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में करते हैं और कांडला बंदरगाह ले जाते हैं और वहां से भीतरी इलाकों में, तो उतनी ही राशि की बचत होगी। 4. गडकरी के मुताबिक नाल्को एल्यूमिनियम स्मेल्टर स्थापित करेगी जबकि निजी एवं सहकारी उर्वरक कंपनियां यूरिया संयंत्र बनाने की इच्छुक हैं, बशर्ते उन्हें दो डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से कम की दर पर गैस मिले। उन्होंने कहा कि रेलवे का पीएसयू इरकॉन चाबहार में एक रेल लाइन का निर्माण करेगा ताकि अफगानिस्तान तक सीधे सामान पहुंचाया जा सके। 7. गडकरी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और कांडला पोर्ट ट्रस्ट की संयुक्त उद्यम इंडिया पोट्र्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड यहां 640 मीटर लंबी दो कंटेनर गोदी और तीन बहु मालवाहक गोदी के निर्माण पर 8.5 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। 8. तीसरे साल से भारत चाबहार बंदरगाह पर 30,000 टीईयू कार्गो की गारंटी देगा जो 10वें साल में बढक़र 2,50,000 टीईयू तक पहुंच जाएगा। 9. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में 2003 में चाबहार बंदरगाह बनाने के लिए आरंभिक समझौता किया गया था लेकिन यह सौदा बाद के सालों में आगे नहीं बढ़ पाया। पिछले एक साल में इसे तेजी से आगे बढ़ाया गया जिसकी वजह से आज पहले चरण के लिए समझौता हुआ। 10. इस ऐतिहासिक समझौते की वजह से भारत अब बिना पाकिस्तान गए अफगानिस्तान और फिर उससे आगे रूस और यूरोप से जुड़ सकेगा। 11. भारत द्वारा 2009 में निर्मित जारंज-देलारम सडक़ अफगानिस्तान के राजमार्ग तक पहुंच प्रदान कर सकता है जो अफगानिस्तान के चार प्रमुख शहरों- हेरात, कंदहार, काबुल और मजार-ए-शरीफ तक पहुंच प्रदान करेगा। 12. ऐसी खबर है कि भारत अफगानिस्तान के भीतर एक और सडक़ नेटवर्क के निर्माण के लिए वित्तपोषण करेगा जिससे ईरान से अपेक्षाकृत छोटे मार्ग के जरिए ताजिकिस्तान तक जुडऩे में मदद मिलेगी। 13. चाबहार पाकिस्तान में चीन द्वारा परिचालित ग्वादार बंदरगाह से करीब 100 किलोमीटर दूर है जो चीन की 46 अरब डॉलर के निवेश से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा विकसित करने की योजना का अंग है और इसका उद्देश्य एशिया में नए व्यापार और परिवहन मार्ग खोलना है। 14. भारतीय संयुक्त उद्यम कंपनियां बंदरगाह में 8.52 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश करेंगी। भारत का एक्जिम बैंक और 15 करोड़ डॉलर का कर्ज देगा। गडकरी ने यह भी कहा कि भारत चाबहार और जहेदान के बीच 500 किलोमीटर का रेलमार्ग बनाएगा जो चाबहार को मध्य एशिया से जोड़ेगा। 15. ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलुचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक तौर पर उपयोगी है। यह फारस की खाड़ी के बाहर है और भारत के पश्चिम तट पर स्थित है और भारत के पश्चित तट से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। 16. चाबहार परियोजना, भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बंदरगाह के लिए पहला विदेशी उद्यम होगा। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह है और इसकी इंडियन पोट्र्स ग्लोबल में साठ प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि कांडला पोर्ट के पास शेष 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 17. चाबहार बंदरगाह सहित अफगान की सीमा तक सडक़ और रेलवे का विकास होने से अफगानिस्तान और पूरे मध्य एशिया में भारत की पहुंच सुनिश्चित होगी। भारत पहले ही ईरान-अफगान सीमा पर जरांग से दिलराम तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 200 किमी से ज्यादा लंबी सडक़ बना चुका है। 18. अरब सागर में पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट के विकास के जरिए चीन को भारत के खिलाफ बडा सामरिक ठिकाना मुहैया कराया है, लिहाजा चाबहार पोर्ट को विकसित करते ही भारत को अफगानिस्तान और ईरान के लिए समुद्री रास्ते से व्यापार-कारोबार बढाने का मौका मिलेगा और सामरिक नजिरए से भी पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब मिल सकेगा, क्योंकि चाबहार से ग्वादर की दूरी महज 6- मील है। 19 भारत उन मुल्कों में एक है, जिनके ईरान से अच्छे व्यापारिक रिश्ते रहे हैं। चीन के बाद भारत ईरान के तेल का दूसरा सबसे बडा खरीदार है। 20. चाबहार से ईरान के मौजूदा रोड नेटवर्क को अफगानिस्तान में जरांज तक जोडा जा सकता है, जो बंदरगाह से 883 किमी दूर है। 2009 में भारत द्वारा बनाए गए जरांज-डेलारम रोड के जरिए अफगानिस्तान के गारलैंड हाइवे तक आवागमन आसान हो जाएगा। इस हाइवे से अफगानिस्तान के चार बडे शहरों- हेरात, कंदहार, काबुल और मजार-ए-शरीफ तक सडक के जरिए पहुंचना आसान होता है। 21. इस बंदरगाह के विकास के लिए हालांकि 2003 में ही भारत और ईरान के बीच समझौता हो गया था, मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए 150 मिलियन डॉलर के क्रेडिट लाइन को हरी झंडी दी थी। 22. परमाणु कार्यक्रमों के चलते ईरान पर पश्चिमी देशों की ओर से पाबंदी लगा दिए जाने के बाद इस प्रोजेक्ट का काम धीमा हो गया। जनवरी, 2016 में यह पाबंदियां हटाए जाने के बाद भारत ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया। 23. दुनिया में खपत पर होने वाले तेल का करीब पांचवां हिस्सा रोजाना इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो ओमान की खाडी और हिंद महासागर को फारस की खाडी से अलग करता है। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के पहले चरण में भारत 200 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने जा रहा है। इसमें फरवरी में दिया गया 150 मिलियन डॉलर भी शामिल है। भारत इस प्रोजेक्ट पर 500 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा।  साभार-khaskhabar.com 

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नई दिल्ली। एनडीए सरकार के लिए अब उड़द दाल सिरदर्द बन गयी है। अरहर की कीमतों में थोड़ी गिरावट दजऱ् हुई तो अब उड़द दाल कई बड़े शहरों में महंगी हो गयी है। पिछले एक महीने में उड़द दाल देश के 15 अहम शहरों में 10 से 30 रुपये तक महंगी हो गयी है, वो भी तब जब सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हज़ारों टन दाल का आयात कर चुकी है। उड़द दाल महंगी हुई तो उसकी बिक्री भी तेज़ी से घट गयी है। दिल्ली के साउथ एवेन्यू कॉलोनी में दशकों से किराना की दुकान चला रहे खुदरा व्यापारी अशोक खुराना कहते हैं, उड़द दाल दिल्ली में अरहर दाल से भी महंगी हो गयी है...पहले महीने में अगर हम 100 किलो तक बेचते थे तो अब 25 किलो ही बिकता है...लोग अब दाल बेहद कम खरीद रहे हैं।   खाद्य मंत्रालय के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक महीने में उड़द दाल की कीमत ग्वालियर में 115 रुपये प्रति किलो से बढक़र 145 रुपये प्रति किलो हो गयी यानी 30 रुपये महंगी। इस दौरान पंचकुला में भी उड़द दाल की कीमत 120 रुपये प्रति किलो से बढक़र 150 रुपये प्रति किलो हो गयी यानी 30 रुपये महंगी। यही हाल हिसार का भी रहा जहां पिछले चार हफ्तों में उड़द दाल 130 रुपये प्रति किलो से बढक़र 160 रुपये प्रति किलो हो गयी जबकि गुडग़ांव में इसकी कीमत 132 रुपये प्रति किलो से बढक़र 158 रुपये प्रति किलो हो गयी यानी 26 रुपये महंगी।   साभार-khaskhabar.com 

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ऐसा लगता है कि अपने खास स्टाइल स्टेटमेंट और खूबसूरती के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री सनी लियोन अपने बालों के साथ प्रयोग करने के मूड में हैं।   फिल्म ‘मस्तीजादे’ की अभिनेत्री ने अपने बालों का रंग गुलाबी करा लिया है। इससे पहले इस महीने की शुरुआत में उन्होंने अपने बालों को ब्लू और पर्पल रंग में रंगाया था।  अभिनेत्री ने ट्विटर पर अपने गुलाबी रंग के बालों वाली एक तस्वीर साझा की और अपने हेयर स्टाइलिस्ट को नया लुक देने के लिए धन्यवाद भी दिया।   सनी ने तस्वीर का शीर्षक लिखा, पिंक! नीना सागरी को अच्छे मेकअप और थॉमस मोक्का को गुलाबी बालों के लिए धन्यवाद। प्यारा प्रयोग।    साभार-khaskhabar.com 

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गुवाहाटी । असम में सर्बानंद सोनोवाल के शपथ लेने के साथ ही बीजेपी की नॉर्थ ईस्ट में पहली सरकार बन गई है। यह जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस खास मौके पर पीएम मोदी समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। शपथ समारोह वेटरनरी कॉलेज परिसर में हुआ।   सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। समारोह में मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल, राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया, पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, रेलमंत्री सुरेश प्रभु और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद थे।  गौरतलब है कि सोनोवाल मोदी सरकार में खेल मंत्री रह चुके है। असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 60 सीटें जीती हैं। वहीं, एजीएम को 14 और बीपीएफ को 12 सीटों पर जीत हासिल हुई है।   समारोह में पूर्व सीएम तरुण गोगोई ने भी शिरकत की। सर्बानंद ने तरुण गोगोई को निजी तौर पर निमंत्रण भेजा था और उनका आशीर्वाद मांगा था।   हिमांता बिस्वा सरमा समेत 10 मंत्रियों ने शपथ ली। बिस्वा कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए थे और इन चुनावों में वह अहम रणनीतिकार साबित हुए। इसमें छह मंत्री बीजेपी से और चार गठबंधन दलों से हैं। इनमें से दो एजीपी और दो बीपीएफ से हैं।  

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