मथुरा

नई दिल्ली। बैंकों का 9 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज डकार कर विदेश भागे लिकर किंग विजय माल्या भारत लौटने को तैयार हैं। हालांकि इसके लिए माल्य ने दो शर्तें रखी है। माल्या सुरक्षा और आजादी चाहते हैं। माल्या का कहना है कि वे एसबीआई को नया सैटलमेंट ऑफर भी दे चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में प्रगति होगी। यूनाइटेड ब्रेवरीज लिमिटेड(यूबीएल) की हालिया बोर्ड मीटिंग में शामिल लोगों ने यह जानकारी दी। माल्या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग में शामिल हुए थे। बोर्ड मीटिंग शुक्रवार को हुई थी। ईडी ने माल्या को यूके से एक्स्ट्राडाइट (प्रत्यर्पित) कराने की कोशिश की थी। लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इसकी परमिशन नहीं दी। माल्या 2 मार्च को लंदन चले गए थे। किरन मजूमदार-शॉ के मुताबिक, हमारी उनसे कई मुद्दों पर बात हुई। माल्या का कहना है कि उनकी बैंकों से लोन चुकाने को लेकर गंभीर बात हुई है। वे जल्द से जल्द कर्ज चुका देंगे। किरण ने ये भी बताया, माल्या ने जल्द ही भारत लौटने की इच्छा भी जताई है। लेकिन वे चाहते हैं कि उनकी आजादी और सेफ्टी बरकरार रहे।  बता दें कि किरण मजूमदार-शॉ यूबीएल की इंडिपेंडेंट मेंबर हैं। हालांकि, माल्या ने इस पर कोई कमेंट करने से इनकार कर दिया। बोर्ड के एक अन्य इंडिपेंडेंट मेंबर सुनील अलघ के मुताबिक, "माल्या का कहना है कि उन्हें गलत तरीके से आरोपी बनाया गया। वे लोन चुकाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।अलघ कहते हैं, पूरा बोर्ड उनके साथ है। हम कोशिश करेंगे कि कंपनी की अगस्त में होने वाली अगली बोर्ड मीटिंग तक कोई कॉरपोरेट-गवर्नमेंट इश्यू न हो। माल्या को उनका ग्रुप यूबीएल और स्ट्रैटजिक पार्टनर हैनिकेन पूरा सपोर्ट कर रहा है। बताया जा रहा है कि यूबीएल का परफॉर्मेंस काफी अच्छा रहा है। इसका कॉरपोरेट-गवर्नमेंट के साथ कोई मामला नहीं है।  माल्या कह चुके हैं कि वे लगातार कर्ज चुकाने की कोशिश में जुटे हैं। उन्होंने ऐसा कोई गलत काम नहीं किया, जिसके चलते उन्हें दोषी करार दिया जाए। माल्या पर बैंकों का 9 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज बकाया है। मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी भी उनसे पूछताछ करना चाहता है।    साभार-khaskhabar.com 

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नई दिल्ली। टेस्ट करिअर की पहली ही पारी में शतक जडऩे वाले भारतीय बल्लेबाज दीपक शोधन का निधन हो गया है। वे भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर थे। दीपक का निधन अहमदाबाद में अपने निवास स्थान पर हुआ। दीपक फेफड़ों के कैंसर से पीडि़त थे और इसकी पहली बार पहचान इसी साल फरवरी में हुई थी।  दीपक ने 110 रन बनाए और यह टेस्ट ड्रा रहा। इतनी बढिय़ा शुरुआत के बावजूद दीपक को सिर्फ दो और टेस्ट खेलने का मौका मिला। ये दो टेस्ट 1953 में वेस्टइंडीज के दौरे पर खेले गए थे। दीपक ने वर्ष 1946-47 से 1961-62 तक 43 प्रथम श्रेणी मैच खेले थे। इनमें दीपक ने 5368 रन बनाने के साथ 73 विकेट लिए। दीपक बाएं हाथ के आकर्षक बल्लेबाज होने के साथ बाएं हाथ से ही तेज गेंदबाजी भी करते थे। दीपक को भारत की ओर से 25 साल की उम्र में पहला टेस्ट खेलने का मौका मिला था। दीपक 1952 में ईडन गार्डंस में पाकिस्तान के खिलाफ इस टेस्ट में 179 रन पर छह विकेट होने पर बल्लेबाजी के लिए उतरे थे।    साभार-khaskhabar.com 

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ऋचा दूबे एक ऑनलाइन खुदरा कारोबार चलाती हैं, जो कारीगरों को उपभोक्ताओं से जोड़ता है। यह आधुनिक भारतीय महिला के लिए कोई अनोखी बात नहीं है। लेकिन हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कितनी पिछड़ी हैं। भारत का केवल 14 फीसदी कारोबार महिला उद्यमी संभाल रही हैं। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के छठे आर्थिक जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कुल 5.85 करोड़ उद्यमी हैं, जिनमें से 80.5 लाख महिला उद्यमी हैं, जो 1,34,80,000 लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। जिन कारोबारी क्षेत्रों को महिलाएं संभाल रही हैं, उनमें फुटपाथ की दुकान से लेकर वेंचर फंड प्राप्त नए स्टार्ट-अप तक शामिल हैं।  एसीजी इंक नामक कंसल्टेंसी की ग्लोबल वीमेन एंटरप्रेन्योर्स लीडर रिपोर्ट 2015 में भारत का दुनिया के 31 देशों में 29वां स्थान है, जो केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश से आगे हैं। भारत को इसमें 100 में से महज 17 अंक मिले हैं, जो नाइजीरिया, युगांडा और घाना से कमतर है।  इस रिपोर्ट में पाया गया है कि नीचे की रैंकिंग वाले भारत समेत अन्य देशों में महिलाओं को उत्तराधिकार में समान अधिकार प्राप्त नहीं है। साथ ही महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध के कारण स्टार्ट-अप पूंजी और अन्य चीजों तक उनकी पहुंच सीमित होती है।वास्तव में दूबे का कारोबार स्टार्ट-अप है और इसके लिए उन्होंने खुद पूंजी जुटाई है। दूबे ने पांच साल पहले 22.2 एक्सेसरीज को लांच किया था, जिसमें करी 30 ग्रामीण कारीगर और उनके परिवारजन काम करते हैं। वे महिलाओं के लिए एक्सेसरीज बनाकर बेचते हैं।  दूबे का कहना है, ‘‘कई फैशन ब्रांड्स के साथ मेरी पिछली नौकरी के दौरान मैं पूरे भारत में घूमी हूं। मैंने महसूस किया कि भारत के कारीगर अन्य विकसित देशों के कारीगरों के मुकाबले ज्यादा कमाई नहीं कर पाते।’’ ‘‘उन्हें शायद ही उनके काम की उचित कीमत मिलती है। इसी बात ने मुझे अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रेरित किया।’’ उत्तर प्रदेश की मूल निवासी 36 वर्षीय दूबे बेंगलुरू में अपना कारोबार चलाती हैं। बेंगलुरू एक ऐसा शहर हैं, जहां स्टार्टअप का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र है। इस शहर ने अपने आप को महिलाओं को उनके विचारों को पंख देने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता प्रदान करने के रूप में विकसित किया है। इन आकंड़ों से पता चलता है कि दक्षिण भारत में महिला उद्यमियों के लिए ज्यादा सहूलियत होती है।  दक्षिणी राज्यों ने इस मामले में नेतृत्व किया है और सामाजिक नजरिया बेहद महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु में 13.5 फीसदी कारोबार (10.8 लाख) महिलाएं संभाल रही हैं। जो देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक है। उसके बाद केरल में 9.1 लाख और आंध्र प्रदेश में 5.6 लाख महिला कारोबारी हैं।  दूबे अपने गृहराज्य के बारे में कहती हैं, ‘‘मैं अपने आप को उत्तर प्रदेश में एक उद्यमी के रूप में कल्पना भी नहीं कर सकती हूं। हिन्दी क्षेत्र की तुलना में दक्षिण भारत में महिला उद्यमी बनना काफी ज्यादा आसान है।’’ उनकी इस दलील की इन राज्यों के बेहतर लिंगानुपात से भी पुष्टि होती है, जो उच्च महिला उद्यमिता से संबंध का एक संकेत है।  स्टार्ट-अप लीडरशिप कार्यक्रम, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने और उनका पोषण करने के लिए फेलोशिप मुहैया कराता है। इसकी निदेशक (महिलाओं के लिए पहल) देविका पाराशर का कहना है कि महिला उद्यमियों को तीन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पहली उन्हें आपने आप को उद्यमी के रूप में गंभीरता से लिए जाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। दूसरा महिला मेंटर और रोल मॉडल का अभाव और तीसरा लैंगिंक भेदभाव, जो निवेशकों के फंडिंग पैटर्न और इस 14 फीसदी के आंकड़े से पता चलता है।  दूबे की कंपनी में छ लोगों की टीम है, जो प्रबंधन से लेकर माल ढुलाई तक काम संभालती हैं। महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे 82.19 फीसदी कारोबार लघु उद्योग हैं और जिनमें कम से कम एक कर्मचारी काम करता है। दूबे की कंपनी भी इसी श्रेणी में आती है। महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे कारोबार में 79 फीसदी स्ववित्तपोषित हैं। केवल 4.4 फीसदी महिला कारोबारियों ने किसी वित्तीय संस्था से ऋण लिया है या फिर सरकार से किसी प्रकार की मदद प्राप्त की है। हाल ही में यस बैंक ने इंटनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन से 325 करोड़ रुपये का ऋण लिया है, ताकि एक लाख महिला कारोबारियों को वित्त मुहैया करा सके।  महिला उद्यमियों में 60 फीसदी वंचित समुदाय से आती हैं।  महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे कारोबार के 60 फीसदी (48.1 लाख) कारोबार अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं। यह दर्शाता है कि वे इसे चलाती है, क्योंकि यह उनकी जरूरत है।  इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैंड-अप इंडिया योजना का शुभारभ किया था, जिसके तहत बैंक अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों और महिलाओं को एक करोड़ रुपये का ऋण मुहैया कराएगा। उन्हें रुपे डेबिट कार्ड दिया जाएगा तथा दूसरी मदद दी जाएगी, जिसमें कर्ज लेने और विपणन का प्रशिक्षण शामिल है। दूबे अपने कारोबार को अन्य राज्यों में विस्तार देने का सपना देख रही हैं, ताकि और ज्यादा कारीगरों को अपने साथ जोड़ा जा सके। दूबे भारत में घटती महिला श्रमशक्ति में एक अपवाद हैं। भारत में महिलाएं अब अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ और पढ़ी-लिखी हैं, बावजूद इसके महिला श्रमशक्ति घट रही है।  इंडियास्पेंड की अप्रैल में जारी रपट के मुताबिक, पिछले 10 सालों में भारतीय श्रमशक्ति में कम से कम 2.50 करोड़ महिलाएं कम हो गई, जो 27 फीसदी से ज्यादा नहीं हैं। यह दक्षिण एशिया में महिला श्रमशक्ति के मामले में पाकिस्तान के बाद दूसरा सबसे निम्न स्तर है। लेकिन पाकिस्तान में जहां इसमें बढ़ोतरी हो रही है, वहीं भारत में महिला श्रमशक्ति में कमी आ रही है। (आंकड़ा आधारित, गैरलाभकारी, लोकहित पत्रकारिता मंच, इंडियास्पेंड डॉट ऑर्ग के साथ एक व्यवस्था के तहत। देविका साहा दिल्ली की एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। लेख में व्यक्त विचार इंडियास्पेंड के हैं।)    साभार-khaskhabar.com 

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तेलुगू फिल्म ‘गब्बर सिंह’ (2012) में साथ काम कर चुकीं श्रुति हासन और पवन कल्याण अब तमिल फिल्म ‘वीरम’ के तेलुगू रीमेक में साथ नजर आएंगे। फिल्म का नाम अभी तय नहीं है। एक आधिकारिक बयान में फिल्म के निर्माताओं ने पुष्टि की है कि श्रुति इस फिल्म से जुडऩे को लेकर उत्साहित हैं।  फिल्म की शूटिंग जून में शुरू होगी और इसका निर्देशन एस.जे. सूर्या करेंगे।  श्रुति पहले अपने पिता कमल हासन की आगामी त्रिभाषी फिल्म ‘शाबाश नायडू’ की शूटिंग खत्म करेंगी और उसके बाद पवन के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगी। अनूप रूबेन्स फिल्म में संगीत देंगे। फिल्म ‘नॉर्थस्टार एंटरटेनमेंट’ बैनर तले बनाई जाएगी।   साभार-khaskhabar.com 

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सतयुग, द्वापरयुग, कलयुग हर युग में कोई न कोई भगवन जन्म जरूर लेते है ऐसा सभी लोगों का मानना है, लेकिन क्या आप जानते है कि किस युग में इंसान कितने जन्म लेता है। इसलिए आज हम चारों युगों के बारे में कुछ ऐसी चीज़े बताने जा रहे है, जिनके बारे में आपने आज तक कभी नहीं सुना होगा।    इन चारों युगों के बारे में जाने के लिए क्लिक कीजिए अगली स्लाइड पर..   सतयुग   सतयुग के लिए माना जाता है कि इसयुग मेंभगवन राम ने रावण का वध करने लिए जन्म लिया था, क्योंकि जब-जब इस धरती पर पाप बढ़ा है तब -तब भगवन ने इस धरती को अपना विराट रूप दिखाया है। सतयुग में धरती पर आत्माओं का वास हुआ करता था जिसे वर्ल्ड ऑफ़ सोल भी कहा जाता है। जैसे हर शरीर का अंत होता है ठीक वैसे ही एक समय का अंत भी आता ही है। जानकारी के लिए बता दें सतयुग कि 1,728,000 बाद खत्म होती है, जिसमे एक सामान्य व्यक्ति 1 लाख साल तक जी सकता है जिनका कद 32 फुट लम्बा हुआ करता था।इस युग इंसान अपनी इच्छा अनुसार मर सकता था।    त्रेतायुग   चरों युग हनुमान जी एक मात्र ऐसे भगवान हैं जो अमर हैं, त्रेतायुग में भी हनुमान जी ने भीम को चारों युग के बारे बताया था, किस युग में क्या होता ये भी बताया था। जानकारी के लिए बता दें त्रेतायुग 4 ,32 ,000 वर्षों का होता है, जिसमे एक सामान्य इंसान 10 ,000 साल तक जी सकता था। इस युग में भीम ने हनुमान जी को चारों युग के ज्ञानी के नाम से सम्बोधित किया था।    जब द्वापर युग में गंधमादन पर्वत पर महाबली भीम सेन हनुमान जी से मिले तो हनुमान जी से कहा - की हे पवन कुमार आप तो युगों से प्रथ्वी पर निवास कर रहे हो आप महा ज्ञान के भण्डार हो बल बुधि में प्रवीण हो कृपया आप मेरे गुरु बनकर मुझे सिस्य रूप में स्वीकार कर के मुझे ज्ञान की भिक्षा दीजिये तो हनुमान जी ने कहा - हे भीम सेन सबसे पहले सतयुग आया उसमे जो कामना मन में आती थी वो कृत (पूरी )हो जाती थी इसलिए इसे क्रेता युग (सत युग )कहते थे इसमें धर्म को कभी हानि नहीं होती थी उसके बाद त्रेता युग आया इस युग में यग करने की परवर्ती बन गयी थी इसलिए इसे त्रेता युग कहते थे त्रेता युग में लोग कर्म करके कर्म फल प्राप्त करते थे, हे भीम सेन फिर द्वापर युग आया इस युग में विदों के 4 भाग हो गये और लूग सत भ्रष्ट हो गए धर्म के मार्ग से भटकने लगे है अधर्म बढऩे लगा, परन्तु हे भीम सेन अब जो युग आएगा वो है कलयूग इस युग में धर्म ख़त्म हो जायेगा मनुष्य को उसकी इच्छा के अनुसार फल नहीं मिलेगा चारो और अधर्म ही अधर्म का साम्राज्य ही दिखाई देगा।    द्वापरयुग यह युग 864 000 वर्षों का था, जिसमे एक पतयेक व्यक्ति 1000 साल तक जी सकता था, ऐसा माना जाता है जैसे- जैसे धरती पर पाप बढ़ेगा वैसे-वैसे इंसान की जीने की उम्र और उसकी इच्छा की पूर्ती कम होने लगेगी। हनुमान जी हा कहना था कि द्वापरयुग में लोग धर्म के मार्ग से भटकने लगेंगे और धरती पर पाप बढ़ने लगेगा। जैसे कि आप सभी जानते हा इस युग में विष्णु जी ने खुद श्री कृष्णा का अवतार लेकर कंस को मौत के घाट उतारा था।    कलयुग  कलयुग में एक आत्मा का जन्म 45 बार होता है और उसकी उम्र 100 साल तक की होगी , इस युग में इंसान पर्यावरण को तहस नहस कर देगा, और इस युग में इंसान की इच्छा पूर्ती कम हो जाएगी और वे पाप का भागीदार बन जाएगा।    साभार-khaskhabar.com 

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मथुरा। साहित्य के साथ दर्शन शास्त्र दोनों का विचित्र मेला है। दर्शन शास्त्र में आलोचनात्मकता समावेश है उक्त विचार परशुराम जयंती के सप्ताह के अंतिम दिन सर्वोदयी ब्राह्मण विकास संस्थान मथुरा द्वारा आयोजित काव्य संगोष्ठी एवं समापन समारोह के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर डैम्पीयर नगर में क्षेत्राधिकारी मथुरा पर चक्रपाणि त्रिपाठी ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर हुकुम चंद तिवारी, इन्द्र कुमार वशिष्ठ, प्रतिमा शर्मा, अनामिका दीक्षित, माधुरी शर्मा, डा़ राजकुमार रंजन आगरा आदि ने किया। सरस्वती वंदना अशोक द्वारा की गई।

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