मथुरा

मथुरा। केशव दुर्ग स्थित संघ कार्यालय पर महानगर प्रचारक विशाल जी के मार्गदर्शन में मथुरा महानगर के होने वाले नगर सह स्वयं सेवक एकत्रिकरण की तैयारियों के लिए एक बैठक की गयी जिसमें सभी वस्तियों के प्रमुखों ने एकत्रिकरण में स्वयं सेवकों को लाने की योजना के बारे में चर्चा की व अपने द्वारा अपनी बस्तियों में की गई बैठकों की जानकारी दी।  बैठक में महानगर प्रचारक ने बताया कि यह महानगर सह नगर सम्मलित 31 जनवरी 2016 को सम्पूर्ण मथुरा महानगर में 5 नगरों में प्रातः 7ः30 बजे से 9ः00 बजे तक चलेगा। जो दीनदयाल नगर सहसम्मिलित, जीआईसी मैदान, केशव नगर सहसम्मिलित, कल्याण करोती के पास नवयुक्त संघ कार्यालय, माधव नगर सहसम्मिलित, सरस्वती शिशु मंदिर माधवपुरी, गोकुल नगर सहसम्मिलित, वाटर वक्र्स मैदान, गोकुल बैराज यमुना नगर सहसम्मिलित, राजा महेन्द्र प्रताप मार्ग पर होगा। महानगर प्रचारक ने यह भी बताया कि सन् 2025 में संघ अपने 100 वर्ष पूरे करेगा। इस हेतु सम्पूर्ण समाज में संघ कार्य पर प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर राष्ट्रीय भाव जागृत हो तथा आने वाले समय में बैचारिक युद्ध के समय सब अपने विचार के साथ मजबूती से खड़े हों। संघ कार्य सर्व स्पर्शी व सर्व व्यापी व्यक्ति-व्यक्ति में जगाये राष्ट्र चेतना, जन-मन संस्कार करें, यही साधना और ये सब शाखा के द्वारा सम्भव है। इस हेतु 6 से 14 फरवरी तक शाखा निरन्तर सप्ताह के निमत्त प्रत्येक वस्ती में षाखाहों मथुरा महानगर में 64 बस्ती हैं तथा 300 के लगभग उपबस्ती की रचना है। 2025 तक सम्पूर्ण उपबस्ती व उपबस्ती शाखा युक्त करने का आवह्ान किया गया है। बैठक में उपस्थित नगर कार्यवाह संजय जी, बनवारीजी, योगेश जी, डाॅ. कमल कौशिक, युवा मोर्चा अध्यक्ष सुमित शर्मा, मीडिया प्रभारी कुंजबिहारी चतुर्वेदी, शिवप्रकाश, वासू, अजय जी, शिवकुमार जी, पुडरीकाक्ष, गोविन्द, महावीर, चर्चित आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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मथुरा। जिलाधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में गत दिवस जिला सेवा योजन कार्यालय में कौशल विकास निगम की ओर से आयोजित रोजगार मेला में लिखित परीक्षा के बाद सफल 225 युवकों को विभिन्न निजी कम्पनियों में रोजगार दिलाया गया। जिलाधिकारी ने उप्र कौशल विकास निगम के माध्यम से इस रोजगार मेला का आयोजन किया था जिसमें लगभग 300 युवकों ने प्रतिभाग किया। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, पंजाब एवं जनपद की निजी कम्पनियों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार इन प्रशिक्षित युवकों की लिखित परीक्षा कराई जिसमें सफल 225 युवकों को रोजगार दिया गया। कौशल विकास निगम के सीसीएम प्रबन्धक सुनील यादव ने बताया कि कौशल विकास योजना के अन्र्तगत युवकों को प्रशिक्षण के साथ रोजगार देने के हर सम्भंव प्रयास किये जा रहे हैं।

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मथुरा। राजीव एकेडमी की एमबीए की छात्रा संचिता कुमारी का नवस्थापित ई-कामर्स कम्पनी मथुरा बाजार डाट काम में अच्छे पैकेज पर चयन हुआ है। यह कम्पनी ई-कॅामर्स की कम्पनी है जो घर बैठे सभी घरेलू आवश्यकताओं की वस्तुएं उपलब्ध कराती है। इस कम्पनी की स्थापना राजीव एकेडमी के पूर्व छात्र राजदीप द्वारा कुछ आईआईटी के मित्रों के साथ की गई है। इसी महीने राजीव एकेडमी फार टेक्नोलाजी एण्ड मैनेजमेंट के दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं का प्रतिष्ठित कम्पनी कार्तिक इनफ्राटान प्राइवेट लिमिटेड में चयन हुआ है। इनमें अंकित कुमार, चेतन अग्रवाल, विवेक कुमार, रविन्द्र कौशिक, द्रिष्या भाटिया, आदित्य नारायन, चन्द्रपाल सिंह, बृज बिहारी शर्मा, गर्वित अरोरा, लक्ष्मन गौर, आकृति चतुर्वेदी, प्राची चतुर्वेदी, चिराग भाटिया, शुभम अग्रवाल, स्वाति शर्मा, गिर्राज सिंह, अंकुश सक्सेना, कृष्ण हरि, राज नन्दनी सिंह, पूर्ति शर्मा, विपिन गोला, डिम्पल अग्रवाल, विशाल खंडेलवाल, रेनू गर्ग, सुरभि मित्तल, रूपम सिंह, अंशुल चतुर्वेदी शामिल हैं। संचिता कुमारी की उपलब्धि पर आरके एजूकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल ने शुभकामना प्रदान करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि ई-कामर्स में ऐसे स्किल्स हैं जिनसे घर बैठे ही हमारी आवश्यकताएं पूरी होती हैं और पेट्रोल आदि की बचत होती है। राजीव एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज अग्रवाल ने भी संचिता की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के युग में स्वयं का उद्योग लगाना अच्छी बात है। निदेशक डा. अमर कुमार सक्सेना तथा प्लेसमेंट ट्रेनिंग हेड डा. विकास जैन ने राजीव एकेडमी के पूर्व छात्रों द्वारा अपने उद्योग स्थापित करने की दिशा में की जा रही पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राजीव एकेडमी की विशिष्ट तकनीक और शैली के चलते ही यहां के अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं जाब प्लेसमेंट साक्षात्कार में सफल हो रहे हैं।

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मथुरा। यमुना रक्षक दल ने ऐलान किया है कि वे वृन्दावन में यमुना में गिरने वाले नालों को लेकर 1 फरवरी से बड़ा आंदोलन करेंगे और नालों को टैप करने का कार्य शुरू कर देंगे। यह जानकारी प्रदेश अध्यक्ष विवेक महाजन ने दी। उन्होंने कहा कि काफी समय से यमुना रक्षक दल यमुना प्रदूषण मुक्ति को लेकर आंदोलन करता आ रहा है लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगा है। प्रशासन पूरी तरह सुस्त पड़ा है। उसे यमुना प्रदूषण से कोई मतलब नहीं है लेकिन यमुना रक्षक दल इस पर चुप नहीं बैठेगा।  

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परिवहन नेटवर्क का विस्‍तार वृद्धि के लिए पहली जरूरत है और शहरीकरण उसका लगभग निश्चित परिणाम है। इसलिए, अब जबकि भारत वृद्धि के पथ पर अग्रसर है, हमारे यहां शहरीकरण का बढ़ता स्‍तर और शहरों में जनसंख्‍या का भारी घनत्‍व है। जैसा कि अपेक्षित था, वाहनों की संख्‍या में समग्र व़द्धि के साथ हम देश में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्‍तार होते भी देख रहे हैं।   भारत का सड़क नेटवर्क आज दुनिया के विशालतम सड़क नेटवर्क्‍स में से एक है। वर्ष 2003-13 की अवधि के दौरान मोटर वाहनों की तदाद यहां 10.5 प्रतिशत की संयोजित वार्षिक वृद्धि दर की रफ्तार से बढ़ी है। यह व़द्धि जहां पूरी तरह व्‍यवस्थित और उभरती अर्थव्‍यवस्‍था के लिए आवश्‍यक भी है, वहीं चिंता की बात यह है कि सड़क पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए हमने खुद को तैयार नहीं किया है। हमने समकालीन यातायात नियम बनाने और इन नियमों को अपनाने के बारे में जागरूकता जगाने सहित आधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणालियां और पद्धतियां भी नहीं अपनाईं। इसके परिणामस्‍वरूप देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्‍या बहुत अधिक है और सड़क यातायात में सुरक्षा चिंता का विषय है और सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य का प्रमुख मुद्दा बन चुकी है। देश में हर एक घंटे में 56 सड़क दुर्घटनाएं और उनमें 16 व्‍यक्तियों की मौत होती है। सड़क यातायात की ‘सुरक्षित प्रणाली’ सुनिश्चित करने के लिए, सड़क अवसंरचना में वृद्धि, वाहनों में सुरक्षा प्रणाली विकसित करना, चालकों और सड़क का उपयोग करने वालों के व्‍यवहार में परिवर्तन लाना और आपातकालीन सेवाएं और दुर्घटना के बाद की सेवाएं उपलब्‍ध कराया जाना आवश्‍यक है। सड़क सुरक्षा में ये चार-ई शामिल हैं- शिक्षा, प्रवर्तन, अभियांत्रिकी, पर्यावरण और आपातकालीन सेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2009 में सड़क सुरक्षा पर अपनी पहली वैश्विक स्थिति रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं की दुनियाभर में “सबसे बड़े कातिल” के रूप में पहचान की। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल दुनियाभर में सड़क हादसों में 1.2 मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है और 50 मिलियन लोग इससे प्रभावित होते हैं। सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी लाने के लक्ष्य के साथ सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई का दशक “(2011-2020)” अंगीकृत किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में की है, जो सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में सबसे आगे है, जहां अनुमानित तौर पर प्रति मिनट एक सड़क दुर्घटना होती है और हर चौथे मिनट में सड़क दुर्घटना में एक मौत होती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार हर साल एक लाख से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है। अकेले 2014 में ही सड़क दुर्घटनाओं में 1.39 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। सरकार ने वर्ष 2010 में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति में अपनाई, जिसमें सड़क सुरक्षा के विभिन्‍न पहलुओं के बारे में जागरूकता जगाने के महत्‍व और इसके सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों और सड़क सुरक्षा सूचना डाटाबेस बनाने पर बल दिया गया। सरकार यातायात उल्‍लंघनों के लिए कड़ी दंडात्‍मक कार्रवाई और जुर्माने सहित सड़क परिवहन और सुरक्षा विधेयक, 2014 का मसौदा भी लेकर आई और प्रस्‍तावित कानून में सड़क सुरक्षा का एक प्रमुख संघटक भी बनाया गया। विधेयक, 2014 जनता की टिप्‍पणियों के लिए अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्‍ट किया गया है। यह विधेयक सड़क परिवहन अवसंरचना के आधुनिकीकरण, सड़क पर चलने वाले वाहनों की गुणवत्‍ता में सुधार और पूरे देश के लिए एकीकृत ड्राइवर लाइसेंसिंग सिस्‍टम के माध्‍यम से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्‍त करने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। प्रस्‍तावित अधिनियम में सभी यात्रियों के लिए हेलमेट और सीट बेल्‍ट का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है। दुपहिए वाहनों के लिए पिछली सीट पर बैठने वाले यात्रियों के लिए भी हेलमेट, सीट बेल्‍ट और उच्‍च दृश्‍यता वाले कपड़े पहनना जरूरी बना दिया गया है। बच्‍चों की सुरक्षा को भी ध्‍यान में रखते हुए बाल सुरक्षा और रोकथाम प्रणालियों के उपयोग को अनिवार्य बनाया गया है। प्रस्‍तावित बिल में पहले पांच वर्षों के दौरान दो लाख जीवन बचाने और सड़क परिवहन की सुरक्षा और निपुणता में सुधार करके राष्‍ट्रीय सकल घरेलू उत्‍पाद को चार प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है। मेक इन इंडिया के तहत इसका उद्देश्‍य सड़क परिवहन क्षेत्र में अधिक निवेश करके 10 लाख रोजगार सृजन करने का है। सरकार ने कुछ राजमार्ग खंडों जैसे राष्‍ट्रीय राजमार्ग-8 के गुड़गांव/जयपुर खंड पर 2013-14 में, रांची राष्‍ट्रीय राजमार्ग-33 के रांची-राड़गांव-महुलिया खंड और राष्‍ट्रीय राजमार्ग-8 के वडोडरा, मुंबई खंड पर 2014-15 में पहले ही सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में बिना पैसे के इलाज के लिए एक पायलट परियोजना शुरू कर रखी है। गोल्‍डन आवर अर्थात पहले 48 घंटों के दौरान सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों का जीवन बचाने के लिए तुरंत उचित चिकित्‍सीय सहायता उपलब्‍ध कराने की यह एक पहल है। जिसमें खर्च की सीमा 30 हजार रुपये है। इन राजमार्गों के इन खंडों में 24x7 टॉल फ्री नंबर 1033 को भी एक्टिवेट किया गया है। पायलट प्रोजेक्‍ट के आंकड़ों को सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों के कैसलैस इलाज के लिए पेन-इंडिया योजना को तैयार करने में उपयोग किया जाएगा। सड़क सुरक्षा जनता की भलाई के लिए है। सड़क सुरक्षा नीति और प्रस्‍तावित अधिनियम, दोनों में जनता के बीच जागरूकता फैलाने और सड़क यात्रा को सुरक्षित बनाने में जनता की भूमिका के बारे में उसे शिक्षित करने पर जोर दिया गया है।इस बात को ध्‍यान में रखते हुए विभिन्‍न हितधारकों को जागरूक बनाने के लिए हर साल जनवरी में ‘सड़क सुरक्षा सप्‍ताह’ का आयोजन किया जाता है। इस अभियान का उद्देश्‍य मात्र साधारण नियम लागू करते हुए सुरक्षित सड़क यात्रा की जरूरत उजागर करना है। सड़क सुरक्षा के तौर-तरीकों और आवश्‍यकताओं के बारे में विविध प्रकार के कार्यक्रम जैसे वाहन चलाते समय हेल्‍मेट्स या सीट बेल्‍ट्स का इस्‍तेमाल, मेडिकल जांच शिविर, शैक्षिक संस्‍थानों में ड्राइविंग प्रशिक्षण कार्यशालाओं और प्रतिस्‍पर्धात्‍मक कार्यक्रमों का आयोजन, विभिन्‍न समूहों जैसे सड़क पर यात्रा करने वालों, चालकों तथा स्‍कूली बच्‍चों, छात्रों और युवाओं के समूहों को लक्षित करते हुए किया जाता है।दूसरी ओर, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाने, यातायात व्‍यवस्‍था के उचित प्रबंधन और उत्‍सर्जन नियमों का सख्‍ती से पालन कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। हर साल जागरूकता जगाने के लिए एक विशिष्‍ट विषय का चयन किया जाता है। कुछ ऐसे विषयों में ‘’स्‍थायी आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए सुरक्षा की संस्‍कृति की रचना कीजिए’’, ‘’ सुरक्षा महज एक नारा नहीं है, जीवन शैली है’’, ‘’ वॉक फॉर रोड सेफ्टी’’, ‘’स्‍टे अलाइव, डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव’’ और ‘’सड़क सुरक्षा मिशन है, विराम नहीं’’ आदि पहले ही सप्‍ताह के आयोजन के दौरान प्रदर्शित किए जाते रहे हैं। 27वां सड़क सुरक्षा सप्‍ताह 11 जनवरी (सोमवार) से 17 जनवरी (रविवार) तक आयोजित किया गया। इस साल के अभियान के दौरान ‘’रोड सेफ्टी- टाइम फॉर एक्शन’’ पर ध्‍यान केंद्रित किया गया। सड़क सुरक्षा के लिए अभियान सिर्फ तभी सफल हो सकता है, जब सभी हितधारक जैसे परिवहन, बीमा, स्‍वास्‍थ्‍य, विधि व्‍यवसायियों, राजमार्ग अभियंताओं और वाहनों के निर्माताओं को साथ जोड़ा जाए। बच्‍चों तथा स्‍कूल एवं कॉलेज के छात्रों को शुरूआत से ही सड़क उपयोग करने के तरीका सिखाया जाना चाहिए। सड़क सुरक्षा शिक्षा स्‍कूल पाठ्यक्रम का भाग होना चाहिए ताकि सुरक्षा शुरुआत से ही आदत और जीवन शैली बन सके।  (लेखिका ऑल इंडिया रेडियो की सेवानिवृत्‍त डीजी - समाचार हैं। यहां व्‍यक्‍त किए गए विचार उनके अपने हैं)

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नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग द्वारा 27 सितम्‍बर-2015 को आयोजित राष्‍ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौसेना अकादमी परीक्षा (II) - 2015 के लिखित भाग के परिणाम के आधार पर 2 जुलाई, 2016 से आरंभ होने वाले राष्‍ट्रीय रक्षा अकादमी के सेना, नौसेना तथा वायु सेना स्कंधों के 136वें पाठयक्रम तथा भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनएसी) के 98वें पाठयक्रम में प्रवेश हेतु उम्मीदवारों की सूची घोषित कर दी गई है। इस सूची में जिन उम्मीदवारों के अनुक्रमांक दर्शाए गए हैं उन सभी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी अनंतिम है। परीक्षा में उम्‍मीदवारों के प्रवेश की शर्तों के अनुसार “उन्‍हें अपनी आयु तथा शैक्षणिक योग्‍यता के संबंध में अपने मूल प्रमाण-पत्र सेवा चयन बोर्ड द्वारा साक्षात्‍कार के समय संबंधित सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के समक्ष प्रस्‍तुत करने होंगे।” उम्मीदवार अपने मूल प्रमाण-पत्र संघ लोक सेवा आयोग को कदापि न भेजें। किसी अन्य प्रकार की जानकारी के लिए उम्मीदवार किसी भी कार्य दिवस में आयोग के गेट ‘सी’ के पास सुविधा काउन्टर से स्वयं आकर या दूरभाष संख्या 011-23385271 / 011-23381125 / 011-23098543 पर संपर्क कर सकते हैं। परिणाम, संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट Upsc.gov.in पर भी उपलब्ध हैं। उम्‍मीदवारों के अंक-पत्रक, अंतिम परिणाम के प्रकाशित होने की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर (एसएसबी साक्षात्‍कारों के समाप्‍त होने के बाद) आयोग की वेबसाइट पर प्रदर्शित कर दिए जाएंगे और तीस दिन की अवधि के लिए वेबसाइट पर उपलब्‍ध रहेंगे।

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