मथुरा

मथुरा। वृन्दावन नगर में चल रहे कार्तिक मास एवं आगामी अक्षय नवमी व देवोत्थान एकादशी महोत्सव को मद्देनजर पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम ने सफाई व्यवस्था को दुरूस्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और सफाई निरीक्षकों की एक बैठक कैंप कार्यालय पर ली। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्पूर्ण परिक्रमा मार्ग को साफ-सुथरा बनाने के लिए निर्देश दिए। कैंप कार्यालय पर पालिकाध्यक्ष ने सफाई निरीक्षक अवधेष यादव, लिपिक राजकुमार और सफाई नायकों को संबोधित करते हुए चीरघाट पर अधूरे पड़े परिक्रमा मार्ग निमार्ण कार्य के स्थान पर बालू एवं मिटटी डालने के आदेश दिये जिससे कि परिक्रमार्थियों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पडे़। इस दौरान सफाई नायक धर्मेंद्र, राजू द्वितीय, धर्मेश, अनिल, राजू प्रथम, अषोक कुमार, जिम्मी, लक्ष्मण आदि उपस्थित थे।  

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गोपाष्टमी के अवसर पर गौचारण लीलाओं का प्रदर्शन करते कलाकार  मथुरा। पूरे जनपदभर में आज गोपाष्टमी के अवसर पर गौचारण लीलाओं का आयोजन, शोभायात्रा और सामूहिक गौ पूजन किया गया। शोभायात्रा भी निकाली गयी। इस अवसर पर कृष्ण, बलराम की आकर्षक झाकियां और गायों को श्रृंगार और पूजा अर्चना देखने लायक थी।  स्थान-स्थान पर गौ पालक और गौ भक्त गायों का श्रृंगार और फूल मालाओं से उनकी पूजा करते देखे गये। कई स्थानों पर सामूहिक गौ पूजा और गायों का श्रंृगार करते गौ भक्त दिखे। गौचारण के मौके पर ब्रज के विभिन्न स्थलों पर गौचारण पूजा, लीला और शोभायात्राआंे के आयोजन किये गये हैं। मंदिर द्वारिकाधीश के बाहर भी आज गायों की पूजा अर्चना करते श्रद्धालु देखे गये। परिषद के मुख्य संरक्षकगण, पदाधिकारियों द्वारा श्रीकृष्ण बलराम के स्वरूपों की आरती एवं पुष्पहार अर्पित करते हुये गौचारण लीला का शुभारंभ हुआ। इसके बाद विश्रामघाट के मुख्य द्वार पर गौचारण लीला का आयोजन किया गया जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने कुलगुरू गर्गाचारी की अनुमति से गऊ चाराने के लिये निकले। इस दौरान सामूहिक गौ पूजन किया गया। गौचारण लीला को वृन्दावन से आये श्रीहितरास लीला मण्डल के स्वामी बाबूलाल दुबे ने मंचन किया। इसके बाद मध्यान्ह श्रीकृष्ण बलराम की गौचारण की विशाल शोभायात्रा निकाली गयी जिसमें ठाकुरजी के स्वरूप सजे हुये घोड़े पर सवार थे।

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मथुरा। श्रीजी बाबा आश्रम पर परमसंत राजा बाबा और अमित भारद्वाज द्वारा आश्रम में सामूहिक रूप से गौ पूजा की गयी। प्रातः बेला में श्रीजी बाबा आश्रम स्थित गौशाला की समस्त गायों को स्नानादि कराकर मेंहदी, ओढनी, वंदनी एवं पुष्पहारों से आकर्षक रूप से श्रृंगारित कर सामूहिक पूजन किया गया। इस अवसर पर गौमाता की आरती उतारी गयी। इसके बाद आयोजित गौ संरक्षण व संवर्द्धन विषय पर आयोजित गोष्ठी में संत वैष्णवाचार्य संत राजा बाबा ने कहा कि गौ पालन व गौ सेवा हमारी सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। श्रीमदभागवत कथा आयोजन समिति संस्थापक पं. अमित भारद्वाज ने कहा कि गौमाता का सच्चा पूजन उन्हें उचिन संरक्षण प्रदान कर संवर्द्धन करना है। इस अवसर पर शिक्षाविद पं. रमेश शर्मा, संजय शर्मा पिपरोनियां, राधाकंात गोस्वामी, मुकुन्द गोस्वामी, राजेश पाठक, मधुसूदन गोस्वामी, जगदीश अग्रवाल, लक्ष्मीकांत शास्त्री, आकाशवाणी के पूर्व वरिष्ठ उदघोषक राधाबिहारी आदि ने गायों की महत्ता पर प्रकाश डाला। गोष्ठी का संचालन पं. शशांक पाठक ने किया। इससे पूर्व गायों पर हल्दी, मेंहदी, चंदन के थापे लगाये गये और दुपटटा पहनाकर गायों को श्रंृगारित किया गया।

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मथुरा। दुर्बाषा ऋषि गौसेवा संस्थान द्वारा गोपाष्टमी की पूर्व संध्या पर गत वर्ष की भांति गौचारण लीला का वृहदवन स्थित गौशाला पर भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कीर्तिपाल शर्मा द्वारा की गयी। पारम्परिक वार्षिक चर्तुदिवसीय मेला व सांस्कृतिक कार्यक्रम गौचारण लीला द्वारा आगाज हुआ। ग्राम विशनगंज यमुनापार स्थित कालिंदी कृष्ण मिलन मंदिर पर संपन्न हुये सांस्कृतिक कार्यक्रम व भजन संध्या में आसपास के ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा। गौमाता की पूजा की होड़ लगी रही। कहा जाता है कि गाय में 33 करोड़ देवता विद्वमान रहते हैं। इसीलिये गौसेवा से 33 कोटि देवताओं की पूजा का पुण्यफल मिलता है। इस अवसर पर कीर्तिपाल शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को गौसेवा से प्र्राप्त लाभ के बारे में अवगत कराते गौरक्षा का संकल्प दिलाया। संस्था के महामंत्री पं. जितेन्द्र चतुर्वेदी ब्यास ने गौरस ;दूधद्ध के अतिरिक्त गौमूत्र से चिकित्सा का भी महत्व बताया। इस अवसर पर सुखदेव दास ग्वारिया बाबा, महेन्द्र नाथ, प्रभात चतुर्वेदी, विशम्भर निषाद, सुरेन्द्रनाथ, राम निषाद, जमील अहमद, अक्को प्रधान, रत्नेश शर्मा, हरीबाबू, रिषभ शर्मा, प्रवीन शर्मा, चित्रा देवी, पारूल, सूखा महावन, पवन अग्रवाल, त्रिलोकी ब्यास, गोपालजी, भूपेन्द्र चतुर्वेदी, गप्पी, नगेन्द्र नाथ उपस्थित रहे। संचालन विपिन स्वामी द्वारा किया गया।

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आज चीन में बनी चीज़ें दुनिया के बड़े – बड़े मुल्कों में धूम मचा रही हैं। सारी दुनिया चीनियों की कर्ज़दार होती जा रही है। हमारे देश की सीमाओं पर दांत गड़ाकर देखने वाले चीनी अपने उत्पाद से हमारे गांवों में भी पहुंच गए हैं। यहां ऑस्ट्रेलिया में भी जहां जाओ चीनी लोगों का बोलबाला दिखाई देता है। मजेदार बात यह है कि चीनी लोगों को कोई पसंद नहीं करता मगर इनके माल को खरीदने के लिए लोग सदैव आगे रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में सोना खोदकर अपनी तकदीर बदलने वाले दर्जनों देशों के लोगों में चीनियों की मौजूदगी इस मायने में विशेष महत्व रखती है कि मेहनती और कर्मठ चीनियों को कभी किसी ने पसंद नहीं किया। वे सदैव गोरे मजदूरों की आंख की किरकिरी बने रहे। सोने की दौड़ में चीनियों के शामिल होने पर तरह – तरह के प्रतिबन्ध लगाए गए। उनके खिलाफ सरकारी नियम बने। गोरों ने इनपर हिंसक हमले किए लेकिन ऑस्ट्रेलिया के सोना मैदानों में चीनी पैर अंगद के पैर साबित हुए। यूरोपियनों ने चीनियों के रहन – सहन, भाषा और इनकी तहजीब पर सदैव नाक – भौं सिकोड़ी। साल 1855 में ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इनके आगमन को हतोत्साहित करने उददेश्य से टैक्स लगा दिया। जिस जहाज पर सवार होकर ये मेलबर्न के ‘बिलियम टाउन’ बन्दरगाह पर उतरते थे, उस जहाज के मालिक और यात्रियों को टैक्स देना पड़ता था लेकिन चीनी नागरिकों ने ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक रुख की परवाह किए बिना अपने ऑस्ट्रेलिया आगमन को जारी रखा। चीनी उस्ताद थे। वे मेलबर्न पोर्ट के स्थान पर एडिलेड या अन्य समुद्री किनारों पर उतरने लगे। वहां सड़क मार्ग से बेलारेट, बेन्डिगो या कैसलमाइन के सोना मैदानों की ओर कूच करते थे। एक इतिहासकार के अनुसार साल 1859 तक 42 हजार चीनी ऑस्ट्रेलिया आ चुके थे। चीनी अपनी भाषा, धर्म और रहन – सहन में अजूबे माने जाते थे। इन्हें अफीम का शौक था और जुआ खेलने में माहिर थे। यूरोपियन मजदूरों ने इन्हे सदैव से टेढ़ी नजर से ही देखा। चालाक इतने कि जो यूरोपियन मजदूर खुदाई करते वक्त सोना न मिलने से निराश हो जाते और अधखुदे गड्ढे को छोड़ दूसरी जगह चले जाते, मौका देखकर चीनी उनके गड्ढे में कूद जाते और सोना निकाल लाते। इसके लिए उन्हें कोई लाइसेंस शुल्क भी नहीं चुकाना पड़ता था। गोरों को इनकी ये हरकतें परेशान करने लगीं। तब इनपर अत्याचारों का सिलसिला शुरू हुआ। सोना मैदानों में घूमते पुलिस के घुड़सवार चीनियों को बिना कसूर हड़काते… पीटते…। यूरोपियन मजदूरों ने षडयन्त्र कर इनके सामान को नदी में फेंकना, इनपर हिंसक हमले करना आदि प्रारम्भ किया। चीनी पिटते और मुकाबला भी करते। गोरे जब इनका मनोबल नीचे नहीं गिरा पाए तो उन्होंने अपना एक संगठन बनाया ‘माइनर प्रोटेक्सन लीग।’ गोरों के इस चीनी विरोधी संगठन ने एक झण्डा भी बनाया और सोना मैदानों में चीनियों के खिलाफ आन्दोलन शुरू हुए। उन्होंने उत्तेजक नारे लगाए, ‘खदेड़ दो, चीनियों को’, ‘रोल अप, रोल अप, नो चाइनीज।’ इन नारों ने सोना खोदते गोरे मजदूरों को खूब भड़काया। चीनी और गोरों में आमने – सामने की हिंसक झड़पें हुईं। पुलिस पिटते चीनियों को बचाने का नाटक तो करती पर रुख चीनी विरोधी ही रहता। यूरोपियनों के हमलों से चीनी घबराए जरूर पर डरे नहीं। उन्होंने समूह में रहकर अपनी ताकत बढ़ाने की नीति अपनाई। ऐसे टेन्ट इस्तेमाल किए जिन्हें आसानी से उखाड़कर दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता था। साल 1855-56 में बेहिसाब चीनी ऑस्ट्रेलिया आए। वे अपने साथ सोना तलाशने के सभी उपकरण रखते थे। चीनी पुरुष अपने साथ महिलाओं को नहीं रखते थे। गोरों को अच्छा मौका मिला। यूरोपियनों ने इनपर अनैतिकता को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। अन्य आरोप भी लगाए जैसे कि अपने देश में पैसा भेज रहे हैं या स्थानीय विकास में सहयोग नहीं दे रहे हैं आदि… आदि। यूरोपियनों से चीनी घिर जाते तो टूटी-फूटी अंग्रेजी में कभी गिड़गिड़ाते, कभी मुकाबला करते। आशय यह कि जैसी परिस्थिति होती उसके मुताबिक वे अपने आपको ढाल लेते। गोरों के भरपूर विरोध के बावजूद जमे रहने पर विक्टोरिया पार्लियामेन्ट ने कानून पारित कर सोना उगलती पहाड़ियों पर चीनियों की मौजूदगी को प्रतिबंधित कर दिया। यूरोपियनों को इससे बल मिला। 30 जून 1861 को हजारों यूरोपियन ने हथियारों से लैस होकर ‘नो चाइनीज’ का नारा लगाते चीनियों की बस्ती की ओर कूच किया। बैन्ड बाजों की आवाजों के मध्य चीनी उजाड़ दिए गए, औरतों को पीटा, उनके बच्चों की हत्या की, बलात्कार किए। यह नृशंस तांडव पूरे दिन हुआ। ‘सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ ने इस कत्लेआम की निंदा की और हत्यारे सिपाहियों को ‘घोड़ों पर सवार दैत्य’ की संज्ञा दी। ये कुछ किस्से हैं जो यह बताने के लिए लिखे गए हैं कि चीनियों में आगे बढ़ने की ललक इनके स्वभाव में है। मेलबर्न में चीनियों का विशाल मार्केट देख इनकी सम्पन्नता के दर्शन होते हैं। यहां के कैसिनो में चीनी महिलाएं बड़ी तादाद में जुआ खेलती दिखाई देती हैं। अब तो ऑस्ट्रेलिया की सरकार में भी चीनी शामिल हैं। यहां की सरकार आबादी बढ़ाने के लिए सदैव से प्रयासरत है। लोग ज्यादा बच्चे पैदा करें सो तीन बच्चे पैदा करने के लिए नारा दिया गया है… ‘एक बच्चा मां के लिए, दूसरा पिता के लिए और तीसरा देश के लिए’। अन्य देशों से आए लोगों को नागरिकता लेने वाले देशों में पिछले कई सालों से चीनी सबसे आगे थे। गत वर्ष भारतवासी आगे रहे। मतलब साफ़ है कि ऑस्ट्रेलया के प्रति हमारा मोह बढ़ रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो ऑस्ट्रेलिया में भारतवंशी भी चीनी जैसे झुण्ड के झुण्ड दिखाई देंगे। परदेश में अपने लोग तरक्की करें तो यह भी अपने देश की तरक्की कहलाएगी। इस वैश्वीकरण के युग में ‘ब्रेन ड्रेन’ की बातें निरी फिजूल हैं…।

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मां वैष्णो देवी विद्या मंदिर में बाल दिवस के अवसर पर हुआ आयोजन मथुरा। नरहौली, वैष्णो नगर स्थित मां वैष्णो देवी विद्या मंदिर में बाल दिवस के अवसर पर जादूगर आकाश सरकार द्वारा दिखाए गए हैरतअंगेज जादुई कारनामों ने सभी उपस्थित विद्यार्थियों व शिक्षकों का भरपूर मनोरंजन किया। इन जादू के आइटमों को देखने के लिए दर्शक घंटों तक एक ही स्थान पर डटे रहे। शो का मुख्य आकर्षण जादूगर द्वारा मुंह से एक के बाद एक निकाले गए कई ब्लेडों का जादू रहा। सर्वप्रथम जादूगर ने हाथ की सफाई दिखाते हुए बनाई गई फूलों की माला से मुख्य अतिथि केदार नाथ गौतम का स्वागत किया। इसके बाद शुरू हुए जादुई शो में तीन रूमालों को जोघ्कर तिरंगा बनाना, अंगूठी गायब कर टमाटर से निकालना, पैसों से थैला भरना, उपस्थितों पर पुष्पों की वर्षा, बच्चों को मैजिक बैग से टॉफी व चॉकलेट बांटना, बडे़ गिलास से छोटे गिलास में दूध भरना आदि करतब प्रमुख रहे। अंत में विद्यालय प्रबंधक विकास गौतम ने जादूगर आकाश का पटुका पहनाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का विशेष सहयोग रहा।

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 पंचकोसीय परिक्रमा में उमड़ा भक्तों का सैलाब मथुरा। आज अक्षय नवमी के पर्व पर सुबह से ही मथुरा की पंचकोसीय परिक्रमा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रतिवर्ष अक्षय नवमी के पर्व पर मथुरा के लोग पांच कोस की परिक्रमा करते हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व रहता है। परिक्रमास में नर-नारि और बच्चे काफी उत्साह और श्रद्धा के साथ परिक्रमा देते दिखाई दिये। पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग में मानव श्रृंखला बन गयी।  लेकिन श्रद्धालुओं का कहना था कि परिक्रमा मार्ग में कंकड़ों को न हटाने से श्रद्धालुओं को बाधायें हुयीं। अक्षय नवमी पर्व पर आज यमुना किनारे दान-पुण्य करने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। शहर और देहात से बच्चे, वृद्ध भी परिक्रमा लगाते देखे गये। वैसे तो यह क्रम गोपाष्टमी के दिन से ही शुरू हो गया था लेकिन आज मुख्य पर्व होने के कारण पूरे पांच कोस में श्रद्धालुओं की संख्या देखने लायक थी। सरस्वती कुण्ड पर पड़ाव स्थल होने के कारण जहां श्रद्धालु मां सरस्वती, विष्णु भगवान और गणेशजी के दर्शन कर वहां विश्राम कर रहे थे वहीं कंकाली मंदिर पर भी विश्राम का पड़ाव देखा गया। चामुण्डा देवी मंदिर, गायत्री तपोभूमि, गोकुरण नाथ और यमुना किनारे मंदिरों पर भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते देखे गये। यमुना मंे स्नान भी श्रद्धालुओं ने किया।

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ईओ का गैरजिम्मेदाराना बयान मथुरा। नगर पालिका परिषद के रिकाॅर्ड में लगी आग रहस्यमयी होकर रह गई है। पालिका अधिशाषी अधिकारी राजपाल यादव का कहना है कि जलने वाला रिकाॅर्ड महत्वपूर्ण नहीं था, उसे तो चार-पांच साल पूर्व ही जला दिया जाना चाहिए था। अब सवाल यह उठता है कि ईओ का यह बयान जिम्मेदाराना है, गैरजिम्मेदाराना? यह तय करना प्रशासन के बड़े अधिकारियों का काम है। लेकिन इतना तय है कि किसी भी रिकाॅर्ड को नष्ट करने के लिए उसकी अनुमति लेना अथवा नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में उसका प्रस्ताव पारित कराना, जहां तक है आवश्यक था। अब जब रिकाॅर्ड जला है तो लोगों को आशंका है कि एआरटीओ की भांति यहां भी रिकाॅर्ड के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल चलेगा।  नगर पालिका परिषद के रिकाॅर्ड में पिछले दिनों लगी आग के मामले में अज्ञात के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और चैकीदार ईस्माइल को निलंबित करने से आगे कुछ भी नहीं बढ़ा है। मामला जबकि बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य, टैक्स जैसे मामलों का रिकाॅर्ड जलना बताया जा रहा है जबकि कुछ लोग यह भी कह रहे है कि राजकीय इंटर कालेज की जमीन से जुड़े दस्तावेज भी आग में खाक हो चुके हैं। यह लम्बे अर्से बाद यह पहला मौका है कि जब नगर पालिका के रिकाॅर्ड में आग लगी। इस संबंध में नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी यादव से पूछा गया तो उनका कहना था कि रिकाॅर्ड की सूची तैयार की जा रही है। हालांकि कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं जला है। ईओ यादव से जब पूछा गया कि जब अभी सूची बन रही है, तो वे कैसे कह सकते हैं, कि महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं जले ? इस पर वह निरोत्तर हो गए। उनका कहना था कि जो रिकाॅर्ड जला है, उसे चार-पांच वर्ष पूर्व ही जला देना चाहिए था। अब सवाल यह उठता है कि क्या ईओ ने इसकी पूर्व में किसी उच्च अधिकारी से अनुमति ली? अथवा पालिका बोर्ड की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित कराया गया। पिछले लम्बे पालिका इतिहास में पालिका रिकाॅर्ड को जलाने की कहीं भी कोई व्यवस्था रहीं, नहीं तो फिर ईओ का यह गैरजिम्मेदाराना बयान, क्या उनकी लापरवाही को उजागर नहीं करता।  10 का बल्व 87 रुपए मजदूरी मथुरा। शहर को रोशन करने के लिए नगर पालिका जहां दस रुपए का बल्व लगाती है, वहीं लगाने वाले को 87 रुपए मजदूरी के नाम पर अदा करती है। यह सब मामला घपलेबाजी का नहीं तो और क्या है?  पालिकाध्यक्षा अपने घर का बल्व बदलवाने में इतनी मजदूरी खर्च करती है। पालिका रिकाॅर्ड के मुताबिक 1750 रुपए प्रतिदिन शहर के विभिन्न गली-मौहल्लों में बल्व बदलने वाले श्रर्मिकों को दिए जा रहे हैं, जो रिकाॅर्ड के मुताबिक एक दिन में 20 से अधिक बल्व नहीं बदलते। आंकड़ों के खेल में देखें तो 10 रुपए के बल्व पर 87 रुपए की मजदूरी वहन कर नही है। पालिका सभासद और पालिकाध्यक्ष इस घपलेबाजी में एकसाथ कदम ताल करते नजर आ रहे हैं।   

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मथुरा। मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने चुनाव कार्य में लगे सभी प्रभारी अधिकारियों से कहा कि विगत चुनाव में यदि किसी भी प्रकार की दिक्कतें आयी हांे तो प्रयास इस बात का होना चाहिए कि उसकी पुनरावृत्ति न हो ताकि चुनाव शान्ति पूर्ण व पारदर्शी ढ़ंग से सम्पन्न हो सके। श्री वर्मा आज यहां कलेक्ट्रेट के सभागार में प्रभारी अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे।   श्री वर्मा ने सभी अधिकारियों से कहा कि कन्ट्राॅलरूम में चुनाव सम्बन्धी सभी सूचनायें उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए यह नितान्त आवश्यक है कि जो भी आदेश जारी किये जाय उसकी एक प्रति कन्ट्राॅलरूम को अवश्य उपलब्ध करायी जाय। उन्होने कहा कि चुनाव सामग्री पर्याप्त संख्या में हो उसमें किसी भी प्रकार की कमी न हो पाये इसपर पहले से ही विचार कर लिया जाय। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत चुनाव हेतु प्रथम चरण के मतदेय स्थलों के निर्माण हेतु धनराशि भेज दी जाय ताकि समय से मतदेय स्थल बनाये जा सकें। सूचनायें अपडेट कराये जाने के सम्बन्ध में फीडिंग की जिम्मेदारी सहायक अभिंयता ग्राम्य विकास को सौंपी गयी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने यह भी निर्देश दिये कि कन्ट्राॅलरूम के प्रभारी उप कृषि निदेशक को प्रभारी अधिकारी पैकेटिंग तथा डीएफओ को कन्ट्राॅलरूम का प्रभारी अधिकारी बनाया जाय।  बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, कानून व्यवस्था व वित्त एवं राजस्व अजय कुमार अवस्थी, सुरेन्द्र शर्मा व महेन्द्र प्रसाद, नगर मजिस्ट्रेट विजय कुमार, जिला विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी, परियोजना निदेशक डीआरडीए एके बाजपेयी, जिला पूर्ति अधिकारी केपी मिश्र, सहायक निबन्धक, सहकारिता विनोद कुमार पटेल, जिला मनोंजनकर अधिकारी एसपी सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद यादव, कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनीता वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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 जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक लेती सांसद हेमामालिनी सांसद ने विकास योजनाओं एवं सांसद गाॅव रावल के विकास कार्यो की समीक्षा की विकास कार्यो की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाय: सांसद मथुरा। जनपद की संासद श्रीमती हेमा मालिनी ने गोद लिय गये रावल तथा जनपद में उनके विशेष प्रयास से लायी गयी प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि योजनायें किस स्तर पर लम्बित हैं उसकी सूची उन्हें उपलब्ध करायी जाय ताकि वह प्रयास करके योजनाओं में आ रही रूकावटों को दूर करा सकें। श्रीमती मालिनी आज यहां कलेक्ट्रेट के सभागार में इस सम्बन्ध बुलायी गयी बैठक की अध्यक्षता कर रही थी।  बैठक में सांसद ने कहा कि उनके द्वारा गोद लिय हुए रावल गाॅव  तथा उनके विशेष प्रयास से विकास योजनायें जनपद में प्रस्तावित हैं उनमें आ रही रूकावटों के बारें में उन्हें अवगत कराया जाय ताकि वह मुख्य सचिव से मिलकर शासन स्तर पर आ रही रूकावटों को दूर करा सकें। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं के इस्टीमेट नहीं भेजे गये उन्हें तुरन्त भेज दिया जाय। उन्होंने कहा कि योजनाओं के सम्बन्ध में जो भी पत्राचार शासन स्तर पर किया जाता है उसकी एक प्रति उन्हें भी भेजी जाय ताकि वे अपने स्तर से प्रयास कर सकें। सांसद ने इस बात पर विशेष बल देते हुए कहा कि विकास कार्यो की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाय। शौचालय निर्माण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार के माॅडल के अनुसार शौचालय बनाये जायें।   बैठक में थीम पार्क के लिए पानी गाॅव खादर में खसरा नं. 512 की 43 एकड़ सरकारी जमीन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। सांसद द्वारा थीम पार्क के लिए जमीन कम होने की बात कही जिस पर मुख्य विकास अधिकारी श्री मनीष कुमार वर्मा ने तहसीलदार मांट को निर्देश दिये कि खसरा नं. 513 व 514 की जमीन का परीक्षण भी करा लिया जाय और उसे भी थीम पार्क के लिए प्रस्तावित किया जाय। श्री वर्मा ने यह भी निर्देश दिये कि थीम पार्क को जोड़ने वाली सड़क के लिए भी जमीन देखकर दो दिन में बताया जाय तथा संासद प्रतिनिधि को भी मौके पर ले जाकर दिखा दिया जाय। श्री वर्मा ने अधिकारियों से यह भी कहा कि सांसद द्वारा इस जनपद के विकास के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है तो हम लोगों को अधिक रूचि लेकर कार्य करना चाहिए।   बैठक में सांसद के साथ आये डीन कोलम्बिया विश्व विद्यालय निरूपम बाजपेयी, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अजय कुमार अवस्थी, उप जिलाधिकारी महावन चन्द्र विजय सिंह, जिला विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास डा. एके बाजपेयी, जिला पंचायतराज अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद यादव सहित जल निगम, लोक निर्माण विभाग, सेतु निगम आदि विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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