मथुरा

ब्रज विरासत तथा उसके स्थापत्य सौन्दर्य को बनाये रखना प्रथम उद्देश्य श्रीपालीवाल मथुरा। ब्रज के सर्वांगीण क्षेत्रों, उसके सांस्कृतिक, पौराणिक, धार्मिक सौन्दर्य को विकसित करना ही बोर्ड का उद्देश्य है, यह बात आज ब्रज नियोजन तथा विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आरडी पालीवाल ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में बोर्ड की प्रथम बैठक में कही। बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री पालीवाल ने कहा कि आज की बैठक बोर्ड के प्रारम्भिक स्तर, उद्देश्यों की जानकारी देने तथा विभागों के आपसी तालमेल को स्पष्ट करने हेतु बुलाई गई है। उन्होंने बताया कि बोर्ड की गठन की मांग पिछले एक वर्ष से की जा रही थी। ब्रज की विरासत को धरोहर के रूप में संरक्षित करने, यहां के स्थानीय नागरिकों को मूलभूत सुविधायें देने, श्रद्धालुओं की श्रद्धा आस्था को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सभी सामान्य सुविधायें मुहैया कराने, देशी तथा विदेशी पर्यटकों को बढ़ावा देने आदि के सम्बन्ध में स्थानीय निकाय/प्राधिकरण तथा सभी विभागों को एक छत के नीचे लाने तथा आपसी तालमेल, विचार विमर्श कर पूरे ब्रज को विकसित कर उसके धार्मिक महत्व को बनाये रखने हेतु उप्र सरकार के अधिनियम द्वारा इस बोर्ड की स्थापना हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रज के विकास हेतु पहले भी राज्य/केन्द्र सरकार द्वारा कई योजनायें चलाई जा रही हैं। बोर्ड का एक उद्देश्य यह भी है कि उन योजनाओं का किसी भी तरह से दोहरीकरण न हो। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों से वर्तमान में ब्रज से सम्बन्धित सभी योजनाओं तथा 30 वर्ष तक की योजनाओं का लेखा जोखा मांगा है। उन्होंने सभी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों से कहा कि पहले जो भी योजना चलाई गई हैं उनमें आप लोंगो का आपसी समन्वय शून्य होने के कारण योजनाओं की जवाब देही लगभग न के बराबर रही है परन्तु इस बोर्ड के गठन के बाद ब्रज विरासत को विकसित करने तथा पर्यटन को गतिशीलता देने के लिए आप लोंगों को आपस में समन्वय स्थापित करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तक ब्रज के हेरिटेज को संरक्षित करने, समझने के लिए कोई भी विभाग नहीं था परन्तु ब्रज नियोजन विकास बोर्ड इस उद्देश्य के साथ धरातलीय स्तर पर कार्यो को क्रियान्वित करेगा कि ब्रज एक विकसित धार्मिक नगरी के रूप में जाना पहचाना जाय। यहां आने वाले सभी पर्यटक कई समस्याओं को सहते हुए भी यहां की कला, स्थापत्य, धर्म -आस्था, संगीत आदि को जीवन्त देखने के लिए लालायित रहते हैं। परन्तु हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम उनकी आस्था का सम्मान करते हुए उन्हें सभी सुविधायें मुहैया करायें ताकि यहां से जाने के बाद ब्रज विरासत सदैव उनके लिए आस्था तथा श्रद्धा का केन्द्र बनी रहे न कि अभावों तथा गन्दगी का ढे़र। उन्होंने बताया कि बोर्ड के सदस्यों को नामित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री बोर्ड के अध्यक्ष हैं तथा बोर्ड के सदस्यों की सहमति से ही कांउसिल के सदस्यों को भी नामित करने का प्रावधान है। बोर्ड की वित्तीय संरचना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, विभागीय निधि, निजी क्षेत्रों से प्राप्त फंड, दानदाता, मन्दिर ट्रस्ट आदि से प्राप्त फंड इसका स्रोत होंगे। इसके लिए बोर्ड की अपनी निधि भी गठित की जायेगी जिसे विकास बोर्ड निधि कहा जायेगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व जयशंकर मिश्र, अपर जिलाधिकारी कानून व्यवस्था श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा, एमवीडीए के अध्यक्ष एसवी सिंह, उपाध्यक्ष नागेन्द्र प्रताप, नगर पालिका अध्यक्षा श्रीमती मनीषा गुप्ता सहित सभी सम्बन्धित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

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मथुरा : धर्म और मजहब की दीवारें तोड़ते हुए गंगा-जमुनी तहजीब आज भी ब्रज में जिंदा है। हिन्दू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का ही परिणाम है कि जिस मथुरा को विश्व भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के तौर पर जानता है उनके परिधान और श्रृंगार सामग्री के निर्माण का काम एकदूसरे के बिना पूरा नहीं होता है।  वर्षों से इस काम में जुटे हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के आपसी सामंजस्य का ही नतीजा है कि यहां तैयार होने वाली ठाकुरजी की पोशाकें और श्रृंगार की वस्तुओं की मांग देश के विभिन्न प्रान्तों के अलावा विदेशों में भी बढ़ती जा रही है। इन कारीगरों द्वारा तैयार किए गए डिजाइन और नई-नई डिजायनों की पोशाकों को विदेशों में भी खूब सराहा जा रहा है।  भगवान श्रीकृष्ण की जन्म एवं क्रीड़ास्थली के रूप में विख्यात मथुरा-वृंदावन अब राधा-कृष्ण के पोशाक एवं श्रृंगार सामग्री के निर्माण का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बन चुका है। जैसे-जैसे जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आ रहा है, देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी विभिन्न डिजायन और वैरायटी की पोशाकों के लिए बड़ी संख्या में आर्डर स्थानीय दुकानदारों को मिल रहे हैं। दुकानदार अब इन आर्डरों को पूरा करने के लिए माल तैयार कराने के लिए पोशाक-श्रृंगार के काम में महारत हासिल स्थानीय कारीगरों की मदद ले रहे हैं। कारीगर दिन-रात एक कर काम पूरा करने में जुटे हैं।   ठाकुरजी की पोशाकें एवं मुकुट पर किए जाने वाले जरदोजी (हैंड एम्ब्रोडिंग) के काम में मुस्लिम कारीगर महारत हासिल किए हुए हैं। सितारे व रत्नजड़ित पोशाकें बनने के लिए वृंदावन के बजाय मथुरा में भेजी जाती हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों कारखाने घरों में ही संचालित हैं। जहां कारीगर इन पोशाकों को आकर्षक ‘लुक’ देते है। कपड़े पर एम्ब्रोडिंग करने के बाद सिलाई के लिए भेजा जाता है।  एक तरफ जहां यह कारोबार दिनोंदिन बढ़ रहा है वहीं इसमें जुटे कारीगरों की हालत में कोई ज्यादा सुधार नहीं आया है। इस सम्बन्ध में मुकुट जरदोजी का काम करने वाले मुस्लिम कारीगर पप्पू भाई, जो पिछले करीब 30 वर्ष से अधिक समय से इसी कारोबार को करते हैं, ने बताया कि जरदोजी के काम से जुड़े कारीगरों को कुछ वर्ष पूर्व सरकार द्वारा हस्त शिल्पी के परिचय पत्र जारी कराए गए थे लेकिन कारीगरों की माली हालत सुधारने और उनकी सेहत के लिए कोई पहल नहीं की गई। जरदोजी का काम बारीक होने के कारण कारीगरों को नजर कमजोर होने की शिकायत हो जाती है। चश्मे लगने के बाद भी सुई में धागा डालना भी मुश्किल होता है। इस काम से जुड़े दूसरे कारीगरों फाजिल, इरशाद, चाँद, बबलू, इकरार, अवरार, शकील, इरफान, अफजाल व रियाज ने बताया कि करीब आठ घंटे काम करने के बाद 400 रुपये की दिहाड़ी मिलती है जबकि ओवर टाइम करने पर प्रतिघंटे 50-100 रुपये की मजदूरी मिलती है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इस काम से जुड़े हैं। मथुरा शहर में ये काम 100 से ज्यादा जगहों पर चल रहा है।  इलाके में कई छोटे-बड़े हजारों कारखाने संचालित है जहां पोशाक सिलाई का काम होता है। बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार भी इस व्यवसाय से जुड़े हैं। घरों में महिलाएं भी अपने बचे समय में पोशाक सिलाई कर अतिरिक्त आमदनी कर रही हैं। वृंदावन स्थित गौरा नगर कालोनी एवं निकट के कई गांवों में घर-घर में पोशाक उद्योग लोगों की रोजी-रोटी का जरिया बना है। एक कारखाने पर सिलाई का काम करने वाले बिहारी, शंकर, राजेश, श्याम सिंह, रामकिशन, राजू एवं धर्मेन्द्र ने बताया कि उन्हें आठ घंटे के काम की मजदूरी 300 रुपये से लेकर 500 रुपये तक मिलती है जबकि ओवरटाइम का अलग से चार्ज होता है। वृंदावन के प्रमुख बाजारों और मंदिरों के निकट स्थित दुकानों पर ठाकुरजी के श्री विग्रह एवं पोशाक व मुकुट के अलावा अन्य श्रृंगार वस्तुएं बेचने वाले व्यवसाई पोशाक और मुकुट की कीमत उसकी चमक-दमक के अनुसार तय करते हैं जबकि कारीगर को एक निश्चित रकम ही बतौर मजदूरी दी जाती है जिसके चलते ये बिचौलिए मोटी कमाई कर फल-फूल रहे हैं और मजदूर रोटियों के लिए मोहताज बना रहता है। बाजार में शोहरत पा चुके एवं इस व्यवसाय में पकड़ बना चुके ये बिचौलिए अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, रूस व मेक्सिको सहित तमाम देशों से आर्डर लेने के साथ ही बड़ी मात्रा में यहां पोशाक व श्रृंगार के सामान की आपूर्ति करते हैं। यहां दर्शनों को आने वाले श्रद्धालु भी अपने घरों में नित्य पूजे जाने वाले ठाकुरजी के लिए पोशाक व मुकुट एवं श्रृंगार प्रसाधन खरीदने के लिए इन्ही प्रतिष्ठित शोरुम का रुख करते हैं और पसंद आने पर दुकानदार को मुंहमांगी कीमत भी अदा करते हैं। जानकारों की मानें तो पोशाक, मुकुट और श्रृंगार के सामान पर ट्रेड टैक्स ना के बराबर है जबकि देश के विभिन्न प्रान्तों और विदेशों में लगातार बढ़ती डिमांड से इस कारोबार का टर्नओवर प्रतिमाह करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है। पोशाक उद्योग से जुड़े श्रीदास प्रजापति ने बताया कि वृंदावन में इस्कान के भक्तों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु यहां आते हैं और विभिन्न मंदिरों में दर्शनों के दौरान ठाकुरजी के आकर्षक परिधान और श्रृंगार को देख अपने यहां भी ऐसा ही ठाकुरजी के श्रृंगार के लिए पोशाक एवं मुकुट आदि तैयार करने का आर्डर देते हैं। ठाकुरजी के श्रृंगार में विदेशी भक्त किसी तरह की कंजूसी नहीं बरतते और नई-नई डिजाइन और वैरायटी की पोशाक खरीदने में रुचि दिखाते हैं।  वहीं, पोशाक विक्रेता मदन मोहन शर्मा ने बताया कि विदेशों में भी अब वृंदावन में तैयार होने वाली पोशाक और मुकुट के अलावा श्रृंगार सामिग्री की डिमांड बढ़ी है। जन्माष्टमी के चलते बड़ी संख्या में आर्डर मिल चुके हैं। दिन-रात कारीगरों से काम लिया जा रहा है। अभी भी जन्माष्टमी के लिए आर्डर आने का सिलसिला जारी है। ये सभी काम हर हाल में जन्माष्टमी से कम से कम दो दिन पूर्व पूरा कर उन्हें सौंपने हैं। यह व्यवसाय इससे जुड़े कारीगरों व व्यवसाइयों के अलावा कोरियर कंपनियों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। जिसके चलते कई कोरियर कंपनियां सिर्फ पार्सल ही बुक करती हैं। आर्डर पर यहां तैयार होने वाले माल को देश के अलग-अलग प्रान्तों के विभिन्न शहरों में तथा विदेशों तक पहुंचाने के लिए व्यापारी कोरियर कंपनियों का सहारा लेते हैं। इन निजी कंपनियों से माल सही हाथों में पहुंचने एवं निर्धारित समयावधि में पहुंचाने की भी जिम्मेदारी होती है। इसके एवज में विभिन्न कोरियर कंपनियों के अलग-अलग शुल्क तय हैं। इससे कोरियर कंपनियों की रोजाना अच्छी-खासी कमाई हो रही है।

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बहुत से गीत ऐसे हैं जिनके मुखड़े बातचीत करते, सड़क पर चलते, यूं ही अधरों से फिसल जाते हैं। बाद में मुखड़े को आगे बढाकर पूरा गीत ही बन जाता है।  जैसे साल 1955 में आई फिल्म 'श्री 420' के गाने 'मुड़-मुड़ के ना देख मुड़-मुड़ के' के जन्म की कहानी है। गीतकार शैलेंद्र ने तब नई-नई कार खरीदी थी। अपने दोस्तों को लेकर वह सैर पर निकले। लाल बत्ती पर कार रुकी, तभी एक लड़की कार के पास आकर खड़ी हो गई। कार में बैठे सभी उसे कनखियों से निहारने लगे। बत्ती हरी हुई तो कार चल पड़ी। शंकर उस लड़की को गर्दन घुमाकर देखने लगे। इसपर शैलेंद्र ने चुटकी ली-- 'मुड़ मुड़ के न देख मुड़ मुड़ के...'। बस फिर क्या था... सभी चिल्लाए ‘पूरा करो... पूरा करो...'। कार चलती रही और एक लाइन, दूसरी लाइन और फिर पूरे गाने का जन्म कार में हो गया। ऐसे ही फिल्म 'सपनों के सौदागर' के निर्माता बी. अनंथा स्वामी ने इसके लिए एक गाना लिखने को दिया। शैलेंद्र का मूड ही नहीं बनता था। काफी वक्त निकल गया। अनंथा स्वामी तकादे पर तकादे करते थे और वह उनसे कन्नी काटते। एक दिन अनंथा स्वामी और शैलेंद्र का आमना-सामना हो गया। अनंथा स्वामी को नाराज देखकर शैलेंद्र के मुंह से निकल पड़ा-- 'तुम प्यार से देखो, हम प्यार से देखें, जीवन की राहों में बिखर  जाएगा उजाला...'  यह लाइन सुनकर स्वामी की नाराजगी उड़नछू हो गई और बोले ‘आप इसी लाइन को आगे बढ़ाइए।' इस तरह 'सपनों के सौदागर' फिल्म के इस गाने का जन्म हुआ। राजकपूर और शैलेन्द्र के रिश्तों में आई खटास की खबर पर उनकी पुत्री अमला कहती हैं... ‘खटास कभी नहीं आई... हां, वैचारिक मतभेद 'तीसरी कसम' के अंत को लेकर जरूर सामने आए। राज कपूर चाहते थे कि फिल्म का अंत सुखद हो जबकि शैलेंद्र चाहते थे अंत दुखांत हो तभी तो कहानी शीर्षक 'तीसरी कसम' को चरितार्थ करती है। शैलेंद्र अड़े रहे, इससे राज कपूर बहुत दुखी हुए। इसी तरह 'जिस देश में गंगा बहती है' फिल्म में एक गाना है-- 'कविराज कहे, न राज रहे, न ताज रहे, न राज घराना...'। लोगों ने राज कपूर को भड़काया कि शैलेन्द्र ने इस गाने में आपपर चोट की है। तब राज कपूर ने शैलेन्द्र के आलोचकों की जमकर खिल्ली उड़ाई। शैलेंद्र के अंतिम संस्कार के समय राज कपूर को बेहद दुखी मन से कहते सुना गया कि 'कमबख्त, तुझे आज का दिन ही चुनना था' (दरअसल, 14 दिसंबर, जिस दिन शैलेन्द्र की मृत्यु हुई उस दिन राजकपूर का जन्म दिन भी था)। यह राज कपूर और शैलेंद्र की दोस्ती का ही एक नमूना था कि उन्होंने जब आरके स्टूडियो की नौकरी शुरू की तब उनकी पगार 500 रुपये थी और आखिरी दम तक यह 500 रुपये ही रही जबकि वह अपने जमाने के सबसे महंगे फिल्मी गीतकार थे। शैलेन्द्र अपने जीवन में ही काफी प्रसिद्ध हो गए थे। एक के बाद एक उनके सभी गीतों ने धूम मचा दी थी। फिर भी राष्टीय स्तर पर उन्हें कोई बड़ा पुरस्कार क्यों नहीं मिला... इसके जवाब में उनके पुत्र दिनेश कहते हैं ‘बाबा (शैलेंद्र) की कोई 'लॉबी' नहीं थी। वह इन सब में यकीन भी नहीं करते थे। यदि लॉबी होती तो उनकी मृत्यु (1966) के बाद उन्हें अनेक पुरस्कार समय समय पर मिलते। हां, उनके जाने के बाद भारत सरकार ने उनपर एक डाक टिकट निकाला। यह भी कोई कम बड़ी उपलब्धि नहीं थी...। (गीतकार शैलेंद्र के पुत्र दिनेश और पुत्री अमला से की गई बातचीत के आधार पर)

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मथुरा। वृंदावन नगर की परिक्रमा मार्ग में आए दिन होने वाली घटनाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे परिक्रमा मार्ग में सीसी टीवी कैमरे लगाए गए हैं। ताकि अपराधियों पर नजर रखी जा सके। आज से सीसी टीवी कैमरों को लगाने का काम शुरू हो गया है। इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा तय होगी वहीं उन पर बदमाशों का हमला न हो इस पर भी नजर रखी जाएगी। सीसी टीवी कैमरे लगने से परिक्रमार्थियों को काफी सुविधा होगी। आज इस संबंध में इंस्पेक्टर कोतवाली ने बताया कि पूरे परिक्रमा क्षेत्र में सीसी टीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। बारह घाट, जुगलघाट, पर लट्ठे गढ़ गए हैं। 

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मथुरा। केन्द्रीय टेªड यूनियनों, महासंघों व स्तंत्र फेडरेशनों के आव्हान पर सरकार की जन विरोधी, मजदूर विरोधी व काॅरपोरेटेड-परस्त नीतियों के विरुद्ध आज बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल/कार्यबहिष्कार का आव्हान किया गया है। उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ एटक व विद्युत मजदूर संगठन, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय उपमहामंत्री का. शैलेन्द्र कुमार ने जनपद के समस्त कर्मचारीगणों, मजदूर भाईयों व संविदा कर्मचारियों से अनुरोध है कि अपनी व्याप्त मांगों को लेकर कल होने वाली हड़ताल में प्रातः 10 बजे का. धर्मेन्द्र कुमार स्मृति सभागार कैंट पर उपस्थित होकर आंदोलन को सफल बनाएं। 

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मथुरा। लक्ष्मी नगर चैकी प्रभारी केपी सिंह ने शातिर चोरों के गिरोह को पकड़ा है। जिनसे तमंचा कारतूस भी बरामद हुए हैं। बताया गया कि चैकी प्रभारी और पुलिसबल गश्त पर था तभी चैराहे के पीछे खड़े बदमाश जो चोरी की योजना बना रहे थे उन्हें पुलिस ने घेर लिया। पकड़े गए चोरों से चोरी के उपकरण, तमंचा कारतूस बरामद हुए है। सचिन और कापूरा गिरफ्तार हैं, जबकि इनका एक साथी भाग गया। इन चोरों का लक्ष्मी नगर क्षेत्र में आतंक था। 

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मथुरा। फरह में गत सात माह पूर्व हुई हत्या के मामले में मुकद्मा न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ है। जानकारी के मुताबिक सीता देवी पत्नी सुबोध चैरसिया निवासी पर्वतीय काॅलौनी फरीदाबाद ने रिपोर्ट लिखाई कि उसके पुत्र आशीष को नामजद व्यक्ति और उसके साथियों ने मार दिया और अब मुझे भी जान से मारने की धमकी दे रहे है। पुलिस का कहना है कि मामला संदिग्ध है। इस संबंध में धाना जीवना फरह निवासी प्रकाश आदि चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है।  वहीं थाना हाइवे के तीन आरपीडी ग्राउण्ड में ढाई वर्षीय हनी को सामान दिलाने के बहाने ले जाकर कुएं में फेंक दिया, उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस संबंध मंे योगेश पुत्र मुन्नू निवासी शंकर पुरी हाइवे के खिलाफ बालक के पिता मलखांन निवासी शंकर पुरी ने हत्या का मामला दर्ज कराया है। घटना 19 जून बताई जाती है। वहीं थाना शेरगढ़ के गांव उझानी में 31 मई को हुई हत्या के मामले में न्यायालय के आदेश पर मुकद्मा दर्ज हुआ है। पीड़ित राजकुमार निवासी खोड़ा ने रिपोर्ट लिखाई है कि उसका पुत्र पप्पू 22 वर्ष ईंट थफाई का कार्य करता था। उसके साथ प्रेम पाल पुत्र दीपा निवासी मेवाती मौहल्ला सुरीर आदि पांच लोगों ने मारपीट की, उसका अपहरण कर लिया और हत्या कर शव पेड़ से लटका दिया। पुलिस का कहना है कि पुराने विवाद में घटना हुई है। 

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मथुरा। भरतपुर गेट चैकी इंचार्ज एमएस चाहर ने एक दर्जन मुकद्मों में वांछित चल रहे युवक को पकड़ा है। जानकारी के अनुसार अक्षय उर्फ अकील पुत्र नबाव निवासी मटियागेट चोरी, लूट तथा वृंदावन में नकबजनी के आरोप में वांछित चल रहा था। आज भरतपुर गेट चैकी प्रभारी ने कल्लू मल्लू कारखाने के पास से अकील को 650 ग्राम नशीला पाउडर सहित गिरफ्तार किया है।  इस संबंध में कोतवाली प्रभारी चन्द्रभान सिंह ने बताया कि यह फरीदाबाद में रहता है और वहां इसका एक गैंग चल रहा है। वहीं से आकर यह घटनाओं को अंजाम देकर यहां से फरार हो जाता है। इस पर करीब एक दर्जन मुकद्में में वांछित चल रहा है।  

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मथुरा। उप्र राज्य महिला आयोग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों के स्थानीय गेस्ट हाउस में आज सितम्बर को महिला जन सुनवाई/समीक्षा बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में जनपद में सदस्या श्रीमती सुमन दिवाकर द्वारा आगामी बुधवार को महिला उत्पीड़न की रोकथाम एवं पीड़ित महिला को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में विचार विमर्श कर निर्णय लिया जायेगा। आयोग की सदस्य सचिव ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को नामित करने के साथ ही साथ सम्बन्धित महिला थानाध्यक्ष एवं सम्बन्धित थाने के क्षेत्राधिकारी को बैठक में भाग लेने हेतु निर्देशित कर दिया जाय।

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मथुरा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण  पीके उपाध्याय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि एनएफडीबी योजना के अन्तर्गत रिटेल फिश मार्केंटिंग (फुटकर में मछली बेचने हेतु) एक मोपेड हैबी ड्यूटी (आईस बाॅक्स के साथ) कीमत रू0 37600-00 एवं 02 ट्राई साइकिल ( इन्सुलेटेड बाॅक्स के साथ) कीमत रू0 37900-00 प्रति का लक्ष्य जनपद को प्राप्त हुआ है। मोपेड एवं ट्राई साइकिल निर्धारित मूल्य पर सामान्य जाति के व्यक्तियों को 25 प्रतिशत एवं अनु0जातिध्जनजाति के लाभार्थियों 30 प्रतिशत जिसकी अधिकतम धनराशि रू0 10000-00 होगी, एन0एफ0डी0बी0 द्वारा अनुदान देय है शेष धनराशि लाभार्थी बैंक के माध्यम से ऋण प्राप्त कर अथवा स्वयं के द्वारा वहन कर सकता है। मत्स्य व्यवसाय से जुडेघ् इच्छुक व्यक्ति अपना आवेदन आगामी 04 सितम्बर तक राजीव भवन स्थित कार्यालय में जमा करा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय से सम्पर्क कर पता किया जा सकता है।

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