मथुरा : प्रशासनिक उदासीनता के चलते अधिक मास के दौरान गिरिराज धाम गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि गिरिराज तलहटी क्षेत्र में चल रहे सभी कार्य अधूरे ही पड़े हैं और अफरातफरी के बीच कई स्थानों पर काम पूरी तरह रुक गया है। विदित हो कि अधिक मास में गोवर्धन परिक्रमा के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसमें एकादशी, पूर्णिमा, शनिवार, रविवार और अमावस्या जैसी तिथियों पर भारी संख्या में परिक्रमार्थियों का जमावड़ा रहता है। पूर्व में जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों को इस मेले की व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन इस बार कहीं भी व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही हैं। विश्व विख्यात पुरुषोत्तम मास मेले के लिए भी प्रशासन भले ही लाख इन्तजाम किए जाने का दम्भ भरता हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मेले के लिए चल रहे कार्य अभी भी आधे-अधूरे पड़े हुए है। गिरिराज परिक्रमा के अन्तिम चरण में गिरिराज मुकुट मुखार बिन्द मन्दिर तक आने वाले मार्ग को करीब आधा किलोमीटर पहले से ही उखाड़ दिया गया है और उसके ऊपर सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है, जो अभी बन ही रहा है। यहां कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि इस गति से चल रहे काम के चलते अभी भी इस सड़क के निर्माण कार्य को पूरा होने में करीब 10 दिन का समय और लगेगा। इस निर्माण कार्य के चलते यहां से आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। श्रद्धालुओं के वाहन, यात्रा, काफिले आदि पिछले करीब दो सप्ताह से रास्ते बदलकर बाहर से ही निकल जाते हैं और मानसी गंगा एवं मुकुट मुखार बिन्द मन्दिर के दर्शन-आचमन से वंचित रह जाते हैं। मुकुट मुखार बिन्द मानसी गंगा मन्दिर के सेवायत इस तथाकथित विकास कार्य को जमकर कोस रहे हैं। इससे उनकी आजीविका भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गिरिराज धाम कस्बे में चारों तरफ गन्दगी, टूटी सड़क, बिजली, पानी, जैसी तमाम समस्याएं भी जस की तस बनी हुई हैं। परिक्रमा मार्ग में फैली पड़ी अव्यवस्थाओ से निपटने एवं कार्यपूर्ण करने के लिए जिलाधिकारी राजेश कुमार ने सम्बधित विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को सख्त निर्देश दे रखे हैं लेकिन विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी जिलाधिकारी के निर्देशों का कहीं कोई पालन करते दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। डग्गेमार वाहन संचालक अलग से परेशानियां खड़ी करते हैं। स्थानीय पुलिस की मौन स्वीकृति मिली होने के कारण इन डग्गेमार वाहन संचालकों से कोई भी कुछ कहने का साहस नहीं रखता जिसके कारण कस्बे में लगने वाले जाम में वाहनों की लम्बी कतारें लग जाती हैं। शहर में नए बस स्टैंड से लेकर भूतेश्वर और गोवर्धन चौराहे तक श्रद्धालुओं का रेला बसों के लिए भटकता देखा जा सकता है। इक्का-दुक्का बसों में लोग बुरी तरह ठुंसे रहते हैं और छतों पर बैठने के लिए होड़ लगी रहती है। भूतेश्वर से लेकर कृष्णा नगर मार्ग होते हुए गोवर्धन चौराहे पर जाम के हालात बने रहते हैं। यही हाल गोवर्धन कस्बे का है। पार्किंग स्थलों पर भारी वाहनों की भीड़ जमा है तो लोग वहां से पैदल ही आगे बढ़ पा रहे हैं। पुलिस यातायात को संभालने का प्रयास जरूर कर रही है, पर आने वाले दिनों में जो भीड़ टूटेगी, उसके हिसाब से यातायात संभल पाएगा, अभी मुश्किल नजर आ रहा है। राधा कुण्ड निवासी केसी गौड़ ने बताया कि डग्गेमार वाहनों के जमावड़े से परिक्रमाथियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोई बैरियर नहीं लगा हुआ है और ना ही पुलिस द्वारा कोई पुख्ता इंतजाम है। गोवर्धन निवासी सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने बताया कि बस स्टैंड से मुखार बिन्द तक घंटों जाम लगा रहता है जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी लम्बी कतार लगाकर जाना पड़ता है। जतीपुरा निवासी प्रेम पाल ने बताया कि जतीपुरा मार्ग की चौड़ाई कम है और वाहनों की संख्या सैकड़ों में है जिससे जाम हर वक़्त बना रहता है पुलिस द्वारा कोई पुख्ता इंतजाम नहीं की गए हैं। ब्रज बचाओ समिति के सदस्य उमा शंकर सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राधा कुण्ड मार्ग में सड़क खुदी हुई है। उसमें से निकलते छोटे-छोटे कंकड़ों से परिक्रमार्थियों के पैरों में छाले तक पड़ जाते हैं। परिक्रमार्थी पोप सिंह ने बताया कि जहां-जहां सीमेंट की सड़क है वहां तो परिक्रमा देना आसान है और जहा डामर की सड़क है वहां काफी तकलीफदेय है। दिल्ली से आई भक्त सुनीता शर्मा के चेहरे पर जाम में घंटों फंसे रहने की परेशानी साफ देखी जा सकती है। आन्यौर निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि पानी की बड़ी किल्लत है। लोगों को खारा पानी मुहैया कराया जा रहा है। दूसरी ओर, भक्ति के सागर में आस्था की लहरें उमड़ रही हैं। गिरिराज भक्ति में आकंठ डूबे लोगों के मुंह से परिक्रमा मार्ग में बस एक ही शब्द की ध्वनि सुनाई दे रही है, गोवर्धन महाराज की जय और राधे-राधे। भीषण गर्मी में पसीने से नहाए श्रद्धालु अपने इष्ट की भक्ति में डूबे सिर्फ राधे-राधे के सहारे 21 किलोमीटर नंगे पैर चलकर अपने देव को मनाने में लगे हुए हैं। तलहटी में चारों ओर राधे-राधे के स्वर गुंजायमान हैं।
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