आगरा : सूर सरोवर क्षेत्र में हरियाली बचाने के लिए सुबह पालीवाल पार्क में प्रकृति प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनता को जाग्रत करने के उद्देश्य से धरना दिया और गोष्ठी के माध्यम से समस्या के विभिन्न आयामों के बारीक पहलुओं पर विमर्श किया। धरना में शामिल लोगों ने राय व्यक्त की कि सरकारी विभागों और आला अफसरों को जल्दबाज़ी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए बल्कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की गाइडलाइन्स के हिसाब से यमुना नदी के किनारे जंगलों को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। आगराटुडे.इन के संपादक ब्रज खण्डेलवाल ने कहा कि मण्डलायुक्त ने हरियाली का क्षेत्र बढ़ाने की जगह और कम करने की सिफारिश की है। नेशनल हाईवे को सिक्स लेन किए जाने से पहले ही हज़ारों वृक्ष काटे जा चुके हैं। मथुरा रिफाइनरी और ताज महल के बीच में सूर सरोवर वन्य क्षेत्र सुरक्षा कवच के रूप में विकसित किया गया था जो राजस्थान के रेगिस्तान को रोकने में भी बेहद सहायक हुआ था। स्वार्थी तत्वों के दबाव में फॉरेस्ट लैंड से खिलवाड़ करना आने वाली पीढ़ियों के लिए कष्टदायक होगा। सूर सरोवर वन्य क्षेत्र बचाओ समिति के अध्यक्ष गोस्वामी मुरारी लाल शर्मा ने कहा कि जनता को जागरूक होकर जंगलों का नाश करने की साज़िशों का कड़ा विरोध करना होगा। बाईंपुर के माधव सिंह यादव ने हरियाली सीमित करने के प्रयासों की निंदा की। समाजसेवी श्रवण कुमार सिंह ने मण्डलायुक्त के कदम को घातक बताया। रिटायर्ड कर्नल सुनील चौपड़ा ने कहा कि मनमानी हरगिज़ नहीं चलने दी जाएगी और हरियाली ख़त्म करने की हर कोशिश को असफल कर दिया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि देश में अभी कानून का शासन लागू है। फॉरेस्ट एक्ट और सेंसिटिव ज़ोन्स के नियमों को ताक में रखकर अगर कोई योजना बनती है तो उसका विरोध किया जाना चाहिए। ईको क्लब के प्रदीप खण्डेलवाल ने कहा कि हरियाली को नष्ट करना आसान है, संरक्षित करके उसको विकसित करना बड़ी मेहनत और लगन का कार्य है। कैलाश मंदिर, यमुना नदी के किनारे कीठम झील एरिया में अनेक पौराणिक स्थल हैं जिनका संरक्षण होना चाहिए और शहरीकरण के विस्तार से इस हरे भरे क्षेत्र को सुरक्षित रखना चाहिए।
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