मथुरा : वृंदावन के अंतर्गत पानी गांव से छटीकरा तक अवैध कालोनी काटने का धंधा चरम पर है। महंगी कारें जैसे बड़े तोहफे देकर एजेंटों के जरिए ग्राहकों को ‘लूटने’ का क्रम जारी है। शहर के कई बड़े होटलों में ऐसी कई कंपनियों के दफ्तर खोले गए हैं। लग रहा है कि जिला प्रशासन का ध्यान फिलहाल इस ओर नहीं गया है। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। ‘रुपये 2.40 लाख का प्लॉट खरीदो और रुपये 2.56 लाख का बोनस वापस पाओ’ जैसे लुभावने नारों के चलते ग्राहक आसानी से इनके मकड़जाल में फंस जाते हैं। विज्ञापनों में कहीं भी यह नहीं लिखा जाता है कि इस प्लॉट का आकार क्या होगा और यह कहां होगा। नियम और शर्तों का कहीं भी उल्लेख नहीं किया जा रहा है। विज्ञापनों में यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि ये फ्लैट और प्लॉट विकास प्राधिकरण से ‘अप्रूव’ कराए गए हैं या नहीं...। कहां बन रहे हैं और कितने मंजिल के बन रहे हैं, इसकी भी कोई जानकारी विज्ञापनों में नहीं दी गई है। आश्चर्य की बात यह है कि छोटी-छोटी बातों पर नजर रखने का दावा करने वाला जिला प्रशासन इतने गंभीर मामले में तमाशबीन बना हुआ है। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण भी चुप्पी साधे बैठा है।
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